होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते खतरे से वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित, भारत के आयात बिल पर बढ़ सकता है बड़ा बोझ
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। United States, Israel और Iran के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुनिया की सबसे अहम तेल आपूर्ति लाइन मानी जाने वाली Strait of Hormuz पर खतरा बढ़ गया है।
इस मार्ग से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल और ईंधन की सप्लाई गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक तेल कीमतों को तेजी से ऊपर ले जाता है। इसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर सीधा पड़ रहा है।
भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। इसलिए मिडिल ईस्ट में संकट बढ़ने के साथ ही पेट्रोल, डीजल, एविएशन फ्यूल और एलपीजी जैसी सभी ईंधनों की कीमतों पर दबाव बढ़ने लगा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम
Strait of Hormuz ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।
- रोजाना 20 मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल यहां से गुजरता है।
- यह वैश्विक पेट्रोलियम तरल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा है।
- समुद्री तेल व्यापार का एक चौथाई से ज्यादा इसी रास्ते से होता है।
भारत के लिए यह रास्ता बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि Iraq, Saudi Arabia, United Arab Emirates और Kuwait से आने वाला करीब 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल इसी मार्ग से भारत पहुंचता है।
लेकिन मौजूदा तनाव के कारण जहाजों पर हमलों का खतरा, बीमा लागत में बढ़ोतरी और कई जहाजों का वैकल्पिक मार्ग अपनाना सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहा है।
भारत पर क्या पड़ रहा असर
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है।
- करीब 88% कच्चा तेल आयातित
- इसका लगभग आधा हिस्सा होर्मुज मार्ग से
- वैश्विक क्रूड ऑयल कीमतें 100–115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी हैं
विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत के आयात बिल पर 15–16 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
इसके अलावा भारत की लगभग 60% एलपीजी और आधी प्राकृतिक गैस भी मध्य पूर्व से आती है, जिसमें करीब 90% आपूर्ति होर्मुज मार्ग से गुजरती है।
हर तरह का फ्यूल क्यों हो रहा महंगा
कच्चा तेल सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसे रिफाइनरी में फ्रैक्शनल डिस्टिलेशन (आंशिक आसवन) की प्रक्रिया से अलग-अलग ईंधनों में बदला जाता है।
इस प्रक्रिया में कच्चे तेल को गर्म किया जाता है और हाइड्रोकार्बन अणुओं को उनके उबलने के तापमान (Boiling Point) के आधार पर अलग किया जाता है।
- हल्के हाइड्रोकार्बन → ऊपर जाकर पेट्रोल बनते हैं
- मध्यम हिस्से → केरोसिन और एविएशन फ्यूल
- भारी हिस्से → डीजल और अन्य ईंधन
यानी कच्चा तेल ही सभी ईंधनों का मूल स्रोत है। इसलिए जब कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होती है या उसकी कीमत बढ़ती है, तो पेट्रोल, डीजल, गैस, एविएशन फ्यूल और एलपीजी सभी महंगे हो जाते हैं।







