अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की झांसे की सियासत!

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ गई हैं और अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर आसन्न संकट के परिणामों से अमेरिकी प्रशासन में बेचैनी देखी जा सकती है। ट्रंप ने जो यह दावा किया कि उनके मित्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बन्द कर देगा। वह ट्रंप के सहयोगियों द्वारा बनाई गई कुटिल नीति का उदाहरण है। ट्रंप जानते हैं कि भारत अब रूस से तेल बंद नहीं कर सकता बल्कि राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के पहले ही दोनों देश तेल, गैस और पेट्रोलियम आयात से ज्यादा आगे बढ़कर दोनों देश न्यूक्लियर एनर्जी को बढ़ाने का तेजी से प्रयास कर रहे हैं।

रूस के फर्स्ट प्राइम मिनिस्टर डेनिस मण्टुरोव और विदेश मंत्री जयशंकर की बैठक में ऊर्जा संबंधी सहयोग पर चर्चा हो चुकी है। रूस और भारत के बीच बिना किसी भेदभाव के संबंधों की कहानी बहुत पुरानी हो चुकी है। रूस के तेल आयात पर न तो भारत को ट्रंप को खुश करने के लिए कोई फैसला लेना है और न तो ट्रंप की नाराजगी की कोई परवाह है।

भारत जानता है कि अब विश्व व्यवस्था में अमेरिका खुद अपनी अप्रासंगिकता का रास्ता बना रहा है। ट्रंप दुनिया के हर देश के शासनाध्यक्ष के ऊपर दबाव डालने के कई तरीके अपनाते हैं। उन्होंने तिकड़म से यूरोपीय देशों को तो झुका दिया। उन्होंने जापान को भी झुकाने में कामयाबी हासिल की? किन्तु भारत, रूस, चीन और ब्राजील जैसे देशों ने ट्रंप की एक न सुनी इसलिए उनकी साम, दाम, दंड, भेद की नीति असफल रही।

ट्रंप अपने बयान से भारत के अन्दर भ्रम फैलाना चाहते हैं। भारत के खिलाफ 25 प्रतिशत टैरिफ मात्र इसलिए लगाया गया है, क्योंकि वह रूस से पेट्रोलियम उत्पाद आयात करता है। अब ट्रंप यह आधार तैयार कर रहे हैं कि वह भारत को कैसे अपने नजदीक खड़ा दिखा सकें। भारत की नाराजगी से अमेरिका के रणनीतिकारों में घबराहट है। कारण कि एकतरफ तो ट्रंप ने जैसे ही चीन के उत्पादों पर पहले 30 प्रतिशत और फिर अतिरिक्त 100 प्रतिशत टैरिफ का ऐलान किया उसके तुरन्त बाद चीन ने भी अमेरिका के जहाजों पर अपने समुद्री क्षेत्र के बन्दरगाहों पर विशेष टैरिफ ठोक दिया।

यही नहीं चीन ने अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले दुर्लभ खनिज पदार्थो पर रोक लगा दी। अब ट्रंप और उनकी चौकड़ी को भारत याद आने लगा है। ट्रंप प्रशासन को लगता है कि वह एक बहाना बनाकर भारत के खिलाफ अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ जैसे ही हटाएगा तो नई दिल्ली ट्रंप के प्रति श्रद्धावनत तो हो जाएगी और एहसान जताने लगेगी। फिर दोनों देशों में पहले जैसे ही संबंध हो जाएंगे। इसके अलावा जल्दी ही ब्रिक्स देशों की बैठक होने वाली है।

इस बैठक में अमेरिकी डालर की प्रभुता समाप्त करने के लिए सदस्य देश बड़ा फैसला करने वाले हैं। ट्रंप को लगता है कि यदि भारत को किसी तरह मना लें तो ब्रिक्स डालर का विकल्प पेश नहीं कर पाएगा।

बहरहाल यूक्रेन रूस-युद्ध शुरू होने के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने खुद तेल के दामों में संतुलन बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से रूस से कच्चा तेल आयात करने की सलाह दी थी। उन्हें पता था कि रूस पर प्रतिबंध लग जाने के बाद यूरोपीय देशों के सामने तेल और गैस की बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।

किन्तु भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर उसका शोधन करता है और फिर यूरोपीय देशों को बेचता है। ट्रंप ने अपने दरबारियों की बातों में आकर भारत पर दबाव डालना शुरू कर दिया कि या तो भारत रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदना बंद कर दे या वह अपने उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को बर्दाश्त करे। लेकिन अब जब यह हकीकत सामने आ गई कि किसी भी उस देश की अर्थव्यवस्था पर ट्रंप टैरिफ का असर नहीं पड़ रहा है बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर ही आहट की तलवार लटक रही है तब वह किसी न किसी तरह अपने टैरिफ ड्रामें को समेटने के लिए भूमिका बनाने में लगे हैं।

कहने का तात्पर्य यह है कि भारत में नेतृत्व हमेशा अमेरिका के प्रति अपनी नीतियों को लेकर गंभीर रहा है, इसलिए चाहता है कि अमेरिका भी अपनी फजीहत से बचते हुए भारत के प्रति समान और सम्मानजनक नीति अपनाए। भारत बड़ा लोकतांत्रिक देश होने के कारण अपनी मर्यादा को समझता है, इसलिए किसी भी देश के साथ मजाक नहीं करता।

अच्छा यही होगा कि ट्रंप भी भारत के साथ मजाक न करें। ट्रंप जानते हैं कि उनके हर झूठे बयान पर भारत की संवेदनशील राजनीति में प्रतिक्रिया होती है। ट्रंप को यह सच्चाई महसूस करना चाहिए कि भारत तब भी अमेरिका के सामने नहीं झुका है, जब वह मजबूर था, आज तो बेहद मजबूत है। अमेरिका को भारत की जरूरत है, लेकिन सच तो यह है कि अब अमेरिका से भारत के संबंध तब तक सामान्य नहीं हो सकते जब तक ट्रंप की सत्ता रहेगी। इसलिए इस तरह के झूठे बयानों से भारत की सरकार को झांसा देना संभव नहीं है।

ट्रंप जिस झांसे की राजनीति कर रहे हैं, उसका भारत पर अभी कुछ साल तो कोईं असर पड़ने वाला नहीं है। ट्रंप ने देख लिया कि 50 प्रतिशत टैरिफ के बाद भारतीय उत्पादकों के लिए मुश्किलें तो आई जिसे उन्होंने बर्दाश्त कर लिया किन्तु अमेरिका में तो भारतीय उत्पादों को बाजार से खरीदने के लिए बाजार जाने वाले उपभोक्ता ट्रंप पर ही आरोप लगा रहे हैं। कुल मिलाकर यह बयान ट्रंप की एक और झांसे की कूटनीति साबित होगी।