क्या उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों पर अब सख्ती बढ़ने वाली है? क्या प्रॉपर्टी रजिस्ट्री और निवेश पर सरकार ने नई निगरानी व्यवस्था लागू कर दी है? योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में 30 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन प्रस्तावों में सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति और निवेश पर निगरानी, प्रॉपर्टी रजिस्ट्री में पारदर्शिता, ग्रामीण परिवहन सेवा का विस्तार और आवास योजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं।
कैबिनेट बैठक के बाद मंत्रियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अब सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए अपनी चल और अचल संपत्ति का वार्षिक विवरण देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा यदि कोई कर्मचारी अपने छह महीने के मूल वेतन से अधिक राशि शेयर या स्टॉक मार्केट में निवेश करता है, तो उसे इसकी जानकारी विभाग को देनी होगी। ऐसे मामलों में जांच अनिवार्य की जाएगी और नियमों के उल्लंघन पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का कहना है कि इस फैसले से प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री रवीन्द्र जायसवाल ने बताया कि अब प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री से पहले विक्रेता की पहचान और उसकी मिल्कियत की जांच खतौनी के आधार पर की जाएगी। बिना खतौनी सत्यापन के रजिस्ट्री संभव नहीं होगी। विक्रेता के लिए खतौनी में अपनी मिल्कियत दर्ज कराना अनिवार्य होगा। साथ ही स्टाम्प शुल्क सर्किल रेट के आधार पर ही लिया जाएगा और नगर निगम क्षेत्रों में दो प्रतिशत अतिरिक्त विकास शुल्क भी लगाया जाएगा।
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना 2026 को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत प्रदेश की सभी 59,163 ग्राम सभाओं तक बस सेवा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा बेहतर बनाने के लिए 28 सीटों वाली छोटी बसें चलाई जाएंगी, जिससे गांवों में आवागमन आसान हो सके।







