माउंट एकांकागुआ फतह करने निकली भारतीय पर्वतारोहण टीम, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया रवाना

माउंट एकांकागुआ फतह करने निकली भारतीय पर्वतारोहण टीम, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया रवाना

दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ाई का अभियान 6 फरवरी से शुरू, नेहरू और जवाहर पर्वतारोहण संस्थानों के अनुभवी पर्वतारोही शामिल

भारतीय पर्वतारोहियों की एक अनुभवी टीम अर्जेंटीना स्थित दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट एकांकागुआ (6,961 मीटर) को फतह करने के लिए रवाना हो गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को साउथ ब्लॉक स्थित रक्षा मंत्रालय से इस पर्वतारोहण अभियान को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाई।

इस अभियान में नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (निम) उत्तरकाशी और जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स (जिम्स एंड डब्ल्यूएस) पहलगाम के प्रशिक्षित पर्वतारोही शामिल हैं। माउंट एकांकागुआ न केवल दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी है, बल्कि एशिया के बाहर विश्व की सबसे ऊंची पर्वत चोटी मानी जाती है।

टीम को रवाना करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पर्वतारोहण केवल शारीरिक क्षमता की नहीं, बल्कि साहस, धैर्य, टीमवर्क और मानसिक दृढ़ता की भी परीक्षा होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय पर्वतारोही इन सभी गुणों के साथ देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करते हैं। रक्षा मंत्री ने दोनों पर्वतारोहण संस्थानों की सराहना करते हुए टीम को अभियान की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

इस अभियान में कुल छह अनुभवी पर्वतारोही शामिल हैं, जिनमें कर्नल हेम चंद्र सिंह, कैप्टन जी. संतोष कुमार, दीप बहादुर साही, विनोद गुसाईं, नायब सूबेदार भूपिंदर सिंह और हवलदार रमेश कुमार शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह पर्वतारोहण मिशन 6 फरवरी से शुरू होकर इस माह के अंत तक पूरा होने की संभावना है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस अभियान से प्राप्त अनुभव भविष्य में युवाओं, सेना के जवानों और साहसिक खेलों में रुचि रखने वालों को सुरक्षित और उन्नत प्रशिक्षण देने में सहायक होगा। साथ ही यह अभियान वैश्विक स्तर पर बड़े पर्वतारोहण अभियानों में भारत की मजबूत उपस्थिति को भी दर्शाता है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में भारतीय पर्वतारोहियों की एक संयुक्त टीम ने विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) को सफलतापूर्वक फतह कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी। 23 मई 2025 को हुए इस अभियान में भारतीय सेना के जवानों, प्रशिक्षकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया था। इस दल का नेतृत्व नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग के प्राचार्य कर्नल अंशुमान भदौरिया और जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स के प्राचार्य कर्नल हेम चंद्र सिंह ने किया था।