- 80 पैसे वाली गोली 25 रुपये में, असली से ज्यादा नकली धंधा
- हर दिन करोड़ों का टर्नओवर, कई थोक लाइसेंसी हुए मालामाल
बरेली। बरेली दवा बाजार इन दिनों एक खतरनाक मोड़ पर है। सीधे लाखों लोगों के सेहत से खिलवाड़ कर रहा है। खेल में कई थोक कारोबारी और रिटेलर शामिल है। आगरा बाजार से शुरू हुआ सिलसिला बरेली तक पहुंच गया है। लगातार बरेली बाजार में चिन्हित प्रतिष्ठानों पर छापामारी हो रही है। जिससे बाजार में हड़कंप मचा हुआ है। जिन प्रतिष्ठानों पर छापामारी हुई है वहां पर हिसाब किताब नहीं मिल पा रहा है। कई रिटेलर ने वहां से सामान भी खरीदा है। करोड़ों रुपए की नकली दवाएं बरेली और आसपास खफा दी गई है। बताया जाता है बरेली बाजार में हर माह 100 करोड रुपए से ज्यादा नकली दवा कारोबार होता है। लेकिन इसका हिसाब किताब अभिलेखों में नहीं है।
आगरा में हुई कार्रवाई से मिले इनपुट पर खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन विभाग ने बरेली में जांच पड़ताल शुरू कर दी। सहायक आयुक्त (औषधि) संदीप कुमार ने अपने विश्वसनीय और तेजतर्रार अधिकारी इस काम में लगा दिए। अधिकारियों ने ताबड़तोड़ छापामार कार्रवाई शुरू कर दी। जिससे बाजार में हड़कंप मचा हुआ है। तथाकथित बिचौलिए मामला रफादफा करने के लिए मोटी रकम लेकर घूम रहे हैं लेकिन बात नहीं बन पा रही है।
अभी तक शास्त्री बाजार, गली नबावान, अमानत मार्केट स्थित दर्जन भर दुकानों पर छापा कार्रवाई हो चुकी है। हैप्पी मेडिकोज नामक प्रतिष्ठान की करीब 5:50 लाख रुपए कीमत की संदिग्ध दवाएं बाबा रोड लिंकर प्रेम नगर से पकड़ी जा चुकी है। छापा टीम ने दवाएं सीज कर दिया है।
बरेली में दवा कारोबार सिर्फ इलाज और स्वास्थ्य का साधन नहीं, बल्कि नकलीपन का गढ़ बन चुका है। सिर्फ 80 पैसे में तैयार होने वाली नकली गोली बाजार में 25 रुपये तक बेची जा रही है। हाल ही में बाबा रोड लिंकर से लाखों रुपए की नकली दवाएं सीज होने के बाद यह पूरा खेल उजागर हुआ है। इससे विभाग पूरी तौर से यकीन करने लगा है कि बरेली में बड़ा गोरख धंधा हो रहा है।
बताया जाता है कि बरेली में असली से ज्यादा नकली दवा कारोबार होता है। कारोबारी बताते हैं जो लोग ईमानदारी से कम कर रहे हैं बे कुछ सालों में करोड़पति हो गए। जो लंबा दांव लगा रहे हैं वह अरबपति से कम नहीं है।
बरेली में नकली बड़ा दवा जाल
बरेली में पकड़े गए नेटवर्क का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रोजाना करोड़ों का टर्नओवर हो रहा था। बताया जा रहा है बरेली से उत्तराखंड, बांग्लादेश, नेपाल और आसपास जिलों में दवा सप्लाई होती है। आगरा बाजार सबसे बड़ा दवा मंडी है।
यह तेजतर्रार अधिकारी कर रहे छापामारी
नकली दवा कारोबार में लिप्त प्रतिष्ठान और फर्म पर छापामार कार्यवाही करने हेतु तेज तर्रार अधिकारी लगाए गए हैं। राजेश कुमार, उर्मिला वर्मा, अनामिका जैसे अधिकारी लगातार दवा बाजार में सहायक आयुक्त (औषधि) संदीप कुमार नेतृत्व में छापामार कार्यवाही में लगे हुए हैं। आगरा में हुई कार्रवाई से मिले इनपुट आधार पर सहायक आयुक्त औषधि बरेली ने प्लानिंग बनाई थी।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस: नकली एंटीबायोटिक दवाएं शरीर में रोगाणुओं को पूरी तरह खत्म नहीं कर पातीं। इससे बैक्टीरिया और मजबूत होकर दवा-प्रतिरोधी (Drug Resistant) हो जाते हैं।
नकली दवाओं की पहचान कैसे करें?
