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LIVE: Russia Attack to Ukraine Latest: रूसी बलों ने असैन्य इलाकों में हमले तेज किए

Russia Attack to Ukraine Latest: रूसी बलों ने यूक्रेन के घनी आबादी वाले शहरी इलाकों पर हमले तेज करते हुए यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर के मध्य स्थित एक मुख्य चौराहे और कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी की, जिसे यूक्रेन के राष्ट्रपति ने ‘आतंक” करार दिया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने खारकीव में ‘फ्रीडम स्क्वेयरÓ पर रक्तपात के बाद कहा, ”कोई इसे नहीं भूलेगा। इसे कोई माफ नहीं करेगा।”

इस बीच, 40 मील दूरी तक फैला रूसी टैंकों और अन्य वाहनों का काफिला धीरे-धीरे कीव की ओर बढ़ा। देश की राजधानी कीव में करीब 30 लाख लोग रहते है। पश्चिमी देशों को आशंका है कि यह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यूक्रेनी सरकार को अपदस्थ करके रूसी समर्थक सत्ता की स्थापना करने की कोशिश है। आक्रमणकारी बलों ने ओडेसे और मारियुपोल के अहम बंदरगाहों समेत अन्य शहरों एवं कस्बों पर भी हमले तेज कर दिए हैं।

Russia Attack to Ukraine Latest: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप में सबसे बड़े युद्ध के छठे दिन रूस और अलग-थलग पड़ गया। रूस की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं और देश के पास चीन, बेलारूस और उत्तर कोरिया जैसे कुछेक मित्र ही बचे हैं। यूक्रेन में युद्ध में मारे गए लोगों की संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। 5,000 से अधिक रूसी बल या तो कैद में हैं या मारे गए हैं। यूक्रेनी बलों को हुए नुकसान की अभी कोई जानकारी नहीं है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने बताया कि उसने 136 आम नागरिकों की मौत दर्ज की है, लेकिन मृतकों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक बताई जा रही है।

Russia Attack to Ukraine Latest: दो दिनों से तेज हुए हवाई हमले

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि पिछले दो दिन में रूसी हमले तेज हुए हैं। उसने यह भी कहा कि तीन शहरों-खारकीव, खेरसन और मारियुपोल को रूसी बलों ने घेर लिया है। यूक्रेन के अधिकारियों ने बीती शाम को बताया कि रूसी सेना ने हमले के छठे दिन कीव के टीवी टॉवर और यूक्रेन में यहूदी नरसंहार के मुख्य स्मारक समेत अन्य असैन्य स्थलों को निशाना बनाते हुए हमले किए। यूक्रेन की सरकारी आपात स्थिति सेवा ने बताया कि टीवी टॉवर पर हमलों में पांच लोगों की मौत हो गयी तथा पांच अन्य घायल हो गए हैं।

यूक्रेन की संसद ने टीवी टॉवर के आसपास धुएं के गुबार की एक तस्वीर पोस्ट की और कीव के मेयर विताली क्लिश्चको ने इस पर हमला होने की एक वीडियो साझा की। उन्होंने कहा कि हमले के कारण टॉवर में बिजली पहुंचा रहे एक सबस्टेशन तथा एक नियंत्रण कक्ष क्षतिग्रस्त हो गये हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के कार्यालय के प्रमुख आंद्रे यरमाक ने फेसबुक पर कहा, ”उस स्थान पर शक्तिशाली मिसाइल हमला किया जा रहा है जहां (बाबी) यार स्मारक स्थित है।”

Russia Attack to Ukraine Latest: बाबी यार में नाजियों ने 1941 में 48 घंटे के भीतर करीब 33,000 यहूदियों की हत्या कर दी थी। रूसी सेना ने यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव के मुख्य चौराहे ‘फ्रीडम स्क्वेयरÓ तथा अन्य असैन्य ठिकानों पर मंगलवार को हमला किया जिससे पूरा शहर थर्रा उठा। सूर्योदय के कुछ ही समय बाद, एक रूसी सैन्य हमले में यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर के केंद्र पर हमला किया गया जिससे प्रतीकात्मक सोवियत-युग के क्षेत्रीय प्रशासन भवन को बुरी तरह नुकसान पहुंचा। ऑनलाइन पोस्ट किए गए एक वीडियो में लगभग 15 लाख की आबादी वाले रणनीतिक खारकीव में क्षेत्र के सोवियत-युग के प्रशासनिक भवनों और आवासीय क्षेत्रों में विस्फोट होते दिखाई दिए।

इस बीच, खारकीव में हुए एक हमले की चपेट में आने से कर्नाटक निवासी एक भारतीय छात्र की मौत हो गई। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से किसी भारतीय की मौत का यह पहला मामला है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने खारकीव के मुख्य चौराहे पर हुए हमले को ‘निर्विवाद आतंकÓ करार दिया और इसे युद्ध अपराध कहा। उन्होंने कहा, ‘कोई भी माफ नहीं करेगा। यह हमला एक युद्ध अपराध है। कोई नहीं भूलेगा।

जेलेंस्की ने यूरोपीय संघ की संसद से एक भावनात्मक अपील में कहा कि यूक्रेन ‘यूरोप का समान सदस्य बनने के लिए भीÓ लड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि आज हम हर किसी को दिखा रहे हैं कि हम क्या हैं ज् हमने साबित कर दिया है कि कम से कम, हम आपके जैसे ही हैं।Ó शहरों पर हमले के अलावा, ऐसी खबरें सामने आई हैं कि मॉस्को ने आबादी वाले तीन क्षेत्रों पर क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया है।

क्रेमलिन ने इस बात से इनकार किया कि उसने इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया है और फिर से जोर देकर कहा है कि उसके बलों ने केवल सैन्य ठिकानों पर हमला किया। हालांकि, घरों, स्कूलों और अस्पतालों पर बमबारी की कई तस्वीरें सामने आई हैं।इस बीच, पूरे यूक्रेन में अनेक लोगों ने एक और रात आश्रयों, तहखानों या गलियारों में बिताई। वहीं, युद्ध को रोकने के लिए चल रही वार्ता केवल आगे के दौर की वार्ता पर सहमति बनने के साथ ही समाप्त हो गई है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा कि बमबारी में वृद्धि केवल उन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने सोमवार को देर रात जारी वीडियो संदेश में कहा, ”रूस इन आसान तरीकों से (यूक्रेन पर) दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।” जेलेंस्की ने हालांकि दिन में दोनों पक्ष के बीच हुई लंबी वार्ता की जानकारी नहीं दी, लेकिन उन्होंने कहा कि कीव कोई रियायत देने को तैयार नहीं है, वह भी तब जब एक ओर रॉकेट और तोप से हमले किए जा रहे हैं। जेलेंस्की ने कहा कि रूसियों के लिए कीव ”मुख्य लक्ष्य” है। उन्होंने कहा, ”वे हमारे देश की राष्ट्रीयता को खंडित करना चाहते हैं और इसलिए राजधानी लगातार खतरे में है।”

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दिसंबर के अंतिम सप्ताह में आयोजित होगा सम्मान समारोह

