• मेरठ
  • Shubham Karoti Foundation के रामचरितमानस ज्ञान यज्ञ में गूंजा राम तत्व का संदेश

    Shubham Karoti Foundation के रामचरितमानस ज्ञान यज्ञ में गूंजा राम तत्व का संदेश
    e radio india meerut

    Shubham Karoti Foundation मेरठ ने गोस्वामी तुलसीदास जयंती के पावन अवसर पर बुधवार, 12 अगस्त 2026 को पंचवटी कॉलोनी, मवाना रोड स्थित आभा मानव मंदिर के प्रांगण में श्री रामचरितमानस ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ किया। प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक आयोजित इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में रामचरितमानस के बालकांड पर महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर एवं कथाव्यास स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी ने तात्विक प्रवचन दिया।

    धार्मिक वातावरण में आयोजित इस ज्ञान यज्ञ में रामकथा के आध्यात्मिक, दार्शनिक और साधनात्मक पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। कथा व्यास ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने भगवान श्रीराम के प्रति अपनी अनुभूतियों को अपनी लेखनी के माध्यम से श्रीरामचरितमानस का स्वरूप प्रदान किया और इसे साधकों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन का माध्यम बनाया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार निराकार परमात्मा साकार अवतार लेते हैं, उसी प्रकार वेद और उपनिषद जैसे शास्त्रीय ज्ञान भी रामायण और अन्य धार्मिक ग्रंथों के रूप में समाज के सामने अवतरित होते हैं।

    स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी ने कहा कि रामकथा केवल सुनने की विषय-वस्तु नहीं, बल्कि अंतःकरण को शुद्ध करने और आत्मबोध की दिशा में ले जाने वाली साधना है। ब्रह्मनिष्ठ संत भी रामकथा में अवगाहन कर विश्राम प्राप्त करते हैं और साधक रामकथा के माध्यम से अपने अंतःकरण को निर्मल करते हुए आत्मबोध की ओर अग्रसर होता है।

    Shubham Karoti Foundation के ज्ञान यज्ञ में समझाया रामचरितमानस का आध्यात्मिक स्वरूप

    कथा व्यास स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी ने रामचरितमानस की संरचना और उसके गूढ़ आध्यात्मिक संदेश को सरल ढंग से समझाते हुए कहा कि श्रीरामचरितमानस में चार घाट बताए गए हैं। ये चार घाट ज्ञान घाट, भक्ति घाट, कर्म घाट और दीन घाट हैं। उन्होंने बताया कि इन चार घाटों के माध्यम से साधक रामकथा के अलग-अलग आध्यात्मिक आयामों को समझ सकता है।

    उन्होंने श्रीरामचरितमानस के सात कांडों की तुलना सात सोपानों यानी सीढ़ियों से की। उनके अनुसार ये सात सोपान साधक को क्रमशः आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाने वाले मार्ग का संकेत देते हैं। रामचरितमानस केवल भगवान श्रीराम की कथा नहीं, बल्कि जीवन, साधना, ज्ञान, भक्ति और आत्मबोध का व्यापक दर्शन प्रस्तुत करने वाला ग्रंथ है।

    प्रवचन के दौरान रामचरितमानस के चार प्रमुख वक्ता और श्रोताओं का भी उल्लेख किया गया। स्वामी जी ने बताया कि भगवान शंकर माता पार्वती को रामकथा सुनाते हैं, कागभुशुण्डि गरुड़ जी को कथा सुनाते हैं, महर्षि याज्ञवल्क्य महर्षि भारद्वाज को रामकथा का वर्णन करते हैं और गोस्वामी तुलसीदास जी दैन्यभाव से युक्त श्रोताओं को कथा सुनाते हैं।

    इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने समझाया कि रामकथा का स्वरूप व्यापक है और अलग-अलग स्तरों पर साधक को भगवान के तत्व से जोड़ता है। रामकथा में केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि जीवन को समझने और आत्मिक उन्नति का मार्ग भी निहित है। स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी ने साधना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु द्वारा प्रदत्त कर्म और भक्ति की साधना करने से अंतःकरण की पवित्रता और एकाग्रता पुष्ट होती है। जब अंतःकरण शुद्ध और एकाग्र होता है तो ज्ञान का उदय स्वतः होने लगता है। इस प्रकार कर्म और भक्ति को ज्ञान की प्राप्ति का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।

