श्रीमद्भागवत कथा में वीडियो कॉल के जरिए शामिल हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

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मुजफ्फरनगर। धर्मनगरी शुकतीर्थ में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़े।
उन्होंने दूर रहकर ही कथा उत्सव में सहभागिता की और वीडियो कॉल के जरिए पोथी पूजन किया। इस अवसर पर उनकी पत्नी अनुराधा गुप्ता, आईआरएस भाई मनीष कुमार और परिवार के अन्य सदस्य कथा में पहले से ही शुक्रतीर्थ में मौजूद रहे। परिजनों ने कथा श्रवण के माध्यम से धर्म, निष्काम कर्म, करुणा और मोक्ष के मर्म को समझा।धर्मनगरी शुक्रतीर्थ में कथा का आयोजन शुकदेव आश्रम के प्रत्यक्षानंद भवन में किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने वीडियो कॉल के जरिए ही व्यास पीठ का नमन किया और पूरे विधि-विधान के साथ पुण्य लाभ अर्जित किया। कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री ने उन्हें सुदामा चरित्र, राजा परीक्षित मोक्ष और भागवत सार का संगीतमय वर्णन सुनाया। कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री ने सुदामा चरित्र, राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग और श्रीमद्भागवत के सार का वर्णन किया। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, मित्रता, समर्पण और निष्काम कर्म के महत्व पर प्रकाश डाला गया। परिवार के सदस्यों ने श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण किया। श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के भाई एवं आईआरएस अधिकारी मनीष कुमार ने कथा स्थल से सीधे वीडियो कॉल के माध्यम से ज्ञानेश कुमार को जोड़ा। कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को वीडियो कॉल के माध्यम से कथा से जोड़ा गया, जिन्होंने ऑनलाइन पोथी पूजन भी किया। इस तरह मुख्य चुनाव आयुक्त ने शुकतीर्थ में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में दूर रहकर अपनी सहभागिता दर्ज कराई। कथा के दौरान उनके परिवार के कई सदस्य मौजूद रहे। इनमें उनके पिता डॉ. सुबोध गुप्ता, माता सत्यवती, पत्नी अनुराधा गुप्ता, पुत्र अर्णव आनंद और आईआरएस भाई मनीष कुमार सहित अन्य परिजन शामिल थे। धार्मिक आयोजन में परिवार की आस्था और सहभागिता विशेष रूप से दिखाई दी। समापन सत्र में कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री ने श्रीमद्भागवत के महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन करते हुए सुदामा चरित्र और राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाई। सुदामा चरित्र के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के बीच निस्वार्थ प्रेम, मित्रता और समर्पण का संदेश दिया गया। वहीं राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग के माध्यम से जीवन की नश्वरता, आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति के महत्व को समझाया गया। कथा में धर्म के मार्ग पर चलने, निष्काम भाव से कर्म करने और सभी के प्रति करुणा रखने का संदेश दिया गया। श्रीमद्भागवत के सार के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन में सदाचार, सेवा और आध्यात्मिक चिंतन अपनाने की प्रेरणा मिली।शुकतीर्थ प्रवास के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के परिवार के सदस्यों ने शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज से मुलाकात की। इसके बाद परिजन ब्रह्मलीन स्वामी कल्याणदेव महाराज के समाधि मंदिर पहुंचे और श्रद्धासुमन अर्पित किए। परिवार के सदस्यों ने आश्रम परिसर में स्थित वटवृक्ष की परिक्रमा भी की। इस अवसर पर ट्रस्टी ओमदत्त देव भी मौजूद रहे। धार्मिक परंपराओं के अनुसार समाधि मंदिर में श्रद्धांजलि अर्पित करने और वटवृक्ष की परिक्रमा करने के दौरान परिजनों ने श्रद्धा व्यक्त की।कथा उत्सव को लेकर आश्रम परिसर और आसपास सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। आश्रम के बाहर महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई थी। स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के अलावा विभिन्न राज्यों में तैनात प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। आयोजन को लेकर प्रशासन ने गोपनीयता बनाए रखी। सुरक्षा व्यवस्था के बीच कथा का समापन सत्र संपन्न हुआ।
मुख्य चुनाव आयुक्त के वीडियो कॉल के जरिए जुड़ने और उनके परिवार के सदस्यों के कथा में शामिल होने से शुकतीर्थ में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम को विशेष महत्व मिला।