सपा मुखिया ने ठोस कदम नहीं उठाया तो मेरठ में विखर जायेगी समाजवादी पार्टी

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उत्तर प्रदेश में विपक्ष की भूमिका निभा रही समाजवादी पार्टी केंद्र की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की तरह है शांत और निहाल नजर आ रहे हैं।  पूरे प्रदेश में हालांकि अलग-अलग जनपदों में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भ्रमण कर रहे हैं लोगों से मुलाकात कर रहे हैं लेकिन इसका कुछ खास असर देखने को नहीं मिल रहा है।

मेरठ में समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष राजपाल चौधरी चौकस जरूर नजर आते हैं लेकिन कई टुकड़ों में बैठी हुई समाजवादी पार्टी के मेरठ पदाधिकारी व कार्यकर्ता इस बात का स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि आने वाले चुनाव में यदि पार्टी मुखिया ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो निश्चित तौर पर समाजवादी पार्टी का हश्र वही होगा जो वर्तमान में बहुजन समाज पार्टी का है।

वहीं गौतमबुद्धनगर के नेता व समाजवादी पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल यादव ने पार्टी के सभी पदों के साथ-साथ प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबी नेताओं में शुमार अनिल यादव ने इस्तीफे में लिखा है- ‘यह वह समाजवादी पार्टी नहीं है, जिसका मैं सच्चा सिपाही हूं।’ कयास लगाये जा रहे हैं कि वो कांग्रेस पार्टी में शामिल हो सकते हैं, क्योंकि उनकी पत्नी पंखुड़ी पाठक भी कांग्रेस पार्टी में हैं और सक्रिय तौर पर काम कर रही हैं। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी में भी शामिल होने का विकल्प उनके पास है, लेकिन इनकी संभावना कम है।

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