Kisan Andolan Latest Update: एक किसान की मौत, प्रदर्शन उग्र

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Kisan Andolan Latest Update: एक किसान की मौत, प्रदर्शन उग्र
Kisan Andolan Latest Update: एक किसान की मौत, प्रदर्शन उग्र
  • संवाददाता || ई-रेडियो इंडिया

किसान आंदोलन (Kisan Andolan Latest Update) धीरे-धीरे उग्र होता जा रहा है दिल्ली में किसानों ने प्रदर्शन करते हुए वहां की सड़कों पर अपना जमघट इकट्ठा कर लिया और इस दौरान पुलिस प्रशासन से काफी धक्का-मुक्की भी हुई।

इस दौरान खबर आ रही है कि दिल्ली में किसानों के द्वारा निकाली गई ट्रैक्टर रैली के हादसे में एक किसान की मृत्यु हो गई है, किसान की मौत होने की पुष्टि पुलिस ने की है। बताया जा रहा है कि आईटीओ के पास डीडीयू मार्ग पर जाते हुए किसान की हादसे में मौत हुई है। पुलिस ने बताया कि जिस दौरान यह घटना हुई उस दौरान ट्रैक्टर काफी तीव्र गति से जा रहा था और इसी दौरान ट्रैक्टर पलट गया।

किसान बोले पुलिस ने मारी गोली

किसान की मौत के बाद बौखलाए प्रदर्शनकारी किसानों ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि मृतक किसान नवनीत सिंह उत्तराखंड के बाजपुर का रहने वाला है और तकरीबन 30 वर्ष का है। इसकी मौत पुलिस की गोली की वजह से हुई है। 

दिल्ली के अलग-अलग स्थानों पर किसान और पुलिस के बीच जमकर झाड़ पर हुई है इस दौरान कहीं पर पुलिस ने तो कहीं पर किसानों में जबरदस्ती दिखाने की कोशिश की।

बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी किसान निर्धारित मार्ग के अलावा दूसरे मार्गो पर भी जाने की जिद करने लगे जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। वही किसान नेता योगेंद्र यादव का कहना है कि जिस तरह की हिंसक झड़पें हुई है उससे किसान का कोई लेना देना नहीं है उसमें कुछ असामाजिक तत्वों का शामिल हो जाना है।

Kisan Andolan Latest Update: राकेश टिकैत बोले, पुलिस ने उकसाया

किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि यह पूरी तरह से पुलिस की जिम्मेदारी है कि यह आंदोलन इतना उग्र हो गया, जिस रास्ते पर ट्रैक्टर मार्च की सहमति मिली थी उसको पुलिस ने ब्लॉक कर दिया था जिसकी वजह से किसान आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। यह सब पुलिस ने जानबूझकर इसलिए किया था ताकि गतिरोध बड़े और उनको मौका मिले।

पुलिस ने कहा कि जिस निर्धारित ट्रैक पर किसानों को ट्रैक्टर पर ऐड करने की अनुमति मिली थी किसान उस पर ना जाकर अन्य रास्तों पर जाने को उतावले हो गए। अधिकारी गणतंत्र दिवस की परेड खत्म होने के बाद उनको इजाजत थी परेड निकालने की जबकि किसानों नक समय से पहले ही परेड को शुरू कर दिया था।