डिजिटल पहुंच से सुशासन तक

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भारत में 5जी नेटवर्क का तेजी से विस्तार केवल दूरसंचार क्षेत्र की उपलब्धि नहीं, बल्कि बदलती शासन व्यवस्था और डिजिटल अर्थव्यवस्था की तस्वीर भी है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के मंच से 55 लाख से अधिक 5जी बेस स्टेशनों के संचालन की जानकारी इस बात का संकेत है कि देश ने 5जी को शुरुआती तकनीकी उत्साह से आगे ले जाकर व्यापक जनसुलभता के चरण में पहुंचाया है। 2022 में जिस 5जी सेवा की शुरुआत हुई थी, आज उसका विस्तार देश की डिजिटल संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल इंटरनेट की बढ़ी हुई गति नहीं है। प्रधानमंत्री के अनुसार 2022 की तुलना में मोबाइल इंटरनेट की गति करीब दस गुना बढ़ी है, लेकिन असली उपलब्धि तब मानी जाएगी जब तेज कनेक्टिविटी का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। तकनीक तभी सार्थक है, जब वह नागरिक के जीवन को सरल बनाए और अवसरों की असमानता घटाए।

एक दशक पहले डिजिटल विभाजन भारत के सामने बड़ी चुनौती था। महंगे उपकरण, सीमित कनेक्टिविटी और डिजिटल सेवाओं की कम पहुंच के कारण तकनीक का लाभ समाज के एक हिस्से तक सीमित रहने का खतरा था। डिजिटल इंडिया जैसी पहलों ने इस तस्वीर को बदलने की कोशिश की। आज मोबाइल फोन सरकारी सेवाओं, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच का माध्यम बन गया है।

शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तार इसका उदाहरण है। दीक्षा पर करोड़ों लर्निंग सेशन दर्ज होना बताता है कि डिजिटल माध्यम शिक्षा की भौगोलिक सीमाओं को कम कर सकता है। लेकिन यहां भी केवल आंकड़े पर्याप्त नहीं हैं। इंटरनेट की उपलब्धता के साथ डिजिटल साक्षरता, स्थानीय भाषाओं में सामग्री और गुणवत्तापूर्ण उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना उतना ही जरूरी है।

5जी के बाद भारत की निगाहें 6जी पर हैं। यह महत्वाकांक्षा तभी सफल होगी, जब अगली पीढ़ी की तकनीक केवल महानगरों और औद्योगिक केंद्रों की सुविधा न बनकर गांवों, छोटे शहरों, किसानों, विद्यार्थियों और छोटे कारोबारियों की उत्पादकता बढ़ाए। डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार रोजगार, नवाचार और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में दिखाई देना चाहिए।

इसलिए 55 लाख से अधिक 5जी बेस स्टेशनों का आंकड़ा उत्साहजनक जरूर है, लेकिन इसे मंजिल नहीं माना जा सकता। भारत की डिजिटल क्रांति की वास्तविक कसौटी नेटवर्क की संख्या नहीं, बल्कि उससे पैदा होने वाला सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन है। यदि मोबाइल कनेक्टिविटी नागरिक को सरकारी कार्यालय के चक्कर से बचाती है, विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ती है और छोटे उद्यमी को बाजार तक पहुंच देती है, तभी तकनीकी प्रगति वास्तव में सुशासन में बदलती है।

भारत के सामने अब चुनौती डिजिटल पहुंच को डिजिटल समानता और फिर डिजिटल सशक्तीकरण में बदलने की है। 5जी का विस्तार इस यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है; अगला लक्ष्य यह होना चाहिए कि तकनीक सुविधा नहीं, हर नागरिक के लिए अवसर का माध्यम बने।