नई दिल्ली। संविधान दिवस के अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने शिक्षक कल्याण फाउंडेशन द्वारा प्रस्तावित प्रोग्राम राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा सबको समान शिक्षा पर परिचर्चा किया एवं सोशल जस्टिस अवार्ड को लांच किया। यह अवार्ड भारतवर्ष से विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत प्रमुख हस्तियों को प्रदान किया जाता है, इनमें वकील, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, डॉक्टर एवं इंजीनियर आदि शामिल होते हैं।

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शिक्षक कल्याण फाउंडेशन द्वारा प्रस्तावित वार्षिक कार्यक्रम दिसंबर के अंतिम सप्ताह में कांस्टिट्यूशन क्लब में आयोजित किया जाता है, जिसमें टीचर एक्सीलेंट सम्मान, एक्सीलेंस अवार्ड एजुकेशन, चिल्ड्रन सम्मान, अंत्योदय सम्मान के साथ-साथ सोशल जस्टिस अवार्ड भी दिया जाता है। इसके माध्यम से समाज में उन लोगों को प्रोत्साहित किया जाता है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति में जरूरतमंद बच्चों के लिए कार्य कर रहे हैं।

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खम्भे में टकराई कार, एक की मौत तीन घायल, जनता ने पेश किया ऐसा उदाहरण

  • मेरठ, संवाददाता

समय कब, किस प्रकार और कितना खराब हो जाए इसका अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल होता है। आज आपको जिस घटना के बारे में बताने जा रहे हैं वो घटना मेरठ के सदर थानाक्षेत्र की है। गोलचा मेहताब के रहने वाले कुछ युवक कार में सवार होकर वेस्ट एण्ड रोड से जा रहे थे, अचानकी उनकी कार बिजली के खम्भे से टकाराई और कार के परखच्चे उड़ गए। तत्काल ही उनमें से एक युवक की मौत हो गई। दो युवकों का इलाज जिला अस्पताल में तो एक अन्य युवक का इलाज मेडिकल में चल रहा है।

क्रान्तिधरा पर इस घटना के बाद मौके पर मदद करने वालों की भीड़ लग गई। हालाकि इस तरह के मामलों में ज्यादातर लोग सिर्फ जानकारियां लेते हैं चुपचाप खड़े रहते हैं। लेकिन इस मामले में लोगों ने पुलिस का सहयोग बेहद तत्तपरता के साथ किया। गाड़ी में फंसे युवकों को वहां से निकालकर तुरन्त अस्पताल पहुंचाया और इस प्रकार उनका इलाज शुरू किया जा सका।

इस दौरान समाजवादी पार्टी के शहर उपाध्यक्ष शहजाद कुरैशी भी मानवता के नाते मौके पर पहुंचे और उन्होंने घायलों को मौके पर यथासंभव मदद की।

शहजाद के अलावा भी वहां पर दर्जनों ऐसे युवक थे जिन्होंने आगे आकर इन युवकों की मदद की और पुलिस के साथ मिलकर समाज के सम्मुख एक ऐसा सजीव उदाहरण पेश किया जिसे सुनकर जर्रे-जर्रे में मौजूद अल्लाह, ईश्वर और भगवान को मनुष्य प्रजाति बनाने पर गर्व महसूस हो रहा होगा।

आजकल जब लोग सड़कों पर घायलों को उनकी हालात पर छोड़कर चलता बनते हैं ऐसे समय में जिन युवकों ने मौके इस तरह की तत्परता दिखाई उनसभी को ई रेडियो इंडिया की ओर से बहुत बहुत बधाई… उन पुलिस कर्मियों को भी बधाई जिन्होंने समय पर मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी का परिचय दिया…. जय हिन्द जय भारत

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षकों की भूमिका पर सेमिनार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षकों की भूमिका पर सेमिनार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षकों की भूमिका पर सेमिनार
  • अर्चना सिंह, ई-रेडियो इंडिया

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के द्वारा शिक्षकों को किस प्रकार प्रभावी बनाया जाए, इस विषय को लेकर केंद्रीय विद्यालय खिचड़ीपुर में एक सेमिनार का आयोजन दिनांक 19 नवंबर को किया गया।

केंद्रीय विद्यालय संगठन के पूर्व अपर आयुक्त एवम शिक्षक कल्याण फाउण्डेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष, उदय नारायण खवारे ने नई शिक्षा नीति पर अनेक बिंदुओं पर अपने विचार रखे, जिनमें उन्होंने हॉलिस्टिक डेवलपमेंट, इंटीग्रल एप्रोच असेसमेंट पॉलिसी फाउंडेशन लिटरेसी एंड लाइब्रेसी जैसे विषयों पर प्रकाश डालते हुए, यह समझाया कि किस प्रकार से शिक्षा प्रणाली को प्रभावशाली बनाया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को, प्रभावी बनाए के लिए, केंद्रीय विद्यालय खिचड़ीपुर के शिक्षकों का मार्गदर्शन किया।

विद्यालय के प्राचार्य संदीप कुमार श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया और ऊपर आयुक्त को भविष्य में भी मार्गदर्शन देने के लिए आमंत्रित किया। लगभग 70 शिक्षकों ने इस सत्र का लाभ उठाया और इससे पहले विद्यार्थियों के लिए भी U.N khaware ने एक सत्र लिया जिसमें कि विद्यार्थियों के अनेक प्रश्नों का उत्तर दिया। कि विद्यार्थी किस प्रकार से अपने भविष्य के लिए पढ़ाई कर सकते है।

स्ट्रेस मैनेजमेंट पर भी उनसे प्रश्न पूछे गए उप प्राचार्य जगदीश वीग एवं श्रीमती मिस्ट्रेस हेडमिस्ट्रेस अनुपमा बिष्ट ने भी, कार्यक्रम का आयोजन करने में सभी शिक्षकों का आभार व्यक्त किया और आशा व्यक्त की कि केंद्रीय विद्यालय खिचड़ीपुर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में अपनी अहम भूमिका निभाएगा।

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KG Global School Meerut में बच्चों की मस्ती, मेले का लिया लुत्फ

  • संतराम पांडे, मेरठ

KG Global School Meerut आन्नद एन्कलेव मोहकमपुर में बाल दिवस के उपलक्ष्य में बाल मेला का आयोजन हुआ, जिसका उद्घाटन डाॅ. वीर बहादुर सिंह (प्रधानाचार्य के.के. इण्टर काॅलिज) व डाॅ. संजीव शर्मा (प्रेसीडेंट माइड पाॅवर एजूकेशनल ट्रस्ट) मेरठ ने किया। विशिष्ट अतिथि ए.एस. नेहरा पूर्व प्रधानाचार्य बिडला स्कूल पिलानी राजस्थान, दिगविजय सिंह चैहान, प्रबन्धक एल.पी.एस. स्कूल, राजकुमारी चांदना (पार्षद) व शगुन पाहुजा प्रबन्धक माईड पाॅवर पब्लिक स्कूल, ब्रहमपुरी ने दीप प्रवज्जलित करके मेले का शुभारम्भ किया। प्राधानाचार्य श्वेता तनेजा ने मुख्य अतिथियों को मेले का भ्रमण कराया।

डाॅ. वीर बाहदुर जी ने अभिभावको व बच्चों को सम्बोधित करते हुये इस तरह के सामुहिक आयाजनो के लगातार कराने पर जोर दिया उन्होंने कहा की इस तरह की गतिविधियां बच्चों में सामाजिक व क्रियात्मक मानसिकताओं को पोषित करेगी व उन्हें जीवन के अनेको आयामो के बारे में सोचने को तैयार करेगी।

