Report by : News Desk
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राजनाथ सिंह बोले- आधुनिक युद्ध के लिए आधुनिक सेना जरूरी

जैसलमेर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में सशस्त्र बलों का तेजी से आधुनिकीकरण जरूरी है। आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने के लिए सेना को नई तकनीक, उन्नत हथियारों और बेहतर सैन्य ढांचे से लैस करना होगा। वह मंगलवार को राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, तीनों सेनाओं के उप-प्रमुख, वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद मौजूद रहे। इनमें तरुण चुघ, संदीप पाठक, पवन खेड़ा, तिरुचि शिवा, सुदीप बंद्योपाध्याय, सौगत रॉय और नवीन जिंदल शामिल थे।

ड्रोन और मिसाइलों की बढ़ती भूमिका

बैठक में रक्षा मंत्री ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के कारण भारत की सुरक्षा प्राथमिकताएं और महत्वपूर्ण हो गई हैं। युद्ध के स्वरूप में तेजी से बदलाव हो रहा है और ड्रोन, मिसाइल तथा एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका बढ़ रही है। ऐसे में सशस्त्र बलों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध के लिए आधुनिक सेना की आवश्यकता है। इसके लिए हथियारों और उपकरणों के साथ सैन्य तैयारियों, तकनीकी क्षमता और संगठनात्मक ढांचे को भी मजबूत करना होगा।

आधुनिकीकरण के तीन प्रमुख स्तंभ

राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के तीन प्रमुख आधार बताए। इनमें वित्तीय संसाधन, तकनीक और निजी क्षेत्र की भागीदारी तथा मानव संसाधन और सैन्य ढांचे में सुधार शामिल हैं।

वित्तीय संसाधनों में लगातार बढ़ोतरी

रक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार हर साल आधुनिकीकरण के लिए बजट बढ़ा रही है। वित्त वर्ष 2026-27 में कुल रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। इसमें 2.19 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च और सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए आवंटित किए गए हैं।

उन्होंने रक्षा उत्पादन और निर्यात में हुई वृद्धि का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, रक्षा उत्पादन वर्ष 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। वहीं, रक्षा निर्यात वर्ष 2014 में 2,000 करोड़ रुपये से कम था, जो अब करीब 40,000 करोड़ रुपये हो गया है।

सरकार ने वर्ष 2029 तक रक्षा उत्पादन को तीन लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

तकनीक और निजी क्षेत्र की भागीदारी

राजनाथ सिंह ने कहा कि तकनीक अब युद्ध का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) नई योजनाओं पर काम कर रहा है और आधुनिक हथियारों तथा मिसाइल प्रणालियों के परीक्षण किए जा रहे हैं।

उन्होंने रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, एमएसएमई से लेकर बड़ी कंपनियों तक को समान अवसर देकर देश में रक्षा उत्पादन और तकनीकी विकास को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

नई सैन्य संरचनाओं पर भी काम

रक्षा मंत्री ने मानव संसाधन को सशस्त्र बलों की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाएं अपनी संगठनात्मक संरचना में लगातार सुधार कर रही हैं, ताकि बदलती युद्ध जरूरतों के अनुरूप बेहतर तैयारी की जा सके।

उन्होंने सेना में ‘असनी’, ‘भैरव’ और ‘शक्तिबाण’ जैसी नई प्लाटून संरचनाओं का उल्लेख किया। उनके अनुसार, ये नई व्यवस्थाएं आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही हैं।

रणनीतिक स्वायत्तता और स्वदेशी क्षमता पर जोर

राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि सैन्य आधुनिकीकरण का अर्थ केवल नए हथियार खरीदना नहीं है। इसका उद्देश्य सशस्त्र बलों की युद्ध-तैयारी मजबूत करना, उन्हें आधुनिक तकनीक से लैस करना और देश के भीतर ऐसी क्षमताएं विकसित करना है, जिन पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके।

उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक स्वायत्तता और स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को महत्वपूर्ण बताया। बैठक के समापन पर रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ऐसा रक्षा इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है, जिसमें भारतीय उद्योगों की भागीदारी बढ़े, तकनीक का विकास देश में हो और रणनीतिक मामलों में दूसरे देशों पर निर्भरता कम हो।

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