
Sadhvi Balak Das की पुण्यतिथि के अवसर पर नई दिल्ली के करोल बाग में स्वस्ति फाउंडेशन एनजीओ द्वारा आध्यात्मिकता, सामाजिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। परम पूज्य साध्वी बालक दास जी महाराज की स्मृति में आयोजित इस सत्संग सभा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान निःशुल्क तुलसी के पौधों का वितरण किया गया और लोगों को पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण तथा पौधारोपण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।
स्वस्ति फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन संस्था की सक्रिय सदस्य वीणा जजोरिया ने किया। आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती शीला जी, डॉ. एस.के. जैन तथा स्वस्ति फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष श्री शैलेश प्रकाश शास्त्री विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने साध्वी बालक दास जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आध्यात्मिक जीवन और समाजसेवा के कार्यों को स्मरण किया।
कार्यक्रम में आध्यात्मिक वातावरण के बीच सत्संग, प्रेरक विचार और पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रमुख आकर्षण रहे। उपस्थित लोगों ने यह संकल्प भी लिया कि वे अपने आसपास अधिक से अधिक पौधे लगाएंगे और पर्यावरण को स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
Sadhvi Balak Das की स्मृति में तुलसी वितरण कर दिया गया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को निःशुल्क तुलसी के पौधे वितरित किए गए। आयोजकों ने बताया कि तुलसी भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद में विशेष महत्व रखती है। इसे केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी पौधा माना जाता है।
मुख्य अतिथि डॉ. एस.के. जैन ने अपने संबोधन में कहा कि तुलसी का पौधा वातावरण को शुद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि तुलसी न केवल वायु की गुणवत्ता सुधारने में सहायक है, बल्कि यह मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी लाभकारी मानी जाती है।
उन्होंने उपस्थित लोगों से अपने घरों और आसपास अधिक से अधिक औषधीय एवं पर्यावरण हितैषी पौधे लगाने का आग्रह किया। उनका कहना था कि बढ़ते प्रदूषण और बदलते पर्यावरणीय हालात के बीच प्रत्येक नागरिक को प्रकृति संरक्षण की दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं ने भी पर्यावरण संरक्षण के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हुए पौधारोपण अभियान में सहयोग देने की बात कही।
Sadhvi Balak Das के आदर्शों को आगे बढ़ाने का लिया गया संकल्प
मुख्य अतिथि श्रीमती शीला जी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रत्येक घर में कम से कम एक तुलसी का पौधा अवश्य होना चाहिए। उनके अनुसार यदि हर परिवार प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए पौधारोपण करेगा तो प्रदूषण को कम करने और स्वस्थ वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संस्थाओं का दायित्व नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी है। उन्होंने महिलाओं से परिवार और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने की अपील की।
कार्यक्रम में आध्यात्मिक और सामाजिक मूल्यों के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश प्रमुख रूप से दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास शुरू करे।
सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं ने साध्वी बालक दास जी महाराज के जीवन, आध्यात्मिक विचारों और समाज के प्रति उनके योगदान को भी श्रद्धापूर्वक याद किया।
Sadhvi Balak Das की पुण्यतिथि पर स्वस्ति फाउंडेशन ने जनजागरूकता अभियान जारी रखने की कही बात
स्वस्ति फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष श्री शैलेश प्रकाश शास्त्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि संस्था भविष्य में भी समाजहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े ऐसे जनजागरूकता अभियान लगातार चलाती रहेगी। उन्होंने कहा कि प्रदूषण कम करना किसी एक व्यक्ति का कार्य नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने जीवन में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दे और नियमित रूप से पौधारोपण करे तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर और स्वच्छ वातावरण तैयार किया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने पेड़ लगाने, पर्यावरण की रक्षा करने और प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने का सामूहिक संकल्प लिया। आयोजन को सफल बनाने में स्वस्ति फाउंडेशन के सभी कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
करोल बाग में आयोजित यह कार्यक्रम आध्यात्मिक श्रद्धांजलि के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश देने वाला आयोजन बन गया। सत्संग, तुलसी वितरण और पर्यावरण संरक्षण की शपथ के माध्यम से कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों को जनहित तथा प्रकृति संरक्षण से जोड़कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा सकती है।







