रेणुका मिश्रा और आलोक शर्मा बाहर, यूपी के नए DGP के लिए 3 नाम शॉर्टलिस्ट
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्थायी DGP की नियुक्ति को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस रेस से दो वरिष्ठ अधिकारियों के बाहर होने के बाद अब तीन नामों पर सबकी नजरें टिकी हैं।
सबसे पहले Renuka Mishra को इस दौड़ से बाहर कर दिया गया। वह यूपी कैडर की सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल थीं, लेकिन 2024 के पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में लापरवाही को उनके खिलाफ आधार बनाया गया। भर्ती बोर्ड की चेयरमैन रहते हुए परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने में विफल रहने के कारण उन्हें इस पद के लिए अनुपयुक्त माना गया।
वहीं Alok Sharma का नाम सेवा नियमों के चलते बाहर हो गया। नियमों के मुताबिक स्थायी DGP बनने के लिए कम से कम 6 महीने की सेवा शेष होना जरूरी है, जबकि उनकी सेवा अवधि इससे कम बची है।z
अब इन तीन नामों पर नजर
वरिष्ठ अधिकारियों के बाहर होने के बाद अब Union Public Service Commission (UPSC) के सामने तीन प्रमुख नाम विचाराधीन हैं:
- Piyush Anand (1991 बैच)
- Rajeev Krishna (1991 बैच)
- P.C. Meena (1991 बैच)
राजीव कृष्ण की मजबूत दावेदारी
इनमें Rajeev Krishna को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। उनका कार्यकाल जून 2029 तक है और उनकी पहचान एक ‘टेक्नोक्रेट’ अधिकारी के रूप में है।
उन्होंने ‘ऑपरेशन पहचान’ ऐप और ई-मालखाना जैसी डिजिटल पहल के जरिए यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली में आधुनिक बदलाव किए हैं, जिससे उनकी छवि और मजबूत हुई है।
चार साल से स्थायी DGP का इंतजार
उत्तर प्रदेश में मई 2022 में Mukul Goel को हटाए जाने के बाद से अब तक कोई स्थायी DGP नियुक्त नहीं हो पाया है।
इस दौरान Devendra Singh Chauhan, Rajkumar Vishwakarma, Vijay Kumar, Prashant Kumar और वर्तमान में Rajeev Krishna कार्यवाहक के रूप में जिम्मेदारी संभालते रहे हैं।
क्या इस बार मिलेगा स्थायी मुखिया?
यदि UPSC पैनल को मंजूरी मिल जाती है, तो लंबे समय बाद उत्तर प्रदेश पुलिस को अपना पूर्णकालिक DGP मिल सकता है। यह नियुक्ति प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक दिशा के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।







