
नई दिल्ली।राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की रचना के 151 वर्ष पूरे होने के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु समेत कई नेताओं ने देशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने देशभक्तों में साहस, एकता और संकल्प की भावना जगाने का काम किया। आज भी यह राष्ट्रीय अस्मिता, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है।राष्ट्रपति मुर्मु के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी संदेश में कहा गया कि देशवासी ‘वंदे मातरम’ की राष्ट्र-प्रथम की भावना को अपनाते हुए राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। उन्होंने कामना की कि यह गीत आने वाली पीढ़ियों को भी देश के प्रति समर्पण और कर्तव्यबोध की प्रेरणा देता रहे।केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी देशवासियों को राष्ट्रगीत की वर्षगांठ पर शुभकामनाएं दीं। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता और मातृभूमि के गौरव का प्रतीक है।उनके अनुसार, यह अमर गीत हमेशा देशप्रेम, त्याग और समर्पण की भावना जागृत करता रहेगा।
नेताओं ने बताया राष्ट्रीय चेतना का स्वर
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने ‘वंदे मातरम’ को भारत की राष्ट्रीय चेतना का अमर स्वर बताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत पराधीनता के खिलाफ प्रतिरोध का मंत्र बना और असंख्य लोगों को मातृभूमि की मुक्ति के लिए प्रेरित किया। डेढ़ शताब्दी बाद भी इसकी गूंज राष्ट्र के प्रति समर्पण, सांस्कृतिक अस्मिता और एकता का संदेश देती है।मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ मां भारती के प्रति श्रद्धा, गौरव और राष्ट्र समर्पण का उद्घोष है। स्वतंत्रता संग्राम के कठिन दौर में इस गीत ने देशवासियों के मन में आजादी की भावना जगाई और उन्हें एकता के सूत्र में बांधने का काम किया।
बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को किया नमन
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘वंदे मातरम’ को भारत की आत्मा का उद्घोष और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा का मंत्र बताया। उन्होंने इस अमर गीत के रचयिता महान साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को नमन किया।