    उन्होंने रामकथा की परंपरा को विभिन्न युगों से जोड़ते हुए कहा कि त्रेतायुग में महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से भगवान श्रीराम के चरित्र और लीला का वर्णन किया। द्वापर युग में व्यास जी द्वारा अध्यात्म रामायण की परंपरा सामने आई और कलियुग में गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस के माध्यम से भगवान श्रीराम के नाम, गुण, लीला और धाम का व्यापक वर्णन किया।

    Shubham Karoti Foundation के आयोजन में संत ने बताया परिवर्तन ही जगत का सत्य

    प्रवचन के दौरान स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी ने जीवन के मूल सत्य पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जगत में सब कुछ परिवर्तनशील है और एकमात्र अपरिवर्तनीय सत्य यही है कि परिवर्तन निरंतर होता रहता है। उनके अनुसार मनुष्य जिन चीजों को स्थायी समझकर उनसे जुड़ जाता है, वही परिवर्तन के कारण उसके दुख का कारण बनती हैं।

    उन्होंने कहा कि आत्यंतिक दुखों का वियोग ही सुख है। मनुष्य को अपने जीवन में शास्त्रों का पठन-पाठन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि शास्त्र व्यक्ति को बाहरी परिस्थितियों के साथ-साथ अपने अंतःकरण को समझने की दृष्टि भी प्रदान करते हैं।

    रामकथा को अंतःकरण और बाह्य करण की शुद्धि का प्रभावी साधन बताते हुए उन्होंने कहा कि रामकथा पात्र को तत्वबोध का अनुभव प्रदान करती है और अपात्र को भी पात्र बनाने की क्षमता रखती है। इसका आशय यह है कि सत्संग और भगवत चिंतन व्यक्ति के भीतर ऐसी चेतना उत्पन्न कर सकते हैं, जिससे उसके जीवन और दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है।

    स्वामी जी ने अधर्म के प्रभाव को लेकर भी गंभीर संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अधर्म करने वाले की जो गति होती है, अधर्म की चर्चा करने वालों की भी वही गति होती है। इसलिए मनुष्य को अपने विचारों, शब्दों और कर्मों की पवित्रता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पवित्र हृदय में भगवत कृपा का रस उत्पन्न होता है और सत्संग में आने से मन को सुख मिलता है। धार्मिक अनुष्ठान और भगवत चिंतन भी प्रमाणिक शास्त्रों, वेद, उपनिषद और पुराण आदि के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। उनके अनुसार धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की मनमानी के बजाय शास्त्रसम्मत आचरण को महत्व दिया जाना चाहिए।

    प्रवचन में भगवान श्रीराम के स्वरूप की व्याख्या करते हुए स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी ने कहा कि भगवान राम बुद्धि, मन और वाणी से परे हैं, क्योंकि वे स्वयं बुद्धि, मन और वाणी के कारण हैं। उन्होंने कहा कि राम को वही जान पाता है जिसे वे स्वयं जानना चाहते हैं। राम केवल किसी एक स्थान या काल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे हमारी ही आत्मा हैं।

    यह विचार रामकथा के उस आध्यात्मिक पक्ष को सामने लाता है जिसमें भगवान श्रीराम को बाहरी आराधना के साथ-साथ मनुष्य के भीतर विद्यमान चेतना और आत्मतत्व के रूप में भी देखा जाता है।

    Shubham Karoti Foundation के कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने लिया रामकथा का आध्यात्मिक लाभ

    गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर आयोजित श्रीरामचरितमानस ज्ञान यज्ञ ने धार्मिक आयोजन के साथ-साथ आध्यात्मिक चिंतन का वातावरण भी तैयार किया। पंचवटी कॉलोनी, मवाना रोड स्थित आभा मानव मंदिर का प्रांगण इस दौरान रामकथा और भगवत चिंतन से आध्यात्मिक रूप से सराबोर रहा।