आम आदमी के लिए नकली दवा को पहचानना आसान नहीं होता, लेकिन कुछ संकेत मददगार हो सकते हैं:
- पैकिंग पर ध्यान दें – असली कंपनी की दवाओं की पैकिंग उच्च गुणवत्ता की होती है। अगर पैकिंग फीकी, धुंधली या टूटी-फूटी लगे, तो सावधान हो जाएं।
- MRP और प्रिंटिंग की जांच करें – नकली दवाओं में अक्सर प्रिंटिंग गड़बड़ होती है या MRP असामान्य रूप से कम/ज्यादा होता है।
- QR कोड और बारकोड स्कैन करें – अब कई कंपनियां दवा की असलियत जांचने के लिए QR कोड देती हैं। इसे स्कैन कर जानकारी मिल सकती है।
- रंग, गंध और स्वाद – गोली या सिरप का रंग/स्वाद सामान्य से अलग हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
- अनजान कंपनी के नाम से बचें – अगर दवा किसी ऐसी कंपनी की है जिसका नाम आपने कभी नहीं सुना, तो पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से पुष्टि करें।
बचाव कैसे करें?
मान्यता प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही खरीदें दवा
बिल लेना न भूलें- नकली दवा की शिकायत तभी संभव है जब आपके पास खरीद की पक्की रसीद हो।
ऑनलाइन खरीद में सावधानी- सिर्फ विश्वसनीय और मान्यता प्राप्त पोर्टल से ही दवा खरीदें।
जनरल नाम पर जोर दें- डॉक्टर से ब्रांडेड दवा की बजाय जेनेरिक नाम लिखवाने का आग्रह करें ताकि धोखाधड़ी की संभावना घटे। शक होने पर तुरंत प्रयोग बंद करें और डॉक्टर को दिखाएं।
शिकायत कहां और कैसे करें?
अगर आपको नकली दवा मिलने का संदेह हो, तो आप इन माध्यमों से शिकायत कर सकते हैं:
- जिला औषधि निरीक्षक (Drug Inspector) – हर जिले में औषधि विभाग का कार्यालय होता है, वहीं संपर्क करें।
- राष्ट्रीय औषधि नियामक प्राधिकरण (CDSCO) – वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
- राज्य औषधि नियंत्रण विभाग- प्रत्येक राज्य में अलग से कंट्रोल विभाग है, वहां संपर्क किया जा सकता है।
- पुलिस और क्राइम ब्रांच- बड़े पैमाने पर नकली दवा मामले सीधे अपराध की श्रेणी में आते हैं। एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।
नकली दवा सिर्फ स्वास्थ्य नहीं, कानून का भी मुद्दा
नकली दवाओं का कारोबार सिर्फ स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं, बल्कि संगठित अपराध भी है। इसमें बड़े स्तर पर ट्रांसपोर्ट नेटवर्क, गोदाम, फर्जी लाइसेंस और मनी लॉन्ड्रिंग शामिल होते हैं। हाल में बाबा रोड लिंकर से बरामद लाखों की दवाएं इस बात का सबूत हैं कि पूरा तंत्र इसमें शामिल था।
क्यों जरूरी है जागरूकता?
नकली दवाओं का धंधा तभी चलता है जब उपभोक्ता लापरवाह होता है। अगर मरीज और परिवार सचेत रहें, बिल लें, और संदिग्ध दवाओं की शिकायत करें, तो धीरे-धीरे इस धंधे की जड़ें कमजोर होंगी।
बरेली का नकली दवा कांड हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि दवा जैसी संवेदनशील चीज़ भी अपराधियों की कमाई का जरिया बन चुकी है। यह न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि पूरे समाज के लिए चुनौती है। नकली दवा से बचाव सरकारी सख्ती और जनता की जागरूकता- दोनों संयुक्त प्रयास से ही संभव है।
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