डाॅ. संजीव शर्मा ने भी अपने उद्बोधन में हर वर्ष इस तरह की गतिविधियां चलाने के लिये KG Global School Meerut प्रबन्धन व अन्य सभी स्टाॅफ के सदस्यों को निर्देषित किया और संरक्षकों व सभी विधार्थियों को उनके विशिष्ट कार्य योजनाओं के लिये प्रोत्साहित किया।

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KG Global School Meerut में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत करते अतिथि।

बच्चों द्वारा खाने पीने के बहुत सारे स्टाॅल लगाये गये व पूरे साल KG Global School Meerut में बच्चों द्वारा बनाए गए काराफ्ट की प्रदर्शनी लगाई गयी बच्चों व अभिभावकों ने मेले में झूलों का आनंद लिया। बच्चों के विशिष्ट कार्य एवं गतिविधियों के लिये 20 से अधिक बच्चो को विभिन्न पुरस्कार दिये गये कई अध्यापकों को भी उनके द्वारा सम्पादित किये गये विशेष कार्यों के लिये विशिष्ट अतिथियों के द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अभिषेक बालरे, सरिता, संतोष भावना, दीपाली, सीमा, माया, मेघा, प्रिया, शिवेन्द्र आदि का सहयोग रहा।

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आई0 ई0 सी0 कालेज में रक्तदान शिविर का आयोजन

  • अर्चना सिंह, नई दिल्ली

नालेज पार्क स्थित आई0 ई0 सी0 कॉलेज में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। रक्तदान शिविर का आयोजन ग्लोबल डायनामिक एजूकेशन सोसायटी के सहयोग एवं राष्ट्रीय चैरिटेबल ब्ळ्ड सेंटर, नोएडा के सौजन्य से किया गया। शिविर के शुभारंभ अवसर पर राष्ट्रीय चैरिटेबल ब्ळ्ड सेंटर के अधिकारी श्री अनिल चौहान ने कहा कि देश के अनेकों व्यक्ति रक्त की कमी से मृत्यु को प्राप्त करते है इसलिये प्रत्येक व्यक्ति को रक्तदान कर समाज के उत्थान के लिये कार्य करना चाहिये। रक्तदाता समाज के जीवनरक्षक है। संस्थान के छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में बढ चढकर हिस्सा लेना चाहिये।

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संस्थान के निदेशक प्रो0 भानु प्रताप सिंह सागर ने कहा कि रक्त की कमी का अहसास उस व्यक्ति से पूछना चाहिये जिसके परिवार का कोई सदस्य रक्त के अभाव में काल का ग्रास बन गया हो। प्रत्येक व्यक्ति को रक्तदान का संकल्प लेना चाहिये। इस अवसर पर कार्यक्रम प्रभारी प्रो0 शरद माहेश्वरी ने बताया कि रक्त का कोई अन्य विकल्प नहीं है इसलिये संस्थान ही नहीं देश के प्रत्येक व्यक्ति को रक्तदान के द्वारा होने वाले फायदों को समझना चाहिये। उन्होंने बताया कि शिविर के दौरान संस्थान के सभी संकायों के छात्रों में अत्याधिक उत्साह देखने को मिला।

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शिविर में 160 छात्रों ने पंजीकरण कराया तथा चिकित्सकों द्वारा किये गये जाँच सर्वेक्षण के आधार पर 115 छात्र एवं शिक्षक रक्तदान के लिए उपयुक्त पाये गए तथा उन्होंने रक्तदान किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में राष्ट्रीय चैरिटेबल ब्ळ्ड सेंटर के अध्यक्ष श्री संजय त्रिपाठी, डा. एश्वर्या, डा. प्रियंका गोयल, संस्थान के डीन प्रोफेसर बी. शरण, सीएफओ श्री अभिजीत कुमार एवं शिक्षक तथा स्टाफ का सह्योग रहा ।

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प्रेम के जगत में एकमात्र ही भटकाव है, वह है धन: भगवान रजनीश

प्रेम के जगत में एकमात्र ही भटकाव है वह है धन है: भगवान रजनीश
प्रेम के जगत में एकमात्र ही भटकाव है वह है धन है: भगवान रजनीश

प्रेम के जगत में एकमात्र ही भटकाव है वह है धन है। यह बड़ी मनोवैज्ञानिक और बड़ी गहरी बात है। फरीद कह रहा है कि प्रेम से चूकने का एक ही उपाय है और वह है कि कंचन में उत्सुक हो जाए। तू धन में उत्सुक हो जाए। अब यह नाजुक है। यह ख्याल बड़ा गहरा है। और मनोविज्ञान अब इसकी खोज कर रहा है धीरे-धीरे। और मनोविज्ञान कहता है कि जो आदमी धन में उत्सुक है वह आदमी प्रेम में उत्सुक नहीं होता। ये दोनों बात एक साथ होती ही नहीं..ऐसे ही जैसे जो आदमी पूरब चल रहा है, वह पश्चिम की तरफ नहीं चल रहा है।

क्यों धन और प्रेम में इतना विरोध है?

प्रेम बड़े से बड़ा धन है। जिसने प्रेम को पा लिया, उसे धन मिल गया। वह अपनी गरीबी में भी हीरे-जवाहरातों का मालिक है। लेकिन जिसने प्रेम नहीं पाया, उसके लिए तो फिर एक ही रास्ता है कि वह धन इकट्ठा करे, ताकि थोड़ा सा आश्वासन तो मिले कि मेरे पास भी कुछ है। धन प्रेम का सब्स्टीट्यूट है, परिपूरक है। इसलिए कृपण आदमी प्रेमी नहीं होता। कंजूस प्रेमी नहीं होता..हो नहीं सकता। नहीं तो वह कंजूस नहीं हो सकता। ये दोनों बातें एक साथ नहीं घट सकतीं; ये विपरीत हैं। जितना तुम धन को इकट्ठा करते हो उतना ही तुम्हारा प्रेम पर भरोसा कम है। तुम कहते होः कल क्या होगा? बुढ़ापे में क्या होगा? आर्थिक हालत बिगड़ जाएगी तो परिस्थिति कैसे सम्हालूंगा?

