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श्मशान घाट को बगैर परमीशन ढहा दिया… वाह भाई वाह…

May 7, 2025 | by editor

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May 7, 2025 | by editor

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April 28, 2025 | by editor

भ्रष्टाचार करना और निजी लाभ के लिये समाज की आंखों पर पट्टी बांधना सदैव उन व्यक्तियों की निशानी होती है जो हद से ज्यादा विनम्र होते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो हद से ज्यादा विनम्रता धूर्तता की निशानी है। अब इसको ठीक से समझने के लिये आपको बगैर किसी भूमिका के लिये चलते हैं सुल्तानपुर जनपद के कारौंदीकला थानाक्षेत्र स्थित शगर्दे श्मसान घाट पर…

ये नजारा जो आप देख रहे हैं यह सात साल पहले शगर्दे ग्राम पंचायत निधि से बनवाया गया था… सरकार की मंशा थी कि आम जनता को इसका लाभ मिले और जीवन के अंतिम क्षणों में इंसान को इस दुनिया से विदा लेने का अच्छा स्थान मिले… मगर समय का तकाजा और भ्रष्टाचार के दीमक की नजर इस ओर भी पड़ ही गई।

समाजसेवी विवेक तिवारी जब एकदिन इस घाट पर पहुंचे तो उन्होंन इसकी दशा देख इसके जीर्णोद्धार का फैसला किया.. उनके इस मनोदशा को कुछ लोगों द्वारा लपक लिया गया… उन्हें इस बात की सूचना शायद नहीं रही होगी कि महज आठ वर्ष पूर्व ही इस जगह पर 25 लाख रुपयों को खपा दिया गया है… क्योंकि भ्रष्टाचार हमारे देश के अधिकारीयों व जनप्रतिनिधियों का पहला अधिकार है अत: इस घाट पर भी लगाये गये 25 लाख रुपयों की कोई खास चमक धमक दिखाई नहीं दे रही थी…

इसलिये विवेक तिवारी इस झांसे में आ गये और 51 लाख रुपयों से इसके जीर्णोद्धार की घोषणा कर दी। यहां तक तो मामला ठीक था मगर विवेक तिवारी को यहां पर मोहरा बनाया गया और इस सरकारी जमीन पर सरकारी पैसों से बने निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया।

आपको ध्वस्त करने व जीर्णोद्धार करने में अंतर तो पता ही होगा… ध्वस्तीकरण के लिये सरकारी अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी की जरूरत होती है… मगर जल्दी इतनी थी कि फटाफट इस सरकरी जगह पर बने निर्माण को ध्वस्त कर दिया।

वित्तीय वर्ष 2016-2017 में शगर्दे ग्राम सभा द्वारा प्रस्तावित श्मसान पर शवयात्रा में शामिल लोगों की छांव के लिये तथा अन्य विकास कार्यों के लिये स्थाई निर्माण करवाया गया। जिसमें 25 लाख रुपये से अधिक की धनराशि सरकारी मद से यहां खर्च की गई।

तब से अब तक आठ वर्ष हो चुके हैं और यहं पर किसी प्रकार की अन्य सुविधा का कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया। जबकि इस निर्माण को कुछ लोगों ने जर्जर बता दिया… आम जनता को कैसे बेवकूफ बनाया जाता है? कैसे भ्रष्टाचार कर पैसा कमाया जाता है… इसकी पूरी कहानी आप इस वीडियो को अंत तक देखिये तो समझ पायेंगे…

पूर्व जिला पंचायत सदस्य जगदीश सिंह का आरोप है कि सरकारी धन व आम जनता के दिये टैक्स की भरपूर बंदरबांट हो रही है…

सरकार की मंशा सदैव अच्छी होती है.. सरकार जनता के लिये सहूलियत पैदा करना चाहती है… मगर जमीनी स्तर पर सरकार की योजनाओं को धूल चटाने का काम उनके ही नुमाइंदे करते हैं… और जब कोई इस भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाता है तो वह उनका दुश्मन बन बैठता है।

इस प्रकरण में ई–रेडियो इंडिया के पांच सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब जनता को जानना जरूरी है…

  1. पहला ये कि क्या शगर्दे ग्राम सभा में बने श्मशान घाट का निर्माण उच्च मानकों के आधार पर किया गया?
  2. दूसरा ये कि यदि मानकों का ठीक तरह से पालन किया गया तो महज सात से आठ वर्षों में ध्वस्तीकरण की नौबत क्यों आई?
  3. तीसरा सवाल यह है कि चूंकि यह सरकारी जमीन है… तो इसे कोई निजी व्यक्ति कैसे ध्वस्त करा सकता है?
  4. चौथा सवाल ये कि ध्वस्तीकरण से पहले प्रशासन को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई?
  5. पांचवां सवाल ये कि यहां का मलबा नीलाम क्यों नहीं किया गया? क्या इसी मलबे को दोबारा इस्तेमाल कर निर्माण कार्य को पूरा किया जायेगा?

ये जमीन सार्वजनिक व सरकारी है, कोई व्यक्ति सरकार से बड़ा कैसे हो जायेगा? भाई इस सवाल का जवाब तो देना ही पड़ेगा?

अब बात यह है कि विवेक तिवारी पैसा खर्च कर रहे हैं… वहां जीर्णोद्धार होगा तो फायदा जनता को है…. चलो यह खरी बात है … लेकिन असली पेंच भी तो समझो प्यारे मोहन…

आठ वर्ष पूर्व 25 लाख लगे… इसके बाद भी अधिकारी की देखरेख के बावजूद दोयम दर्जे का निर्माण कराया… अब सवाल यह है कि महज आठ वर्ष में कोई भी पक्का निर्माण इतना खराब कैसे हो जायेगा कि इसके ध्वस्तीकरण की नौबत आ गई…
इसमें 25 लाख में जो बंदरबांट हुई वो तो हजम हो चुकी है.. अब नये सिरे से सरकारी धन की डिमांड की जायेगी… ताकि सौंदर्यीकरण किया जा सके… और सौंदर्यीकरण का पैसा कौन दे रहा है… विवेक तिवारी जी…

मतलब यह कि इस जगह पर विवेक जी को केंद्र बनाकर राजनीतिक शिकार किया जा रहा है.. अधिकारी व स्थानीय जनप्रतिनिधि मिलकर 25 लाख की ऐसी तैसी कर चुके हैं… अब दोबारा इस्टीमेट बनेगा… पैसा खारिज कराया जायेगा और पूरा का पूरा पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों में बंट जायेगा…

विवेक तिवरी जी की मंशा साफ है लेकिन वो कैसे शिकार हो रहे हैं इसका अंदाजा भी उन्हें होना चाहिये।

कुल मिलाकर मेहसर आफरीदी का यह शेर बड़ा मुफीद साबित हो रहा है…

जगह नहीं थी, मगर मैं बनाके बैठा हूं
मैं इस जगह से किसी को उठाके बैठा हूं

भ्रष्टाचारीयों का मानना है कि जो जिना बड़ा पैंतरेबाज होगा वह उतना ज्यादा उड़ान भरेगा और ज्यादा माल इकट्ठा कर सकेगा… धन्य हैं हमारे देश के लोग… धन्य हैं समाज में नकली चेहरा लेकर घूमने वाले लोग…