
BKU Tikait Protest के तहत मेरठ में मंगलवार को किसानों का बड़ा शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के आह्वान पर मेरठ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों किसान जिला मुख्यालय की ओर कूच कर गए। किसानों का उद्देश्य जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर धरना-प्रदर्शन करना और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपना है। किसानों की भारी भीड़ और संभावित प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिला मुख्यालय की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है और किसानों को फिलहाल बीच रास्ते में रोककर अधिकारियों व किसान नेताओं के बीच बातचीत का प्रयास किया जा रहा है।
किसानों का कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से लगातार शिकायतें और मांगपत्र दिए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने बड़े स्तर पर आंदोलन का निर्णय लिया है। दूसरी ओर प्रशासन का प्रयास है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। इसी वजह से जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक कड़ी कर दी गई है।
BKU Tikait Protest के दौरान किसानों ने बिजली, स्मार्ट मीटर और भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दे उठाए
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने कहा कि संगठन लगातार किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को प्रशासन के समक्ष उठाता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान दिवस की बैठकों में भी कई बार अधिकारियों के सामने गंभीर मुद्दे रखे गए, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।
उन्होंने बताया कि गांवों में बिजली लोड की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध भी किसानों की प्रमुख मांगों में शामिल है। संगठन का कहना है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक असंतोष है और किसान इसे अपने हितों के विपरीत मानते हैं।
इसके साथ ही तहसीलों में फैले भ्रष्टाचार, खराब सड़कों, ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की धीमी गति तथा अन्य जनसमस्याओं को भी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। किसानों का आरोप है कि कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
किसान नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान किया गया होता तो उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।
BKU Tikait Protest को लेकर जिला मुख्यालय के रास्तों पर बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था
किसानों की बड़ी संख्या को देखते हुए मेरठ पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं। जिला मुख्यालय की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
प्रदर्शन कर रहे किसानों को फिलहाल बीच रास्ते में रोक दिया गया है। मौके पर वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। किसान नेताओं और प्रशासन के बीच बातचीत का दौर भी जारी है ताकि आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।
प्रशासन का कहना है कि किसानों को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी कारण सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।
कई स्थानों पर यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। पुलिस वैकल्पिक मार्गों के माध्यम से वाहनों का संचालन कराने का प्रयास कर रही है ताकि आम लोगों को कम से कम असुविधा हो।
BKU Tikait Protest के बीच प्रशासन और किसान नेताओं की वार्ता पर टिकी सबकी निगाहें
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर प्रशासन की ओर से ठोस और लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठन का कहना है कि किसानों की समस्याएं केवल कृषि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बिजली, सड़क, प्रशासनिक व्यवस्था और ग्रामीण विकास जैसे कई मुद्दों से जुड़ी हुई हैं।
किसान नेताओं का मानना है कि यदि प्रशासन समय रहते समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करता है तो आंदोलन की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। उनका कहना है कि यह प्रदर्शन किसानों की मजबूरी का परिणाम है और इसका उद्देश्य सरकार तथा प्रशासन का ध्यान ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक समस्याओं की ओर आकर्षित करना है।
दूसरी ओर प्रशासन लगातार आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने के प्रयास में जुटा हुआ है। अधिकारियों और किसान नेताओं के बीच वार्ता जारी है और समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल जिला मुख्यालय और उसके आसपास का क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षा व्यवस्था के घेरे में है।
अब सभी की निगाहें प्रशासन और भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेताओं के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी हुई हैं। यदि वार्ता सकारात्मक रहती है तो आंदोलन का समाधान निकल सकता है, लेकिन यदि किसानों की मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो आंदोलन आगे और तेज होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। मेरठ में आज का यह शक्ति प्रदर्शन एक बार फिर यह संकेत दे रहा है कि किसानों से जुड़े स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दे अब बड़े जनआंदोलनों का रूप लेते जा रहे हैं और प्रशासन के सामने इनका समयबद्ध समाधान बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।







