मेघालय की राजनीति में 23 सितंबर 2026 को बड़ा बदलाव हुआ, जब यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) के आठ विधायक औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए। नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में हुए कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
आठ विधायकों के दल बदलने के बाद 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा की संख्या दो से बढ़कर 10 हो गई है। इस तरह भाजपा अब नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के बाद विधानसभा में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। दूसरी ओर, UDP की संख्या 12 से घटकर चार रह गई। NPP के पास 33 विधायक हैं और वह सरकार में स्पष्ट बहुमत बनाए हुए है।
इस घटनाक्रम की खास बात यह है कि भाजपा और UDP दोनों ही मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के नेतृत्व वाली सरकार में सहयोगी रहे हैं। इसलिए यह बदलाव सरकार गिराने या तत्काल सत्ता परिवर्तन का मामला नहीं है, बल्कि उसी गठबंधन के भीतर राजनीतिक वजन के पुनर्विन्यास के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा की संख्या बढ़ने से गठबंधन में उसकी भूमिका पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
दल बदलने वाले विधायकों ने भाजपा में शामिल होने से पहले कुछ स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। इनमें खासी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना, कानूनी कोयला खनन को लेकर प्रतिबंधों में बदलाव, मेघालय रेजिडेंट्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी एक्ट (MRSSA) का क्रियान्वयन और शिलांग की हरिजन कॉलोनी को स्थानांतरित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। विधायकों की ओर से इन विषयों पर भाजपा नेतृत्व से आश्वासन मिलने की बात कही गई थी।
यहां क्षेत्रीय पहचान का सवाल भी महत्वपूर्ण है। मेघालय की राजनीति में भाषा, जनजातीय पहचान, भूमि, स्थानीय सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मुद्दे लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं। इसलिए आठ विधायकों का दल बदलना केवल विधानसभा की संख्या बदलने तक सीमित नहीं है। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि राष्ट्रीय दल और क्षेत्रीय आकांक्षाओं के बीच राजनीतिक समन्वय किस तरह आगे बढ़ता है।
भाजपा के लिए यह विस्तार 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक आधार मजबूत करने का अवसर है। वहीं UDP के सामने अपनी क्षेत्रीय राजनीतिक पहचान और शेष चार विधायकों के साथ संगठन को बनाए रखने की चुनौती है। हालांकि अभी चुनाव में पर्याप्त समय है, इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को भविष्य के चुनावी परिणाम का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।
मेघालय की राजनीति में इस घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि संख्या बदलने के साथ गठबंधन के भीतर राजनीतिक भूमिका भी बदल रही है। NPP बहुमत में बनी हुई है, लेकिन भाजपा का दस विधायकों तक पहुंचना उसे पहले की तुलना में कहीं बड़ा घटक बनाता है। अब देखना होगा कि स्थानीय मुद्दों पर मिले आश्वासन किस रूप में लागू होते हैं और UDP अपने राजनीतिक आधार को किस तरह पुनर्गठित करती है।