प्रेमी कहता हैः क्या करेंगे; जो प्रेम आज करता है वह कल भी करेगा। जिसने आज प्रेम दिया है और भरपूर किया है वह कल भी फिकर लेगा।

अगर तुम किसी को पाते हो जो तुम्हें प्रेम कर रहा है तो बुढ़ापे की चिंता न होगी। लेकिन अगर तुम्हारा कोई नहीं प्रेमी, तुमने किसी को इतना प्रेम नहीं दिया, न कभी किसी से इतना प्रेम लिया, तो तिजोड़ी ही सहारा है बुढ़ापे में। और फिर तुम्हें डर है, प्रेमी तो धोखा दे जाए; तिजोड़ी कभी धोखा नहीं देती। प्रेमी का क्या भरोसा, आज साथ है, कल अलग हो जाए! धन ज्यादा सुरक्षित मालूम पड़ता है। प्रेमी माने न माने, धन तो सदा तुम्हारी मान कर चलेगा। धन तो कोई अड़चन खड़ी नहीं करता, मालकियत पूरी स्वीकार करता है। फिर धन का तुम जैसा उपयोग करना चाहो, जब करना चाहो, वैसा कर सकते हो। प्रेमी का तुम उपयोग नहीं कर सकते। प्रेमी प्रेम में कुछ करे, ठीक; प्रेमी के साथ जबरदस्ती नहीं की जा सकती।

मनोवैज्ञानिक कहते हैं, छोटा बच्चा जब पैदा होता है तो अगर मां उसको प्रेम करती हो तो वह ज्यादा दूध नहीं पीता। आपको भी अनुभव होगा, अगर मां बच्चे को ठीक प्रेम करती हो तो मां सदा परेशान रहती है उसको जितना दूध पीना चाहिए, वह नहीं पी रहा है; जितना खाना खाना चाहिए, वह नहीं खा रहा है। वह उसके पीछे लगी है चैबीस घंटे कि और खा। क्यों? क्योंकि बच्चा जानता है, जिस स्तन से दूध अभी बहा प्रेम से भरा हुआ, जब भूख लगेगी फिर बहेगा। भरोसा है। लेकिन अगर मां बच्चे को प्रेम न करती हो; नर्स हो, मां न हो तो बच्चा छोड़ता ही नहीं स्तन। क्योंकि बच्चे को डर हैः तीन घंटे बाद जब भूख लगेगी, नर्स उपलब्ध रहेगी नहीं रहेगी, इसका कुछ पक्का नहीं है।

भविष्य अंधकारपूर्ण है। इसलिए तुम देखोगे, जिन बच्चों को प्रेम नहीं मिला उनके पेट बड़े पाओगे; जिन बच्चों को प्रेम मिला उनके पेट बड़े नहीं पाओगे। पेट बड़ा, मां की तरफ से प्रेम नहीं मिला, इसका सबूत है। बड़ा पेट यह कह रहा है कि थोड़ा भोजन हम इकट्ठा कर लें वक्त-बेवक्त के लिए, क्योंकि कुछ भरोसा तो है नहीं। नर्स क्या भरोसा? मां का, अगर वह सिर्फ शरीर की ही मां हो और हृदय से प्रेम न बहता हो, और भरोसा न हो तो बच्चा बेचारा अपनी सुरक्षा कर रहा है। वह यह कह रहा है, थोड़ा अतिरिक्त हमेशा रखना चाहिएः कभी रात भूख लगेगी, कोई उठाने वाला न होगा, तो पेट भरा होना चाहिए।

तुम ध्यान रखना, गरीब लोग ज्यादा खाते हैं, क्योंकि कल का भरोसा नहीं। अमीर की भूख ही मिट जाती है, क्योंकि जब चाहिए तब मिल जाएगा। अमीरों के पेट बड़े होने चाहिए वस्तुतः। लेकिन तुम पाओगे, अकालग्रस्त क्षेत्रों में लोगों के पेट बहुत बड़े हो जाते है; सारा शरीर सूख जाता है, पेट बड़ा हो जाता है। क्योंकि जब मिल जाता है तब वे पूरा खा लेते हैं, जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं; क्योंकि दो-चार-पांच दिन चलना पड़ेगा, क्या पता बिना खाने के चलना पड़ेगा!

मां के स्तन पर बेटे को दो रास्ते खुलते हैंः एक प्रेम का रास्ता है। एक पेट का रास्ता है। पेट यानी धन, पेट यानी तिजोड़ी। एक प्रेम का रास्ता है। प्रेम यानी प्राण, प्रेम यानी आत्मा। तिजोड़ी यानी शरीर; प्रेम यानी परमात्मा। तो जिनके जीवन में प्रेम की कमी है, वे धन पर भरोसा रखेंगे।

इसलिए फरीद कहता हैः कंचन वंने पासे कलवति चीरिआ।

और ध्यान रखना, प्रेम के रास्ते में धन के अतिरिक्त और कोई बाधा नहीं है। अगर धन की तरफ झुका, लुभाया तो, आरे से चीर दिया जाएगा। इसका कुछ मतलब ऐसा नहीं है कि कोई आरे से किसी को चीर देगा। लेकिन जब प्रेम कट जाता है तो प्राण ऐसे ही कट जाते हैं जैसे आरे से चीर दिए गए हों।

सेख हैयाती जगि न कोई थिरु रहिआ।

‘शेख, इस दुनिया में कोई हमेशा रहने वाला नहीं हैं। जिस पीढ़े पर हम बैठे हैं, उस पर कितने ही बैठ चुके हैं।’

वैज्ञानिक कहते हैं कि जिस जगह तुम बैठे हो वहां कम से कम दस आदमियों की लाशें दफनाई जा चुकी हैं। इंच-इंच जमीन पर करोड़ों-करोड़ों लोग दफनाए जा चुके हैं। तुम भी थोड़े दिन बाद जमीन के भीतर होओगे, कोई और तुम्हारे ऊपर बैठा होगा। पर्त-दर-पर्त मुर्दे दबते जाते हैं।

शेख, इस दुनिया में कोई भी हमेशा रहने वाला नहीं हैं।

बुद्ध का बड़ा प्रसिद्ध वचन हैः सब्बे संघार अनिच्चा..इस संसार में सभी कुछ बहावमान है, बहता जा रहा है, परिवर्तनशील है। इसमें कहीं भी कोई किनारा नहीं है। लहरों को किनारे मत समझ लेना और उनको पकड़ कर मत रुक जाना। और जिस जगह तुम बैठे हो, बैठे-बैठे अकड़ मत जाना, उसको सिंहासन मत समझ लेना। सब सिंहासनों के नीचे कब्रें दबी हैं।

जैसे कुलंग पक्षी कार्तिक में आते हैं, चैत में दावानल और सावन में बिजलियां आती हैं और जाड़े में जैसे कामिनी अपने प्रीतम के गले में बांहें डाल देती हैं..ऐसे ही सब क्षण भर को आता है और चला जाता है। इस सत्य पर तू अपने मन में विचार कर कि यहां सब क्षणभंगुर है।’ शाश्वत के सपने मत सजा। शाश्वत के सपने सजाएगा तो भटकेगा। क्षणभंगुर के सत्य को देख। इस पर तू अपने मन में विचार कर।

‘मनुष्य के गढ़े जाने में महीनों लगते हैं, टूट जाने में क्षण भी नहीं लगता।’

फरीद कहते हैंः जमीन ने आसमान से पूछा, कितने खेने वाले चले गए। श्मशान और कब्रों में उनकी रूहें झिड़कियां झेल रही हैं!

चले चलणहार विचारा लेइ मनो।

चलती हुई हालत है; चल ही रहे हैं मौत की तरफ। चले चलनहार..चल ही पड़े हैं। जन्म के साथ ही आदमी मरने की तरफ चल पड़ा है।

चले चलणहार विचारा लेइ मनो।

ठीक से सोच ले। यहां घर बनाने की कोई जगह नहीं है। यहां रात रुक जा, ठीक; मंजिल यहां नहीं है। पड़ाव हो, बस; सुबह उठे और डेरा उठा लेना है।

चले चलणहार विचारा लेइ मनो।

गंढ़ेदिआ छिअ माह तुरंदिआ हिकु खिनो।।

छह महीने लग जाते हैं बच्चे के गढ़ने में, क्षण भर में मिट जाता है। मरने में क्षण भर नहीं लगता।

जिमी पुछै असमान फरीदा खेवट किनी गए।

जमीन आसमान से पूछती है, फरीद कितने खेने वाले, नावें चलाने वाले मांझी आए और चले गए।

जारण गोरा नालि उलामे जीअ सहे।

और वे सब कहां हैं जो बड़ा मस्तक उठा कर मांझी बने थेः जो नाव पर अकड़ कर बैठे थे; जिन्होंने सिंहासनों को शोभायमान किया था..वे अब सब कहां हैं? वे सब बड़े खेने वाले लोग कहां खो गए?

