
में युवाओं को मिला उद्यमिता का संदेश
प्रयागराज, 4 नवंबर 2026। पूर्वांचल के युवाओं में छिपी उद्यमशील प्रतिभा को प्रोत्साहित करने और उन्हें नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार सृजन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से आयोजित Purvanchal Startup samvad-2026 सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय, प्रयागराज और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें शिक्षा जगत, प्रशासन, उद्योग, निवेश और स्टार्टअप क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में विकसित नवीन शैक्षिक सुविधाओं का लोकार्पण किया। इसके बाद विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए नवाचारियों और विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए स्टार्टअप प्रदर्शनी का उद्घाटन कर अवलोकन किया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने अपने विचारों, तकनीकी प्रयोगों और नवाचार आधारित परियोजनाओं को प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करना रहा, जहां विद्यार्थी केवल पारंपरिक शिक्षा और डिग्री तक सीमित न रहें, बल्कि अपने विचारों को व्यावहारिक उत्पादों और व्यवसायों में बदलने की दिशा में भी आगे बढ़ें। आयोजन में स्टार्टअप शुरू करने, निवेश प्राप्त करने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और नवाचार को बाजार तक पहुंचाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
में कुलपतियों ने रखी उद्यमिता की रूपरेखा
सभागार में सुबह 11:30 बजे राष्ट्रगीत और विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ औपचारिक सत्र की शुरुआत हुई। प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अब विद्यार्थियों को केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उन्हें स्टार्टअप और उद्यमिता के लिए भी प्रेरित करेगा।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में विद्यार्थियों के सामने रोजगार पाने के साथ-साथ रोजगार उपलब्ध कराने का अवसर भी है। विश्वविद्यालयों को ऐसी शिक्षा और संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए, जिनसे विद्यार्थी अपने नए विचारों को व्यावसायिक रूप दे सकें। इससे न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।
राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी एवं अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी डॉ. सुधीर एम. बोबडे ने विषय प्रवर्तन किया। उन्होंने राजभवन की नवाचार संबंधी दृष्टि और विश्वविद्यालयों में उद्यमिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर विचार रखे।
इसके बाद डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश पाण्डेय ने कार्यक्रम की रूपरेखा और भविष्य की कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने पूर्वांचल में स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग, संस्थागत संसाधनों के उपयोग और विद्यार्थियों को नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

Purvanchal Startup samvad-2026 के तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने दिए सुझाव
कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों में स्टार्टअप और नवाचार से जुड़े विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक जानकारी दी। डॉ. अभय जेरे, प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, डेक्सियन ग्लोबल लिमिटेड ने वैश्विक स्टार्टअप रुझानों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि बदलती तकनीक, बाजार की जरूरतों और नए व्यावसायिक मॉडलों के बीच स्टार्टअप के लिए किस प्रकार अवसर विकसित हो रहे हैं।
उन्होंने वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलावों को समझने और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए नए विचार विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। स्टार्टअप की सफलता के लिए केवल एक नया विचार होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके व्यावहारिक उपयोग, बाजार की मांग और निरंतर विकास की योजना भी जरूरी होती है।
यूपी स्टार्टअप मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं आईएएस अधिकारी सुमित राजेश महाजन ने सरकार की योजनाओं, फंडिंग और प्रोत्साहन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं के लिए उपलब्ध सरकारी सहायता और प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ किस प्रकार लिया जा सकता है।
एकेटीयू के इनोवेशन हब के सलाहकार प्रो. एस.पी. मिश्रा ने आइडिया से प्रोटोटाइप तक की यात्रा को समझाया। उन्होंने बताया कि किसी भी स्टार्टअप की शुरुआत समस्या की पहचान और उसके व्यावहारिक समाधान से होती है। इसके बाद विचार को प्रारंभिक मॉडल में बदलना, उसका परीक्षण करना और उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर उसमें सुधार करना महत्वपूर्ण होता है।
इन तकनीकी सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि स्टार्टअप की यात्रा केवल कल्पना या योजना तक सीमित नहीं रहती। इसके लिए तकनीकी ज्ञान, बाजार की समझ, टीमवर्क, संसाधनों का प्रबंधन और निरंतर प्रयास की जरूरत होती है।
में विश्वविद्यालयों के लिए इंक्यूबेशन केंद्रों पर जोर
दोपहर 2:30 बजे कार्यक्रम में दो समानांतर गतिविधियां आयोजित की गईं। एक ओर विद्यार्थियों ने स्टार्टअप प्रदर्शनी का अवलोकन किया, वहीं दूसरी ओर राज्यपाल एवं कुलाधिपति की अध्यक्षता में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की गोलमेज बैठक आयोजित हुई।
