Report by : News Desk
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Sultanpur News: रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से खत्म हो रही मिट्टी की उर्वरा शक्ति
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Sultanpur News: खेतों में अंधाधुंध रासायनिक खादों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म हो रही है। किसानों को जागरूक करने के बावजूद स्थितियां जस की तस है। विभागों की ओर से मिट्टी की जांच की सुविधा मुफ्त है, बावजूद इसके किसान मिट्टी की जांच करवाने भी नहीं पहुंचते हैं। हालांकि, किसान मिट्टी की जांच करवाकर फसलों को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व दे सकते हैं। कृषि में मृदा परीक्षण या भूमि की जांच एक रासायनिक प्रक्रिया है। भूमि में उपलब्ध पोषक तत्वों की मात्रा के बारे में सही जानकारी मिलती है। इस परीक्षण से भूमि की उर्वरकता का पता चल जाएगा कि कौन से तत्वों की खेत में कमी है।


पौधों को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए 16 पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है। इसमें मुख्य रूप से कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नत्रजन, फॉस्फोरस, पोटाश, कैल्सिशयम, मैग्नीशियम, मैग्नीज, तांबा, लौह व क्लोरीन शामिल हैं। इन सभी तत्वों का संतुलित मात्रा में प्रयोग करने से ही उपयुक्त पैदावार ली जा सकती है। लगातार फसल उत्पादन में बढ़ोतरी के परिणाम स्वरूप पोषक तत्वों का ह्रास भी बढ़ रहा है। उर्वरकों और रासायनिक खादों से उनकी पूर्ति पूरी तरह से नहीं हो पा रही है। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर होती जा रही है। हमें मिट्टी की जांच करवानी चाहिए। ताकि हम पर्याप्त मात्रा में फसल का उत्पादन कर सकें।


जिला कृषि अधिकारी सदानंद चौधरी ने कहा कि खेत की मृदा का नमूना पूरी सावधानी से लेना चाहिए। नमूना लेने के लिए सभी सामान साफ होने चाहिए। खेत के चारों कोनों से मिट्टी का नमूना लिया जाए। यदि मृदा गीली हो तो इसे छाया में सुखा लें। भूमि के अंदर छह इंच से मिट्टी निकालकर चारों कोनों से एक जगह इकट्ठा करके मिला दिया जाए। इसके बाद पॉलिथीन में भरकर प्रयोगशाला में भेजा जाए।


कृषि योग्य भूमि की मिट्टी में पोषक तत्वों की लगातार कमी होती जा रही है। हालांकि कृषि विभाग हर साल पोषक तत्वों की कमी की समस्या के समाधान के लिए लगातार किसानों को खेतों पर खरपतवार नहीं जलाने और रासायनिक खाद के बजाय जैविक खाद का प्रयोग के लिए जागरूक कर रहा है। कृषि विभाग की ओर से 2024-25 के लिए जिले के 14,000 किसानों के खेत की मिट्टी की जांच की गई है। इसके लिए जिले के 14 ब्लॉक के 10-10 गांवों का चयन किया गया था। मिट्टी की जांच में चौंकाने वाले परिणाम आए हैं। मिट्टी के इन नमूनों में सबसे ज्यादा ऑर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन व फॉस्फोरस की कमी पाई गई है।

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