श्मशान और कब्रों में उनकी रूहें झिड़कियां झेल रही हैं।

अब वे अपने लिए ही पछता रहे हैं कि उन्होंने जीवन व्यर्थ खोया। अब वे रो रहे हैं कि उन्होंने कुछ न किया, जो करने योग्य था! और वह सब कमाया जो मिट्टी था! हीरे गंवाए, कंकड़ इकट्ठे किए! कूड़ा-करकट सम्हाला, संपदा खोई। अब वे झिड़कियां झेल रहें हैं; खुद पछता रहे हैं।

जीवन, जिसे तुम जीवन कहते हो, जीवन नहीं हैं; वह तो केवल मरने की प्रतीक्षा है; मृत्यु के द्वार पर लगा क्यू हैः अब मेरे, तब मेरे! एक और जीवन है, एक महाजीवन है। धर्म उसी का द्वार है। लेकिन जो इस जीवन को मृत्यु जान लेगा वही उस महाजीवन की खोज में निकलता है। इस पर ठीक से सोचना।

फरीद ठीक कहता हैः खूब मन ठीक से विचार कर ले। यही जीवन हो सकता है, यह क्षणभंगुर, जो अभी है और अभी गया; हवा के झोंके में कंपते हुए पत्ते की भांति, जो प्रतिपल मरने के लिए कंप रहा है? सुबह के उगते हुए सूरज में जैसे ओस समा जाती हैं, विलीन हो जाती है, खो जाती है, ऐसा मौत किसी भी दिन तुझे तिरोहित कर देगी। यह तेरा होना कोई होना है? इस पर ठीक से विचार कर ले। जिन्होंने भी ठीक से विचार किया वे ही नये अस्तित्व की खोज में लग गए।

बुद्ध ने देखा मरे हुए आदमी को, पूछा अपने सारथी कोः क्या हो गया है इसे?

सारथी ने कहाः सभी को हो जाता है..अंत में सभी मर जाते हैं।

बुद्ध ने कहाः रथ वापस लौटा ले।

सारथी ने कहाः लेकिन हम युवक महोत्सव में भाग लेने जा रहे थे। वे आपकी प्रतीक्षा करते होंगे, क्योंकि राजकुमार गौतम ही युवक महोत्सव का उदघाटन करने को था।

गौतम बुद्ध ने कहाः अब मैं युवक न रहा। जब मौत आती है, और मौत आ रही है..कैसा यौवन? कैसा उत्सव? वापस लौटा ले। मैं मर गया। इस आदमी को मरा हुआ देख कर मैं जिसे अब तक जीवन समझता था, वह मिट गया; अब मुझे किसी और जीवन की तलाश में जाना है।

उस जीवन की खोज ही धर्म है।

ओशो
अकथ कहानी प्रेम की
प्रवचन नं – 1

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IACM Conclave 2022: देशभर के सात सौ डॉक्टर्स करेंगे प्रतिभाग

IACM Conclave 2022: इंडियन एसोसियेशन ऑफ क्लीनिकल मेडिसिन का 28वा वार्षिक अधिवेशन राजगीर के अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में 11 नवम्बर से 13 नवंबर तक आयोजित होगा। ऐसा पहली बार हो रहा है की ऐसे राष्ट्रीय स्तर के एसोशियेशन के वार्षिक सम्मेलन का आयोजन अनुमंडल स्तर के शहर राजगीर में हो रहा है। आयोजन को लेकर स्थानीय कमिटी के लोग काफी उत्साहित है।

स्वागत समिति के अध्यक्ष डॉ श्याम नारायण प्रसाद ने बताया कि इस सम्मेलन में देश के सभी प्रांतों से डॉक्टर और पीजी स्टूडेंट्स भाग लेंगे और ज्ञान का आदान-प्रदान करेंगे| इस बार अधिवेशन में लगभग 600 से 700 चिकित्सक भाग लेंगे और करीब 250 पीजी स्टूडेंट्स भी अपना उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

इस कांफ्रेंस के आयोजक सचिव डॉ. सुजीत कुमार, अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार (पटना) से और एवम कोषाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह हैं। साथ ही साथ आयोजन समिति में डॉ. दिनेश कुमार सिन्हा, डॉ.इंद्रजीत कुमार, डॉ.परुषोतम कुमार, डॉ. मिथलेस प्रसाद, डॉ. रश्मि नारायण एवम बिहारशरीफ के तमाम फिजिशियन -और डॉक्टर इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।

अधिवेषण के मुख्य अतिथि डॉ बीबी ठाकुर एवं उदघाटन कर्ता पद्म श्री पुरस्कृत डॉ एसएन आर्या होंगे।देश के जाने माने चिकित्सक डॉ सहजानंद प्रसाद सिंह, डॉ गिरीश माथुर, डॉ एके गुप्ता, डॉ पीके चौधरी, डॉ कमलेश चौधरी, डॉ डीपी सिंह सहित सैकड़ो मशहूर डॉक्टर इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने आ रहे हैं।

  • ई रेडियो इंडिया के लिए राजगीर, बिहार से एसके भारती की रिपोर्ट
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ज्योतिषाचार्य शिवानी थाइलैंड गवर्नर द्वारा डॉक्टरेट से सम्मानित

Astrologer Shivani awarded doctorate by Thailand Governor
Astrologer Shivani awarded doctorate by Thailand Governor

मेरठ। अंतरराष्ट्रीय अस्त्रोंलोगों फेडरेशन (IAF-USA) आवाम थाइलैंड चैप्टर द्वारा अयोजित थाइलैंड त्रिगुणी समिट 2022 (Thailand Tringular Summit 2022) International Astrology Fedration of USA की तरफ से 2022 के 3 दिन के अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष समेलन का आयोजन 29th oct से 1st Nov फाइव स्टार होटल थाइलैंड में किया गया Dr Itkom Watana (President Thailand IAF) आवाम Dr Kwekan Chukeron (President women chapter) 4 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन के अंतिम दिन गवर्नर पटाया आवाम मेयर पटाया की मौजूदगी मैं विभिन्न देशों se आये अंतराष्ट्रीय ज्योतिषी ने थाइलैंड वरिष्ठता धर्म गुरु (Monk) के समक्ष गुरु पूजा की आवाम उसके बाद थाइलैंड के कलाकार ने राष्ट्रीय नृत्य पेश किया l

