
मेरठ शहर विधानसभा सीट… उत्तर प्रदेश की एक ऐसी वीआईपी सीट, जहाँ हर चुनाव में हार-जीत का फैसला बहुत ही दिलचस्प होता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की इस हॉट सीट पर वैसे तो हर जाति का अपना महत्व है, लेकिन आज हम बात करेंगे उस वोट बैंक की जो यहाँ किंगमेकर की भूमिका निभाता है। हम बात कर रहे हैं मेरठ शहर सीट पर ब्राह्मण मतदाताओं की वर्तमान स्थिति और साल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बन रहे नए सियासी समीकरणों की।
मेरठ शहर सीट की सामाजिक बनावट को देखें, तो यहाँ मुस्लिम और दलित मतदाताओं की संख्या काफी अच्छी है। लेकिन शहरी क्षेत्र होने के कारण यहाँ ब्राह्मण, वैश्य और पंजाबी-खत्री मतदाता चुनाव के नतीजों को पलटने का माद्दा रखते हैं। पारंपरिक रूप से ब्राह्मण मतदाताओं का झुकाव भारतीय जनता पार्टी की तरफ रहा है। भाजपा इस शहरी कोर वोटर बेस के दम पर यहाँ हमेशा मजबूत स्थिति में खड़ी दिखाई देती है। लेकिन 2027 के महामुकाबले से पहले यहाँ की जमीन पर कुछ बदलाव साफ महसूस किए जा सकते हैं।
साल 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बेहद करीब है, और इस बार विपक्ष की नजर भी भाजपा के इस मजबूत किले में सेंध लगाने पर है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन नए सामाजिक समीकरण बनाने में जुटा है। स्थानीय स्तर पर ब्राह्मण मतदाताओं के बीच कुछ स्थानीय मुद्दों, युवाओं के रोजगार और प्रतिनिधित्व को लेकर अपनी एक अलग राय बन रही है। ऐसे में भाजपा के सामने चुनौती होगी कि वह अपने इस पारंपरिक और निर्णायक वोट बैंक को पूरी तरह एकजुट कैसे रखे।
साफ है कि 2027 की चुनावी जंग में मेरठ शहर सीट पर ब्राह्मण मतदाताओं का रुख यह तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा कि मेरठ का अगला सरताज कौन बनेगा। क्या विपक्ष इस बार कोई नया करिश्मा कर पाएगा, या भाजपा अपने इस मजबूत गढ़ को बचाने में कामयाब रहेगी? यह देखना वाकई दिलचस्प होगा।

