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  • मेरठ में सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, नोटिस फाड़ने का दावा, मामला गरमाया

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    भाजपा नेता ने जेई पर लगाए गंभीर आरोप
    नोटिस फाड़कर गेट लगाने का दावा
    सुप्रीम कोर्ट जाने की दी चेतावनी

    मेरठ में आवास विकास विभाग एक बार फिर बड़े विवाद में घिरता दिखाई दे रहा है। सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे, विभागीय अधिकारी पर गंभीर आरोप, नोटिस जारी होने के बाद उसे फाड़ देने का दावा और फिर अवैध हिस्से पर गेट लगाने की चर्चा… इन दावों ने पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है। अब यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच चुका है, जबकि शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट जाने की भी चेतावनी दे दी है। आखिर पूरा मामला क्या है? आइए जानते हैं विस्तार से।

    मेरठ के मेडिकल थाना क्षेत्र स्थित जागृति विहार निवासी और भाजपा नेता राहुल ठाकुर ने आवास विकास परिषद के जूनियर इंजीनियर इंद्रसेन यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल ठाकुर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आवास आयुक्त और अन्य अधिकारियों को भेजी शिकायत में दावा किया है कि आवास विकास की सरकारी भूमि पर कथित रूप से अवैध निर्माण और कब्जा कराया जा रहा है।

    मामले ने नया मोड़ तब लिया, जब शिकायतों और समाचार प्रकाशित होने के बाद आवास विकास विभाग की ओर से कथित रूप से नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि निर्माणकर्ता ने विभागीय नोटिस को गंभीरता से लेने के बजाय उसे फाड़ दिया और कथित अवैध हिस्से पर गेट भी लगवा दिया। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है, लेकिन आरोपों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    राहुल ठाकुर का कहना है कि यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद मेरठ के सेंट्रल मार्केट और अन्य स्थानों पर आवास विकास की जमीन पर बने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में यदि विभाग का कोई अधिकारी स्वयं सरकारी भूमि पर कथित अवैध निर्माण को संरक्षण दे रहा है, तो यह कानून के समान अनुपालन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

    भाजपा नेता ने इस पूरे मामले का एक वीडियो भी जारी किया है।

    वीडियो में उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री, आवास आयुक्त और संबंधित अधिकारियों को सभी तथ्यों से अवगत करा दिया गया है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और संबंधित अधिकारियों तथा कथित अवैध निर्माण कराने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे।

    शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आवास विकास की एक्सटेंशन नंबर-11 कॉलोनी में मंदिर के पास सरकारी भूमि पर कथित रूप से अवैध निर्माण कराया जा रहा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह निर्माण सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विपरीत है और सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे का मामला बनता है।

    राहुल ठाकुर का कहना है कि जब आम नागरिकों के अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है, तब यदि सरकारी अधिकारी या उनके संरक्षण में कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है और किसी को भी विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए।

    फिलहाल, इन आरोपों पर आवास विकास विभाग या आरोपित जूनियर इंजीनियर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विभागीय स्तर पर नोटिस जारी होने की चर्चा जरूर है, लेकिन शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए नोटिस फाड़ने और अवैध गेट लगाने के दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    अब पूरे मामले पर सबकी निगाहें शासन और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल सरकारी जमीन पर कथित कब्जे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभागीय जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल खड़े करेगा। वहीं यदि जांच में आरोप गलत साबित होते हैं तो स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल, मेरठ का यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग निष्पक्ष जांच तथा प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

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    News Desk

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