हिन्दुस्तान के सर्वोच्च ज्योतिषी मैं गिने जाने वाले श्री अनिल वातस आवाम Dr H S Rawat जी भी सम्मेलन में मौजूद थे मेरठ की प्रसिद्ध ज्योतिष रत्न शिवानी प्रधान को वैदिक ज्योतिष मैं उनके योगदान के लिये Hoonary Thailand Doctrate in Vedic Astrology से नवाजा गया, उनको मंच पर दोशाला उड़ा कर व गौरव चिन्ह और थाइलैंड डॉक्टरेट सर्टिफिकेट प्रदान करके समान किया गया। सम्मानित करने वालों मैं गवर्नर पटाया थाइलैंड, डॉ Ittikom Watana (प्रेसिडेंट थाइलैंड अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष फेडरेशन ), डॉ दिव्याकिरण ,Dr Kwekaran Chukeron आवाम प्रदीप कुमार (IAF) मौजूद रहे ।

कम उम्र में ही शिवानी प्रधान ने ज्योतिषी विज्ञान में विभिन उपलाभदिया जैसे पीएचडी वैदिक ज्योतिष, जोतिष रतन , ज्योतिष मणि , ज्योतिष शास्त्री अवाम ज्योतिष आचार्य डिग्री प्राप्त की हैं ।

  • शिवानी प्रधान देश आवाम विदेश के विभिन्न मंचो पर मेरठ का नाम पहले भी रोशन कर चुके है ।
  • कार्यक्रम में विभिन्न देशों से आए विद्वानों वे ज्योतिषयों ने भाग लिया ।
  • अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन मैं मेडिकल ज्योतिष मैं अलग अलग देश क्या समाधान करते हैं और उसमे ज्योतिष का क्या योगदान हैं उस पर मंथन हुआ ।

चार दिवसीय ज्योतिष सम्मेलन के अंतिम दिन ज्योतिष विज्ञान में सहयोग देने के लिये विभिन्न देश के ज्योतिष को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के समापन पर ज्योतिषाचार्य शिवानी प्रधान ने कहा कि ज्योतिष ज्ञान अपने आप में विज्ञान है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में ज्योतिष का ज्ञान सदियों से प्रमाणित किया जा चुका है। इसके साथ ही उन्होंने ज्योतिष का ज्ञान पूरी तरह से ज्ञान न रखने वालों को पहले इसकी ज्ञान लेने की अपील की।

उन्होने कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन थाइलैंड देश के लिए वरदान साबित हुआ है। यहां प्रतिभागियुओं को विभिन्न देशों से सही ज्योतिषों की संगत भी मिली है, तथा ज्योतिष ज्ञान को लेकर बहुत जानने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ हैl

इस 4 दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न देश से आए ज्योतिषाचार्य, ज्योतिष जिज्ञासु,विशेषज्ञ, कर्मकांडी, वास्तु, रंग, रत्न, विशेषज्ञ, बुद्धिजीवी लेखक व अन्य ज्योतिषाचार्य अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान जनसाधारण की जिज्ञासाओं, शंकाओं का समाधान भी सुझाया गया।

इस दौरान जन साधारण में ज्योतिष के प्रति विभिन्न भ्रांतियों के समाधान के साथ-साथ उनकी निजी समस्याओं के ज्योतिषीय कारण, उनके सम्भावित निवारण तथा हिन्दुस्तान से आये ज्योतिष ने भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर ज्योतिष का उचित पक्ष प्रस्तुत किया और विभिन्न देश से आये ज्योतिषियों के बीच अपनी छाप छोड़ी।

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डी एम मिश्र की ग़ज़लों में जन-संघर्ष एवं प्रतिरोध का स्वर

‘लेकिन सवाल टेढ़ा है’ जनधर्मी तेवर के वरिष्ठ एवं चर्चित गज़लकार डॉ डी एम मिश्र का बहुपठित गजल संग्रह है। अनुभव की भट्टी में पका 118 गजलों का यह संकलन अपनी विशिष्टता एवं सैद्धांतिकी से आबद्ध है। अनेक प्रकार की विविधताओं के बावजूद संग्रह की गजलों का हर शेर संवेदना से लबरेज़ एवं सम्प्रेषणीयता में सहज है।

संग्रह की गजलें प्रमाणित करती हैं कि शायर का जुड़ाव गांव से अधिक है। शहर की चकाचौंध भरी जीवन यात्रा के बीच इनकी रचनात्मकता में ग्रामीण चेतना की गहराई है। शायद यही कारण है कि गांव की पगडंडी, मुखिया का दालान, खेत – खलिहान, आदि का इनमें सहज प्रवेश हो सका है। इनकी गजलों में गांव, गांव की प्रकृति, गांव का संघर्ष, गांव की जीवन-शैली, गांव का सौंदर्य एवं गांव का संत्रास लगातार करवटे लेते दिखता है जिससे गांव का रचनात्मक वितान स्वयं फैलता जाता है।

मध्यवर्गीय जीवन यापन करने वाला डाॅ मिश्र का शायर गांव की दुविधाओं को ओढ़कर अंतरंगता की तलाश कर ही लेता हैं। वस्तुतः अपसंस्कृति के हथियार ने गांव की आत्मीय संवेदना का कत्ल करना शुरू कर दिया है, इससे शायर बारहा सचेत करता रहता है और कहता है:–

कब किसानों की बेहतरी की बात करिएगा
उनकी खुशहाल जिंदगी की बात करिएगा?

यह भी देखें:-

उधर गाँव के लड़कों की टोली निकली
इधर तितलियाँं नाच रही फुलवारी में

डॉ मिश्र की ग़ज़लें सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्य के संवर्धन की पक्षधर हैं। मूल्य, मनुष्यता एवं संस्कृति के ह्रास होते समय में अपनी ग़ज़लों के माध्यम से बेहतर सहेजने का शायर का प्रयास प्रशंसनीय है। सामाजिक समानता के पक्ष में खड़ी इनकी ग़ज़लें परिवर्तन की तलाश में संस्कृति का राग ढूंढती दृष्टिगोचर होती हैं। ढहते जीवन-मूल्यों के बीच सरोकारों का संयम इनकी ग़ज़लों में ख़ूब देखने को मिलता है। देखें:-

अब ये गजलें मिजाज बदलेंगी
बेईमानों का राज बदलेंगी

दूर तक प्यार का स्वर गूँजेगा
ग़ज़लें रस्मो रिवाज बदलेंगी

डॉ मिश्र की ग़ज़लों में यथार्थ का संशय, लेश-मात्र भी नहीं है बल्कि इन ग़ज़लों में ऐसी विलक्षणता है जो बरबस पाठकों को शहर एवं गांव की चेतना में डुबो देता है एवं जीवन-जनित व्यावहारिक मर्म को उजागर करता है। ग्राम्य-जीवन की सजीवता से पूर्ण इनकी ग़ज़लों में अपनी मिट्टी की सोंधी महक है ,जो मन को स्पंदित करती है। गांव की मिट्टी, खेत-खलिहान, किसान एवं सामाजिक संस्कृति का सूक्ष्म विश्लेषण, चीजों के प्रति आस्था, ज़िंदगी को पारंपरिक तौर पर देखने का नज़रिया इनकी ग़ज़लों की सार्थक पूँजी है। देखें:-

