Kejariwal in Meerut: किसान आंदोलन पवित्र, तीनों कानून हैं डेथ वारंट

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Kejariwal in Meerut: किसान आंदोलन पवित्र, तीनों कानून हैं डेथ वारंट
Kejariwal in Meerut: किसान आंदोलन पवित्र, तीनों कानून हैं डेथ वारंट
  • संवाददाता || मेरठ

Kejariwal in Meerut: मेरठ में कृषि करोड़ों को लेकर की गई महापंचायत में संबोधित करते दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पहुंचे जहां पर उन्होंने केंद्र सरकार की जमकर आलोचना की और तीनों कानूनों को डेथ वारंट बताते हुए इसे तुरंत खत्म करने की मांग की है। केजरीवाल ने अपने भाषण में देश कि किसानों की दशा को खराब बताते हुए कहा कि किसान आंदोलन ने ढाई सौ से अधिक किसान मित्रों की शहादत ले ली लेकिन इसे केंद्र सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ा। 

किसान अपनी फ़सल का सही दाम ही मांग रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को सभी पार्टियों ने धोखा दिया है। हर पार्टी का घोषणा पत्र चुनाव से पहले कहता है कि हम फ़सलों का सही दाम देंगे, सभी पार्टियां कहती हैं आपका लोन माफ़ कर देंगे। पिछले 25 साल में 3।5 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं। किसी पार्टी को इनकी परवाह नहीं है।

Kejariwal in Meerut: डेथ वारंट हैं तीनों कानून 

किसी वालों ने अपने उद्बोधन में कहा है कि सरकार पूजी पतियों के लिए काम कर रही है और तीन कृषि कानून डेथ वारंट की तरह है जो किसानों के लिए किसी भी कीमत पर भलाई करने वाले नहीं है। बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में कहा था कि ये स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू करेंगे। सुप्रीम कोर्ट में इन्होंने हलफनामे में लिख कर दे दिया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) नहीं दे सकते। ये तो किसानों के साथ धोखा हो गया।

भाजपा की कारस्तानी है लाल किला का मामला 

केजरीवाल ने 26 जनवरी को किसान परेड के दौरान लाल किले पर झंडा लगाने के प्रकरण को भाजपा की चाल बताते हुए कहा है कि इनके लोगों ने ही इस तरह का काम किए हैं। झंडा फहराने वाले भारतीय जनता पार्टी से ताल्लुक रखते हैं। हमारा किसान कभी भी देशद्रोही नहीं हो सकता है। क्योंकि इन्हीं में से एक बेटा किसानी करता है तो एक देश में सरहदों की रक्षा करता है।

Kejariwal in Meerut: किसान आंदोलन पवित्र, तीनों कानून हैं डेथ वारंट
Kejariwal in Meerut: किसान आंदोलन पवित्र, तीनों कानून हैं डेथ वारंट

हमने स्टेडियम को जेल बनाने की परमिशन नहीं दी

देशद्रोह का मुकदमा करना किसानों के खिलाफ बहुत बड़ी साजिश का हिस्सा है। दिल्ली के नौ स्टेडियम को अस्थाई जेल बनाने के लिए हमारे पास फाइल आई लेकिन हमने क्लियर नहीं की क्योंकि हमें पता है कि हमारा किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है।

जब से किसान दिल्ली बार्डर पर बैठे हैं हम तन मन धन से उनकी सेवा कर रहे हैं। सारे मंत्री, विधायक, नेता और अफ़सर सेवा में लगे हैं। टॉयलेट, पानी, खाना और वाई फाई की व्यवस्था की। 

टिकैत के लिए सरकार ने भेजे गुंडे 

अरविंद केजरीवाल ने अपने उद्बोधन के दौरान कहा है कि पिछली 28 जनवरी को राकेश टिकैत के लिए सरकार ने अपनी पुलिस और गुंडे भेजे जिसे देख कर मुझसे सहन नहीं हुआ और मुझे बहुत दुख हुआ। राकेश टिकैत के पिता महेंद्र सिंह टिकैत किसानों के मसीहा कहे जाते हैं और वह किसानों के लिए किसी भी हद तक जाकर उनके न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए जाने जाते हैं। 

सरकार की नीयत पर उठाए सवाल

केजरीवाल ने कहा कि सरकार 17 लाख करोड़ रुपये से किसानों की फ़सल खरीदेगी। सरकार उसे आगे बेचेगी। सरकार को फ़ायदा भी होगा। कभी 18 लाख करोड़ भी मिल सकते हैं। सरकार को कभी घाटा भी हो सकता है। आंकड़ा है कि इन्होंने अपने पूंजीपति मित्रों के 8 लाख करोड़ माफ़ कर दिए, लेकिन किसान के लिए कुछ नहीं किया। इनकी नीयत नहीं है कुछ करने की।

सीएम योगी आदित्यनाथ से पूछा सवाल

उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए सियासी जमीन तैयार करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना किसानों का 18000 करोड़ रुपये बकाया है। गन्ना किसानों को दो साल से बकाया नहीं मिला है। योगी जी से पूछना चाहता हूं कि क्या मजबूरी है कि आप इन मिल मालिकों को ठीक नहीं कर सकते। हमने दिल्ली चुनाव से पहला कहा था बिजली कंपनियों को ठीक कर देंगे। हमने 5 साल में बिजली कंपनियों को ठीक कर दिया।

आज 24 घंटे दिल्ली में बिजली भी मिलती है और बिजली की बिल ज़ीरो आता है। योगी आदित्यनाथ जी लानत है तुम्हारी सरकार पर अगर तुम गन्ना किसानों को भुगतान नहीं करा सकते। अच्छी नियत वाली सरकार चाहिए। मैं यह कह कर जा रहा हूं कि अगर अच्छी नीयत वाली सरकार आ गई तो गन्ने छोड़कर आओगे मिल में पैसा आपके खाते में आपके घर पहुंचने से पहले आ जाएगा। 

पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों को लेकर सरकार को घेरा

पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस के दाम बढ़ा दिए हैं। मैं जब से सरकार में गया हूं मुझे एक बात पता चली है कि पैसे की कमी नहीं है। नीयत की कमी है। अच्छी नीयत की सरकार ले आओ डीज़ल गैस पेट्रोल के दाम कम हो जाएंगे। खाद की कट्टे की कीमत कम हो जाएगी। अच्छी नीयत वाली सरकार ले आओ जैसे दिल्ली में बिजली के बिल माफ़ हो गए। हम यहां भी माफ़ कर देंगे, ट्यूबवेल की बिजली की क्या बात है।

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