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Nauchandi Mela: परंपरा से अनदेखी तक – सहयोग सामाजिक संस्था की चेतावनी Nauchandi Mela: परंपरा से अनदेखी तक – सहयोग सामाजिक संस्था की चेतावनी
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  • मेरठ रिपोर्ट | ई-रेडियो इंडिया

मेरठ की सांस्कृतिक पहचान और गौरव नौचंदी मेला, जो वर्षों से शहर की सामाजिक और धार्मिक विविधता का प्रतीक रहा है, अब अपनी मूल आत्मा और परंपरा को खोता जा रहा है। होली के बाद दूसरे रविवार से लगने वाला यह ऐतिहासिक मेला, अब अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही का शिकार बन चुका है।

जहां एक ओर इसे शासन ने प्रांतीय मेले का दर्जा देकर गौरव देने का प्रयास किया है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से निर्धारित समय पर आयोजन न कर पाने से इसकी पारंपरिक छवि धूमिल होती जा रही है। मेला मात्र औपचारिकता बनकर रह गया है।

नौचंदी मेला कभी नवरात्र के दौरान लगता था, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां चंडी देवी की पूजा करने आते थे। इसी देवी के नाम पर इस मेले का नाम नव चंडी से बिगड़कर नौचंदी पड़ा। इसके सामने स्थित बाले मियां की मजार, हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है — जो साम्प्रदायिक सौहार्द का सुंदर उदाहरण पेश करता है।

घटिया सड़क निर्माण पर विरोध

सहयोग सामाजिक संस्था (रजि.) ने न सिर्फ मेले के निर्धारित समय पर आयोजन की मांग की है, बल्कि वार्ड 67 नगर निगम द्वारा नवनिर्मित शंभू दास गेट से महात्मा गांधी प्रतिमा तक बनी सड़क की पुनर्निर्माण की भी पुरजोर अपील की है।

इस नवनिर्मित सड़क की हालत मात्र तीन महीने में 44 जगहों से उखड़ने के कारण बेहद खराब हो गई है। संस्था के अध्यक्ष दिनेश कुमार शांडिल्य एडवोकेट और मुख्य संरक्षक डॉ प्रेम कुमार शर्मा ने अपनी निरीक्षण टीम के साथ मौके पर जाकर इसे भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री का नतीजा बताया।

संस्था की प्रमुख मांगें:

  • सड़क का पुनर्निर्माण उच्च गुणवत्ता और 25 वर्षों की गारंटी के साथ हो
  • सड़क चौड़ी की जाए और रेलवे रोड–सिटी स्टेशन मॉडल पर विकसित की जाए
  • इंटरलॉकिंग टाइल्स, पुरुष और महिला मूत्रालय, तथा साफ-सफाई की उचित व्यवस्था
  • सामान्य जन सुविधाओं के संकेत बोर्ड भी लगाए जाएं

संस्था के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि यह मार्ग मेला नौचंदी का मुख्य द्वार है, और इससे पूरा शहर अपनी छवि प्रदर्शित करता है। यदि इस मार्ग की स्थिति ऐसी रही, तो बाहर से आने वाले दर्शनार्थियों पर शहर की प्रतिष्ठा पर विपरीत असर पड़ेगा।

निरीक्षण दल में शामिल थे:

  • दिनेश कुमार शांडिल्य (अध्यक्ष)
  • डॉ. प्रेम कुमार शर्मा (मुख्य संरक्षक)
  • सत्य पाल दत्त शर्मा (संरक्षक)
  • वैभव शांडिल्य, सविता गोयल, विपिन जैन, योगेश गोयल, सार्थक शांडिल्य

नौचंदी मेला मेरठ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान है, लेकिन अगर प्रशासन ने समय रहते इसकी परंपराओं और संरचना की रक्षा नहीं की, तो यह अमूल्य धरोहर सिर्फ स्मृति बनकर रह जाएगी। सहयोग संस्था की चेतावनी एक जागरूक समाज की पुकार है — जिसे अनदेखा करना आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा।

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