हमारे लहलहाते खेत तुमको याद करते हैं
दिखोगी फिर जवां चुनर पहन करके नयी आओ

कोई भी रचना, रचनाकार के मन की स्वतंत्र अभिव्यक्ति होती है। ऐसा देखा गया है कि कोई भी रचनाकार दोहरे व्यक्तित्व के दम पर स्वाभाविक रचना नहीं कर सकता है। डॉ मिश्र जैसा जीते हैं वैसी ही बात अपनी ग़ज़लों में करते हैं। उनका जीवनानुभव उनकी गजलों का जीवंत दस्तावेज है। शेर देखें:-

जैसी रोटी हम खाते हैं
वैसी ही गजलें गाते हैं

वे यह भी कहते हैं:-

जिसमे इंसानियत की बात न हो
ग़ज़लें ऐसा समाज बदलेंगी

इन दिनों ग़ज़लें ख़ूब कही जा रही हैं। इश्क, इबादत, रवायत की गजलें सदियों से चलन में हैं । परंतु दुष्यंत कुमार के बाद जो हिंदी ग़ज़लें कही जा रही हैं, जिसे अदम गोंडवी ने एक नई दिशा दी, उसी ज़मीन की ग़ज़लें मिश्र जी को अन्य ग़ज़लकारों से भिन्न करती हैं। आज ग़ज़लें महबूबा की गलियों से निकलकर गांव के खेत-खलिहान में जाकर पसर गई हैं।फलतः हिंदी कविता की तुलना में ग़ज़लें आज पाठकों के बीच ज़्यादा सर्वग्राह्य हो गई हैं। देखें:-

खेत हमारा अब पूरा उपजाऊ है
अच्छा है जितना था बंजर निकल चुका

WhatsApp Image 2022 10 17 at 1.58.30 PM
Dr DM Mishra Sultanpur

यही कारण है कि आज यह आम-जन के बेहद क़रीब है। डॉ मिश्र की गजलों में आम-जन की संवेदनाओं का स्वाभाविक प्रस्फुटन है। उन्होंने अपनी ग़ज़लों में बड़ी कुशलता के साथ भावनाओं और अन्तरवृत्तियों को अभिव्यक्त किया है। इन्होंने ग़ज़ल की जो ज़मीन तैयार की है वह सार्थक एवं प्रयोज्य है। सादगी, शाश्वत मूल्य एवं जीवन की सहज अभिव्यक्ति यहां देखी जा सकती है। देखें:-

ग़ज़लकार सब लगे हुए फनकारी में
मगर हम लिए खुरपी बैठे क्यारी में

हिंदी ग़ज़ल में भी छोटी एवं बड़ी बहर की ग़ज़लों के अनुशासन का पालन करते हुए सटीक, गहरी एवं मारक बातों को डॉ मिश्र ने कुशलता से रखा है। उनकी ग़ज़लों में समय का संताप, आमजन की अकुलाहट, व्यवस्था के विरुद्ध तेवर एवं हाशिये के जन की पीड़ा है। इन बेचैनियों को कलमबद्ध करते हुए शायर सकारात्मक दिशा एवं संवेदनात्मक ऊर्जा का भी अवलोकन करता है। जिंदगी की विभिन्नताओं एवं विशेषताओं के कई रंगों में सरापा नहाया हुआ यह शायर ग़ज़लों में ही अपने होने को अपनी उपलब्धि मानता है। शेर देखें:-

हवा खिलाफ है लेकिन दिए जलाता हूँ
हजार मुश्किलें हैं फिर भी मुस्कुराता हूँ

अपनी गजलों में सामाजिक जीवन, सरकार और व्यवस्था के अंतर्विरोधों, विद्रूपताओं एवं त्रासदियों को जिस तरह नए अंदाज़ में पिरोया है वह काबिले तारीफ़ है। देखें:-

सलाम आँधियाँ करती है मेरे जज्बों को
इक दिया बुझ गया तो दूसरा जलाता हूँ

संग्रह की ग़ज़लें जन-जीवन से जूझते सवालों की मौजूदगी है। भूख, गरीबी, रोटी एवं जीवन-यापन के लिए जद्दोजहद करते आम-जन की विवशता इन ग़ज़लों को रवानी देती है। डॉ मिश्र का शायर मन अनुभूतियों की आंच में तपता-जलता रहता है। इन्होंने अपने जीवन को आग माना है–

खुली किताब की मानिंद जिंदगी मेरी
कोई पर्दा नहीं है कुछ नहीं छुपाता हूँ

डॉ मिश्र ने संग्रह की गजलों में अपने प्राण-तत्व को जीवंत रखने की कोशिश की है साथ ही अवमूल्यन के दौर में जन-ग़ज़ल की परंपरा को बचाए रखा है। मस्ती, सादगी और तेवर का लिबास ओढ़े डॉ मिश्र की ग़ज़लें पाठकों से सीधा संवाद करती हैं जब वो कहते हैं:-

फूँक दे कब, कौन मेरी झोपड़ी
नींद में भी बेखबर रहता नहीं

लाख यारों मुश्किलें हो सामने
जुल्म के आगे कभी झुकता नहीं

सुविधा-असुविधा, प्रेम-पीड़ा एवं अच्छे-बुरे अनुभवों से गुज़रते हुए डॉ मिश्र के भीतर जो ग़ज़ल का बीज अंकुरित हुआ है वह उनके जीवन-संघर्ष का प्रतिफल-सा दिखता है। देखें:-

बोलने से लोग घबराने लगे
सोचकर नुकसान डर जाने लगे

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फिर ये भी कि:-

कैसे उतार दूँ मैं यह मुफलिसी की चादर
खाली है पेट मेरा दिखला के मर ना जाऊँ

डॉ मिश्र की ग़ज़लें समाज में व्याप्त सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विसंगतियों का बेजोड़ चित्रण है। राष्ट्रीय मर्यादा के रक्षार्थ उनकी ग़ज़लों में जन-जन की भावना समाहित है। सत्ता के ख़िलाफ़ बड़ी साफगोई से अपनी बात कहने में माहिर शायर ने अनुशासन एवं मर्यादा की सीमा को लांघने से खुद को बचाए रखा है। अपनी शायरी में डॉ मिश्र ने आम इंसान के दर्द एवं जमाने के ताप को खूबसूरती के साथ पिरोया है। इन शेरों में वही तो है:-

एक ज़ालिम की मेहरबानी पे मैं छोड़ा गया
जाँ से लेकर जिस्म तक सौ बार में तोड़ा गया

पहले तो मेरी ज़बाँ सिल दी गई फिर बाद में
ठीकरा तकदीर का सर पर मेरे फोड़ा गया

आपके दरबार में सच बोलना भी जुर्म है
बागियों के साथ मेरा नाम भी जोड़ा गया

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डॉ मिश्र की ग़ज़लों में आक्रामकता, सियासत पर प्रहार, एवं समाज का तेवर स्पष्ट दिखता है जहां भ्रम और निराशा के घने कोहरे में घिरा आम-आवाम अपने थके हुए दिल और दिमाग में नया जोश भर कर सामाजिक विसंगतियों एवं राजनैतिक प्रपंचों पर चोट मारते हुए ख़ामोश ज़ुबान की आवाज़ बनकर उभरता दिखता है। बानगी देखें:-

हमें भी पता है शहर जल रहा है
जो बोया जहर था वो अब फल रहा है

हमारी बदौलत मिली उसको कुर्सी
पलटकर वही अब हमें छल रहा है

संवेदन एवं संवादहीन समय से गुजर रहे दौर में डॉ मिश्र की ग़ज़लें रोशनी मुहैया कराती दिखती हैं। देखें:-

बड़ा शोर है गीत कैसे सुनाऊँ
मगर ये मुनासिब नहीं लौट जाऊँ

जहाँ आदमी, आदमी का हो दुश्मन
वहाँ प्यार का पाठ किसको पढ़ाऊँ?

