
साल 2027 की सबसे बड़ी सियासी जंग का काउंटडाउन शुरू हो चुका है! उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर… इन 5 राज्यों में सत्ता के सिंहासन के लिए कभी भी तारीखों का एलान हो सकता है। चुनाव आयोग की ताबड़तोड़ और खुफिया तैयारियों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। खासकर देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश से जो खबरें आ रही हैं, वह साफ इशारा कर रही हैं कि चुनाव का बिगुल बजने ही वाला है!
चुनाव आयोग ने 2 नवंबर को यूपी के 4 मंडलों के 18 संवेदनशील जिलों में चुनावी तैयारियों की एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की। सोमवार को सीनियर अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि मतदाता सूचियों को तुरंत दुरुस्त किया जाए, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों और EVM-VVPAT का मैनेजमेंट फाइनल किया जाए। आयोग का सबसे बड़ा फोकस उत्तर प्रदेश के पश्चिम क्षेत्र पर है, जहां नए वोटर्स और पोलिंग बूथों की तैयारियों को लेकर युद्ध स्तर पर काम शुरू हो चुका है।
लेकिन इस बार चुनाव आयोग का सबसे बड़ा और कड़ा हंटर चला है अधिकारियों पर! साफ आदेश दे दिया गया है कि कोई भी अधिकारी अपने गृह जिले में नहीं रह पाएगा। जिन अधिकारियों ने पिछले 4 वर्षों में एक ही जिले में 3 साल पूरे कर लिए हैं, उनका बोरिया-बिस्तर समेटना तय है। इसमें SDM, तहसीलदार से लेकर ERO तक शामिल हैं। आयोग ने यूपी के मुख्य सचिव और DGP को अल्टीमेटम देते हुए 30 नवंबर तक इस ताबड़तोड़ ट्रांसफर नीति की जॉइंट एक्शन रिपोर्ट मांगी है।
30 नवंबर की यह डेडलाइन साफ बता रही है कि दिसंबर की शुरुआत में कभी भी आचार संहिता लग सकती है। क्या पार्टियां तैयार हैं इस महामुकाबले के लिए? चुनाव से जुड़ी हर बड़ी अपडेट के लिए चैनल को अभी सब्सक्राइब करें!

