Report by : Pratima Shukla
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Lectures were organised on the Partition of 1947 and the idea of ​​a united India.
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1947 का विभाजन और अखंड भारत की विचारधारा पर व्याख्यान आयोजित
  • 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास की पीड़ादायक घटना-डॉ. सप्रे
  • पत्रकारिता के विद्यार्थियों को संतुलित दृष्टि से सभी घटनाओं को देखना चाहिए-डॉ. सक्सेना

मेरठः स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा “1947 के विभाजन और अखंड भारत की विचारधारा” विषय पर एक विशेष अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात विचारक एवं शिक्षाविद प्रो. डॉ. सदानंद दामोदर सप्रे ने छात्रों को संबोधित किया। इस दौरान प्रज्ञा प्रवाह के देवराज सिंह, क्षेत्रीय समन्वयक पश्चिमी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड व अवनीश त्यागी प्रज्ञा प्रवाह मेरठ अतिथि के रुप में उपस्थित रहे।

अपने वक्तव्य में प्रो.(डॉ.) सदानंद दामोदर सप्रे ने कहा कि 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास की एक अत्यंत पीड़ादायक घटना थी, जिसने न केवल भौगोलिक सीमाओं को बदला बल्कि समाज और संस्कृति को भी गहरे स्तर पर प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि अखंड भारत की विचारधारा केवल भौगोलिक एकता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों पर आधारित एक व्यापक अवधारणा है। उन्होंने विद्यार्थियों से इतिहास को समझने और उससे सीख लेकर राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत करने का आह्वान किया।

Lectures were organised on the Partition of 1947 and the idea of ​​a united India.

कार्यक्रम में सुभारती विश्वविद्यालय के राष्ट्रबोध प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो.(डॉ.) डी.सी. सक्सेना ने कहा कि 1947 का विभाजन राजनीतिक परिस्थितियों और उस समय की जटिल परिस्थितियों का परिणाम था। उन्होंने बताया कि इतिहास का अध्ययन हमें यह समझने में मदद करता है कि किस प्रकार सामाजिक और राजनीतिक निर्णय आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करते हैं। उन्होंने छात्रों को इतिहास के विभिन्न पक्षों को संतुलित दृष्टि से समझने की सलाह दी।

इस दौरान पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. ऋतेष चौधरी ने अपने धन्यवाद संबोधन में कहा कि ऐसे व्याख्यान छात्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इससे उन्हें इतिहास, राजनीति और समाज के गहन संबंधों को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वे ऐतिहासिक घटनाओं को तथ्यों और संवेदनशीलता के साथ समझें और समाज के समक्ष सही परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करें।

Lectures were organised on the Partition of 1947 and the idea of ​​a united India.

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने अतिथि वक्ता से प्रश्न पूछे और विषय पर अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि व अन्य विशिष्ट अतिथियों को पादप व अंगवस्त्र तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम का सफल संचालन बीएजेमसी की छात्रा प्रियांशी भाटिया ने किया वहीं मीडिया कवरेज शौर्य खन्ना, व तुषार कुमार ने की।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के डीन अकादमिक्स डॉ. प्रभात कुमार पांडेय, दूरस्थ शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ. महावीर सिंह, पत्रकारिता विभाग के शिक्षकगण प्रो. अशोक त्यागी, डॉ. संतोष कुमार गौतम, डॉ. आशुतोष वर्मा, डॉ. प्रीति सिंह, शैली शर्मा, राम प्रकाश तिवारी, डॉ. पल्लबी मुखर्जी एवं बड़ी संख्या में विभाग के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

1947 का विभाजन और अखंड भारत की विचारधारा पर व्याख्यान आयोजित

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