
परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप
सुल्तानपुर जिला अस्पताल में प्रसव के बाद एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद मृतका के परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों पर गंभीर लापरवाही और बदसलूकी के आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने के कारण महिला की जान चली गई।
मृतका की पहचान अंशिका उपाध्याय (24) पत्नी पंकज उपाध्याय के रूप में हुई है। वह कादीपुर कोतवाली क्षेत्र के पदारथपुर गांव की रहने वाली थीं। परिजनों के अनुसार, अंशिका की शादी इसी वर्ष 5 मई को हुई थी।मृतका की मां उर्मिला पांडे ने बताया कि वे बुधवार दोपहर करीब 12 बजे अंशिका को जिला अस्पताल लेकर आए थे। जांच में हीमोग्लोबिन 11 बताया गया और डॉक्टरों ने स्थिति सामान्य बताई। शाम 6:24 बजे अंशिका ने एक बच्चे को जन्म दिया। आरोप है कि डिलीवरी के बाद डॉक्टरों ने उचित निगरानी नहीं की।
परिजनों के मुताबिक रात करीब 9:30 बजे टांके लगाए गए और 10:30 बजे अंशिका को वार्ड के अंदर शिफ्ट किया गया। इसके बाद अंशिका को ठंड लगने और लगातार कांपने की शिकायत होने लगी। परिजनों ने कई बार डॉक्टरों और स्टाफ को सूचना दी, लेकिन केवल ब्लड प्रेशर जांच कर औपचारिकता निभाई जाती रही।सुबह करीब 4:30 बजे अंशिका की हालत अचानक बिगड़ गई और उसकी सांसें उखड़ने लगीं।
इस पर डॉक्टरों ने उसे किसी अन्य अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिजनों ने सवाल उठाया कि जब हालत गंभीर थी तो पहले ही रेफर क्यों नहीं किया गया।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे घटना का वीडियो बनाने लगे तो अस्पताल की कुछ महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों ने उन्हें घेर लिया, मोबाइल छीनने का प्रयास किया और उनके साथ मारपीट की। परिजनों ने डॉक्टरों, सुरक्षाकर्मियों और पोस्टमार्टम स्टाफ के बीच मिलीभगत का आरोप भी लगाया है।
मृतका की मां का कहना है कि बिना परिजनों को सूचना दिए ही शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंशिका को न तो कोई गंभीर बीमारी थी और न ही उसने कोई जहरीला पदार्थ खाया था। उनका आरोप है कि यह पूरी तरह चिकित्सकीय लापरवाही का मामला है।
इस संबंध में सीएमएस महिला डॉ. आर.के. यादव ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, नगर कोतवाल धीरज कुमार पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे और हंगामा कर रहे परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया।