    कार्यक्रम में आभा मानव मंदिर के संस्थापक सुरेशचंद गोविल एवं आभा गोविल ने व्यास पूजन किया। आयोजन में श्रद्धा और आस्था के साथ उपस्थित लोगों ने कथा व्यास स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी के प्रवचनों को सुना और रामचरितमानस के आध्यात्मिक संदेश को समझने का प्रयास किया। कार्यक्रम में कुणाल दीक्षित, खूब चंद सिंह एवं पूरनचंद शर्मा सहित अन्य श्रद्धालु और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

    गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर आयोजित इस ज्ञान यज्ञ का मूल संदेश यही रहा कि रामकथा केवल धार्मिक कथा श्रवण तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति को कर्म, भक्ति और ज्ञान के माध्यम से अपने अंतःकरण की ओर लौटने का अवसर देती है। कथा व्यास ने जिस तरह रामचरितमानस के सात कांडों को आध्यात्मिक यात्रा के सात सोपानों और चार घाटों को ज्ञान, भक्ति, कर्म तथा दीन भाव से जोड़ा, उससे कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं को मानस के गहरे दार्शनिक पक्ष को समझने का अवसर मिला।

    Shubham Karoti Foundation द्वारा आयोजित यह आयोजन इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा कि इसमें धार्मिक परंपरा को केवल अनुष्ठान तक सीमित न रखते हुए शास्त्र, साधना, आत्मबोध और जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया गया। स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी के प्रवचन में बार-बार अंतःकरण की शुद्धि, सत्संग, गुरु प्रदत्त साधना और शास्त्रसम्मत भगवत चिंतन को महत्व दिया गया।

    रामचरितमानस की यही विशेषता है कि इसमें भगवान श्रीराम के चरित्र के माध्यम से मनुष्य के जीवन के अनेक प्रश्नों के उत्तर खोजने का प्रयास मिलता है। तुलसीदास जी ने जिस अनुभूति को शब्दों में ढाला, वह सदियों बाद भी श्रद्धालुओं और साधकों के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। तुलसी जयंती के अवसर पर आयोजित इस ज्ञान यज्ञ ने उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए रामनाम, रामगुण, रामलीला और रामतत्व के चिंतन का संदेश दिया।

    कार्यक्रम में दिए गए संदेशों ने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ और मानसिक अस्थिरता के बीच मनुष्य को अपने भीतर शांति खोजने के लिए सत्संग, शास्त्र अध्ययन और आध्यात्मिक चिंतन की आवश्यकता है। रामकथा के माध्यम से अंतःकरण की शुद्धि, एकाग्रता और आत्मबोध की दिशा में बढ़ने का संदेश श्रद्धालुओं के बीच प्रमुखता से सामने आया।

    इस प्रकार गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर शुरू हुआ श्रीरामचरितमानस ज्ञान यज्ञ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि रामचरितमानस के दार्शनिक और आध्यात्मिक संदेश को समाज तक पहुंचाने का माध्यम भी बना। कार्यक्रम में गूंजा यह संदेश कि जब कर्म और भक्ति की साधना से अंतःकरण निर्मल होता है, तब ज्ञान का प्रकाश स्वतः प्रकट होने लगता है।

    Hashtags: #ShubhamKarotiFoundation #शुभमकरोतिफाउंडेशन #TulsidasJayanti #तुलसीदासजयंती #Ramcharitmanas #रामचरितमानस #RamKatha #रामकथा #SwamiAnantanandSaraswati #Meerut #धार्मिककार्यक्रम

    21f67d31476a8d337da958dc70341990

    editor

    पत्रकारिता में बेदाग 11 वर्षों का सफर करने वाले युवा पत्रकार त्रिनाथ मिश्र ई-रेडियो इंडिया के एडिटर हैं। उन्होंने समाज व शासन-प्रशासन के बीच मधुर संबंध स्थापित करने व मजबूती के साथ आवाज बुलंद करने के लिये ई-रेडियो इंडिया का गठन किया है।
    1 mins