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  • Delhi Riots: 2020 के दंगों में आईबी अफसर के कत्ल की कहानी, कैसे फंसा ताहिर हुसैन? अंकित की हत्या में छह दोषी

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    आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत छह आरोपियों को अदालत ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अफसर अंकित शर्मा की हत्या में दोषी करार दिया। अंकित की हत्या 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों के दौरान की गई थी। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने हुसैन को आईपीसी की धारा 302 हत्या समेत कई धाराओं में दोषी ठहराया। उसे सरकारी आदेश की अवहेलना, लोगों के बीच धर्म के नाम पर शत्रुता फैलाने, दंगा और बलवा करने, घातक हथियार रखने, सामूहिक अपराध, किसी को गुप्त रूप से कैद करने के आरोपों में दोषी पाया गया। हालांकि, कोर्ट ने आपराधिक साजिश रचने और बतौर लोकसेवक अपराध करने के आरोपों से उसे बरी कर दिया।

    अदालत ने ताहिर हुसैन के अलावा नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भी दोषी करार दिया, जबकि हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, फिरोज, गुलफाम, शोएब, समीर खान और मुंतजिम उर्फ मूसा को बरी कर दिया। हुसैन, नाजिम व कासिम को छोड़ अन्य तीन अभियुक्तों को जमानत मिल गई। अदालत सभी की सजा पर बाद में फैसला सुनाएगी।
    हुसैन की जमानत याचिका बीते साल सितंबर में हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी। मामला दयालपुर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। अंकित के पिता की शिकायत पर केस दर्ज हुआ था। दंगों के दौरान लापता हो जाने के बाद अंकित का शव बाद में नाले से बरामद हुआ था।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि अंकित के शरीर पर धारदार हथियारों से 51 वार किए थे। मार्च, 2023 में ट्रायल कोर्ट ने ताहिर, हसीन, नाजिम, कासिम, समीर खान, अनस, फिरोज, जावेद, गुलफाम, शोएब आलम और मुंतजिम के खिलाफ आरोप तय किए। नाजिम पर शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत भी आरोप लगाए गए थे।

    वर्ष, 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थकों और मुस्लिम समुदाय के प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुईं, जिसमें 53 लोग मारे गए। कई घायल हुए थे। 25 फरवरी को अंकित शर्मा आरोपियों को शांत करने और उनसे कानून हाथ में नहीं लेने का आग्रह कर रहे थे। तभी उन्हें पकड़ लिया और उनकी हत्या करने के बाद शव नाले में फेंक दिया गया।

    2020 दिल्ली दंगे मामले में एआईएमआईएम उम्मीदवार ताहिर हुसैन को कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने पर आम आदमी पार्टी ने सफाई दी है। पार्टी ने कहा कि ताहिर हुसैन का आम आदमी पार्टी से कोई संबंध नहीं है और उन्हें पांच साल पहले ही पार्टी से निलंबित किया जा चुका है। ताहिर हुसैन 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी थे। न्यायालय की ओर से उन्हें दोषी पाए जाने के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पार्टी ने बताया कि ताहिर हुसैन ने हाल में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव मुस्तफाबाद सीट से एआईएमआईएम के टिकट पर लड़ा था। यह सीट मुस्लिम बाहुल्य है।

    पार्टी के अनुसार, उनके चुनाव लड़ने से मुस्लिम वोट बंट गए और इसका फायदा भाजपा उम्मीदवार को मिला। पार्टी ने कहा कि 2020 के दिल्ली दंगे मामले में ताहिर हुसैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज होते ही 27 फरवरी 2020 को उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था। पार्टी की ओर से बताया गया कि उस समय के बाद से ताहिर हुसैन का आम आदमी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।

    दिल्ली दंगों के दौरान हमारी मुख्य जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना और निष्पक्ष व सबूतों पर आधारित जांच सुनिश्चित करना था। विश्वसनीय सबूत जुटाने और दोषियों को कानून के सामने लाने की हर संभव कोशिश की गई। कोर्ट का फैसला आने के बाद, मुझे इस बात का संतोष है कि जांच टीम की कड़ी मेहनत और पेशेवर रवैये ने न्यायिक जांच की कसौटी को सफलतापूर्वक पूरा किया है। हम 2020 के दंगों के दौरान हुए अपराधों के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को कानून की उचित प्रक्रिया के जरिए सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। – सतीश गोलछा, पुलिस आयुक्त दिल्ली पुलिस

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    News Desk

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