छितराये हुए जिंदगी के विभिन्न रंग-रूपों में डॉ मिश्र ने भी प्रेम को तलाशने का प्रयास किया है। जनपक्षधरता के साथ-साथ इनकी कुछेक गजलों में शाश्वत प्रेम भी समाहित है। देखें:-

झील में खिलते कमल दल की कतारों की तरह
तुम हसीं लगती हो बर्फीले पहाड़ों की तरह

या फिर:-

मैं तेरी सादगी पे मरता हूँ
तुझको दिल के करीब रखता हूँ

मेरी दुनिया तुझी से रंगी है
तुझ पे ही जाँ निसार करता हूँ

डॉ मिश्र की ग़ज़लों में राष्ट्रवादी तेवर के साथ-साथ सांप्रदायिक सद्भाव का जयघोष भी भी झलकता है। अपने चिंतन को राष्ट्र एवं राष्ट्रीयता को समर्पित कर उन्होंने जागृति जगाने की भी कोशिश की है। उन्होंने कहा है:-

देश के आकाओं का डिगने लगा ईमान है
सिर्फ हम तुम ही नहीं खतरे में हिंदुस्तान हैं

तू मुसलमाँ और मैं हिंदू यही बस हो रहा
अब कहाँ कोई बचा इस देश में इंसान है?

ये गुलिस्ताँ है यहाँ बातें अमन की कीजिए
उस तरफ मत जाइए बैठा वहाँ शैतान है

मानव जीवन की सांसारिक जटिलताओं व मुश्किलों के बावजूद गांव, प्रेम, देश और समाज को बचा लेने की जिजीविषा से लबरेज डॉ मिश्र की ग़ज़लें न सिर्फ मन को स्पर्श करती हैं बल्कि उसे वैचारिक स्तर पर परिष्कृत भी करती हैं। कुल मिलाकर डॉ मिश्र की ग़ज़लें संस्कार, संवेदना और परंपरा को सहेजने का विश्वास पैदा करती हैं, जिसमें आम-जन के आत्म-संघर्ष, परिवेश एवं सामाजिक सरोकार की स्पष्ट छाप झलकती है। जनपक्षधरता का कोई भी रचनाकार अपनी रचना के माध्यम से ऐसी सामाजिक व्यवस्था के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है, जिससे मूल्य, मनुष्यता एवं संवेदना की क्षति होती है ,तो यह रचनाकार की सार्थकता होती है। डॉ मिश्र की यह चेतना उनकी ग़ज़लों में मुकम्मल वजूद के साथ प्रस्फुटित हुई है। संग्रह का यह शेर देखें:-

करे सरकार अत्याचार तो जनता कहाँ जाये?
मचा हो दिल में हाहाकार तो जनता कहाँ जाये?

और यह भी:-

हुकूमत है तुम्हारी तो तुम्ही से ही तो पूछेंगे
छिने जीने का ग़र अधिकार तो जनता कहाँ जाये?

डॉ मिश्र की ग़ज़लें भाषा के संतुलन से सुखद वातावरण तैयार करती हैं। क्रोधित, पीड़ित एवं उत्तेजित मन को सहलाते डॉ मिश्र की ग़ज़लें अपने उद्देश्य में सार्थक हैं। डॉ मिश्र प्रकृति में जीने वाले, जीवन में विश्वास करने वाले एवं आम-जन से प्यार करनेवाले सच्चे शायर हैं। डॉ मिश्र की ग़ज़लों की विशिष्टता जन से है, जन-सरोकार से हैं, संवेदना से है, सच्चाई से है।आज इसी बुनियाद पर ग़ज़ल कहना ग़ज़ल की सार्थकता है तभी वो कहते हैं:-

मुझे यकीन है सूरज यहीं से निकलेगा
यहीं घना है अंधेरा है यहीं पे चमकेगा

इसीलिए तो खुली खिड़कियां मैं रखता हूँ
बहेगी जब हवा मेरा मकान गमकेगा

कथ्य, शिल्प, शब्द एवं भाषा के लिहाज से डॉ मिश्र की गजलें सहजता से जुबान पर चस्पा हो जाने वाली है। भीड़ के पीछे बदहवास भागते लोग एवं छूटती हुई सांस्कृतिक विरासत को जानने-समझने की ज़िद डॉ मिश्र को अन्य ग़ज़लगो से अलग पंक्ति में खड़ा करती प्रतीत होती हैं। साफ-सुथरी जुबान में ग़ज़ल कहने के अंदाज़ ने डॉ मिश्र को पाठकों के करीब का शायर बना डाला है। नई ज़मीन एवं नए बदलाव की ओर इशारा करती संग्रह की समय-सापेक्ष ग़ज़लें पूरी संजीदगी के साथ स्वीकार की जा सकती है।

— डॉ पंकज कर्ण,

चित्रगुप्त मंदिर लेन
शास्त्री नगर (कन्हौली)
खादी भंडार
पोस्ट रमना
मुज़फ़्फ़रपुर
बिहार
पिन 842002
मोबाइल नं
9835018472

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Rewari Crime News: पूर्व सैनिक ने भतीजों पर दागी गोलियां

Rewari Crime News: रेवाड़ी जिला के गांव पातुहेड़ा में एक पूर्व सैनिक ने अपने ही दो सगे भतीजों को गोली मार दी। दोनों के एक-एक गोली है, उन्हें ट्रॉमा सेंटर से रोहतक पीजीआई रैफर कर दिया गया है। कसौला थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।

गंभीर अवस्था में कराया भर्ती, पीजीआई रोहतक रेफर, वारदात के बाद आरोपी फरार जांच में जुटी पुलिस

गांव पातुहेड़ा निवासी अमित व हंसराज दोनों सगे भाई है। रविवार की देर रात उनका अपने ही चाचा घनश्याम से किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। घनश्याम सेना से रिटायर्ड है। बात इतनी बढ़ी कि घनश्याम घर के अंदर से पिस्तौल लेकर आया और दोनों पर गोली चला दी।

अमित व हंसराज की उम्र 23-25 साल है। दोनों के पैर में गोली लगी है। गंभीर अवस्था में रात में ही उन्हें ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां से उन्हें रोहतक पीजीआई रैफर कर दिया गया। सूचना के बाद कसौला थाना पुलिस की एक टीम मौके पर गांव पातुहेड़ा तो दूसरी टीम ट्रॉमा सेंटर पहुंची। वारदात के बाद से आरोपी पूर्व सैनिक फरार है। कसौला थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।

ग्रामीणों के अनुसार अमित व हंसराज का अपने ही चाचा घनश्याम से कई दिनों से विवाद चला आ रहा था। कई बार दोनों पक्षों के बीच गाली-गलौज भी हुई। रविवार की रात भी पहले आपस में गाली-गलौज हो रही थी। बाद में गोली चल गई। गोली चलने की वजह से पूरे गांव में दहशत का माहौल है।

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