बैठक में विश्वविद्यालयों के भीतर स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए संस्थागत व्यवस्था विकसित करने पर चर्चा की गई। राज्यपाल ने सम्मिलित विश्वविद्यालयों को अपने यहां इंक्यूबेशन केंद्र स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। इंक्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से विद्यार्थियों और नवाचारियों को शुरुआती स्तर पर मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता और अपने विचारों को विकसित करने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
विश्वविद्यालयों में इंक्यूबेशन केंद्र स्थापित होने से विद्यार्थियों को अपने परिसर में ही स्टार्टअप से संबंधित मार्गदर्शन मिलने की संभावना बढ़ेगी। ऐसे केंद्र नए विचारों को प्रोटोटाइप में बदलने, विशेषज्ञों से संपर्क स्थापित करने और संभावित निवेशकों तक पहुंच बनाने में मददगार हो सकते हैं।
इस दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं और स्टूडियो का भी भ्रमण किया। विश्वविद्यालय में उपलब्ध शैक्षिक और तकनीकी संसाधनों का उपयोग नवाचार तथा उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए करने पर जोर दिया गया।
में निवेशकों ने बताया फंडिंग का रोडमैप
कार्यक्रम के पैनल डिस्कशन में स्टार्टअप के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने और निवेश प्राप्त करने की प्रक्रिया पर चर्चा हुई। इसमें सिडबी के उप महाप्रबंधक प्रत्यूष मिश्र, निवेशक अमित सिंघल और फ्लूइड वेंचर्स के संस्थापक साझेदार बिबिन बाबू ने हिस्सा लिया।
पैनल में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बताया कि स्टार्टअप के लिए फंडिंग जुटाने से पहले व्यावसायिक विचार की स्पष्टता, बाजार की संभावनाओं और संभावित ग्राहकों की जरूरतों को समझना आवश्यक है। निवेशक किसी भी परियोजना का मूल्यांकन करते समय उसके व्यावसायिक मॉडल, विकास की संभावना और टीम की क्षमता जैसे पहलुओं पर ध्यान देते हैं।
विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि स्टार्टअप के शुरुआती चरण में वित्तीय योजना बनाना महत्वपूर्ण है। संस्थापकों को यह स्पष्ट रखना चाहिए कि उन्हें कितनी पूंजी की आवश्यकता है, उसका उपयोग किन गतिविधियों में होगा और व्यवसाय को आगे बढ़ाने की रणनीति क्या होगी।
इस चर्चा ने विद्यार्थियों को स्टार्टअप के वित्तीय पक्ष को समझने का अवसर दिया। विशेषज्ञों ने निवेश की प्रक्रिया और संभावित वित्तीय सहयोग के रास्तों से जुड़े अनुभव साझा किए।
आइडियाथॉन विजेताओं को मिला सम्मान, विश्वविद्यालयों के बीच एमओयू
कार्यक्रम के समापन समारोह में आइडियाथॉन के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के नवाचार और उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए विचारों को प्रोत्साहित किया गया। आयोजन के दौरान प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते का उद्देश्य दोनों विश्वविद्यालयों के बीच नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करना तथा सहयोग को मजबूत करना है। विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षिक और तकनीकी सहयोग से विद्यार्थियों को नए अवसर मिल सकते हैं। इससे नवाचार आधारित गतिविधियों, स्टार्टअप मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग को आगे बढ़ाने का रास्ता तैयार हो सकता है।
एमओयू को कार्यक्रम के महत्वपूर्ण परिणामों में शामिल किया गया। इसके माध्यम से दोनों संस्थान नवाचार को बढ़ावा देने के लिए साझा प्रयास कर सकेंगे। विश्वविद्यालयों के संसाधनों और विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग करने की दिशा में भी सहयोग की संभावनाएं विकसित होंगी।
राज्यपाल ने युवाओं को जॉब क्रिएटर बनने के लिए किया प्रेरित
समापन समारोह में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने कहा कि पूर्वांचल के युवाओं में अपार संभावनाएं हैं। युवाओं को अपनी प्रतिभा का उपयोग केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें नौकरी सृजित करने वाला बनने की दिशा में भी प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने स्टार्टअप कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों के नवाचारों की सराहना की। राज्यपाल ने कहा कि नवाचार और उद्यमिता विशिष्ट मानवीय मूल्य हैं। समाज और विश्वविद्यालयों को इन मूल्यों को सहेजने तथा प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं है। उन्हें विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, समस्या समाधान की क्षमता और नए प्रयोग करने का आत्मविश्वास विकसित करना चाहिए। जब विद्यार्थी अपने आसपास की समस्याओं को पहचानकर उनके समाधान के लिए नए विचार प्रस्तुत करेंगे, तभी नवाचार का लाभ समाज तक पहुंच सकेगा।
राज्यपाल ने इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए रज्जू भैया विश्वविद्यालय के कुलपति, सहभागी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों और विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कार्यक्रम में भाग लेने वाले नवाचारियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की।
राष्ट्रगान के साथ एक दिवसीय कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन में विश्वविद्यालयों, प्रशासन, निवेशकों और स्टार्टअप विशेषज्ञों की सहभागिता ने पूर्वांचल में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए साझा प्रयासों की संभावनाओं को सामने रखा।

