
- सुबह सात बजे शुरू हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
- भारी पुलिस बल के बीच पोकलेन मशीन से तोड़ा हिस्सा
मेरठ। शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बुधवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। आवास एवं विकास परिषद ने 44 सील भवनों में से छह भवनों पर कार्रवाई की। सुबह करीब सात बजे शुरू हुई कार्रवाई दोपहर करीब 1:45 बजे तक चली। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और बाजार की सीमाओं पर बैरिकेडिंग कर आवाजाही रोकी गई।
छहों भवनों पर अलग-अलग बुलडोजर से कार्रवाई की गई। एक जी प्लस-3 भवन का हिस्सा तोड़ने में जेसीबी छोटी पड़ गई। इसके बाद पोकलेन मशीन मंगाई गई। काफी मशक्कत के बाद पोकलेन के पंजे से भवन का हिस्सा तोड़ा गया। कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद लोगों और व्यापारियों में विरोध भी देखने को मिला।
व्यापारियों ने अधिकारियों से बातचीत कर कार्रवाई रोकने की मांग की, लेकिन वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला। व्यापारियों का कहना था कि उन्हें कार्रवाई रोकने का आश्वासन दिया गया था, इसके बावजूद भवनों पर बुलडोजर चलाया गया। पोकलेन मशीन पहुंचने पर महिलाओं और व्यापारियों ने भी विरोध जताया। मौके पर तैनात पुलिस बल के कारण कार्रवाई जारी रही।
कार्रवाई के दौरान कुछ व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों के बाहर बैठे रहे। वहीं, कुछ महिलाओं के मौके पर पहुंचने पर पुलिस ने उन्हें वापस लौटा दिया। संयुक्त मेरठ बचाओ आंदोलन समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर भी मौके पर पहुंचे। उनके साथ कुछ लोग जैना ज्वेलर्स के मकान में मौजूद रहे। एडीएम सिटी और एसपी सिटी समेत कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
छह भवनों पर कार्रवाई पूरी होने के बाद आवास एवं विकास परिषद 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान इसकी रिपोर्ट पेश करेगा। परिषद के उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह के अनुसार, इन छह भवनों का निर्माण अवैध था और इनके नक्शे पास नहीं थे।
बिजली बंद होने से पानी की सप्लाई प्रभावित
ध्वस्तीकरण के दौरान एहतियात के तौर पर बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। इससे शास्त्रीनगर के सेक्टर-1, 2, 3, 5, 6, 7 और आरटीओ रोड स्थित सेक्टर-9 समेत कई इलाकों में सुबह से बिजली गुल रही। बिजली बंद होने के कारण पानी की सप्लाई भी प्रभावित हुई। स्कूल जाने वाले बच्चों और नौकरीपेशा लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
सेटबैक कार्रवाई के विरोध में महिलाओं का धरना
शास्त्रीनगर सेक्टर-2 में सेटबैक कार्रवाई के विरोध में महिलाओं का धरना छह महीने से जारी है। महिलाओं के अनुसार, आंदोलन 10 अप्रैल से शुरू हुआ था और समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने तक जारी रहेगा। उनका कहना है कि वे अपने घर और परिवार को बचाने की मांग को लेकर धरने पर बैठी हैं।
मीडिया की कवरेज पर भी रोक
ध्वस्तीकरण की कवरेज कर रहे मीडिया कर्मियों को भी पुलिस ने कार्रवाई स्थल पर रोक दिया। एसपी सिटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए मीडिया की एंट्री और कवरेज पर रोक की बात कही गई। इस दौरान मीडिया कर्मियों ने अधिकारियों से कवरेज की अनुमति देने की मांग की।







