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समाजसेवी रमेश त्रिवेदी का निधन, गंगा घाट पर दी श्रद्धांजलि

समाजसेवी रमेश त्रिवेदी का निधन, गंगा घाट पर अर्पित की श्रद्धांजलि।
समाजसेवी रमेश त्रिवेदी का निधन, गंगा घाट पर अर्पित की श्रद्धांजलि।
  • भोगनीपुर, कानपुर देहात ।

​समाजसेवी रमेश त्रिवेदी Ramesh Trivedi का निधन पूरे प्रदेश के लिए शेक का विषय बना हुआ है। बताते चलें कि उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी यूनियन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और घोड़े व बुलेट वाले अमीन के नाम से मशहूर लगभग 95 वर्षीय समाजसेवी रमेश त्रिवेदी का निधन हो गया। भोगनीपुर कानपुर देहात में ब्रिटिश हुकूमत के पैर उखाड़ने का साम्राज्य देखने वाले 1950 व 1960 के दशक में उप्र राज्य कर्मचारी अध्यक्ष के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके तथा घोड़े व बुलेट वाले अमीन के नाम से मशहूर समाजसेवी गौर गांव निवासी रमेश त्रिेवेदी का अचानक निधन हो गया। उनके निधन पर सैकड़ों की संख्या में राजनेताओं एवं समाजसेवियों ने उनके निवास पर तथा अत्येंष्टि स्थल गंगा घाट पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

गौरतलब है कि गौर गांव निवासी समाजसेवी रमेश त्रिवेदी Ramesh Trivedi ने ब्रिटिश हुकूमत के दौरान अमीन के पद पर कार्य किया था तथा फर्राटेदार अंग्रेजी बोलकर कानपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी को भी आश्चर्यचकित कर दिया था। उस दौर में ब्रिटिश हुकूमत के पैर उखड़ चुके थे और धीरे—धीरे ब्रिटिश हुकूमत अपना सामान समेटकर वापस जा रही थी। उस काल में गौर निवासी रमेश त्रिवेदी Ramesh Trivedi ने उत्तर प्रदेश सरकार में अमीन का पद संभाला था। बता दें कि वह घोड़े से चलकर अमीन का कार्य करते थे। बाद में 1960 के दशक में बुलेट से चलकर बुलेट वाले अमीन के नाम से मशहूर हुए।

उन्होंने उप्र राज्य कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष का पदभार भी संभाला था, लेकिन नौकरी पसंद न आने के कारण त्यागपत्र दे दिया था। बाद में जमींदारी प्रथा में बम्हनौती क्षेत्र की जिम्मेदारी मिली थी, जिसके अंतर्गत लगभग 500 एकड़ खेत उनके जिम्मेदारी में आते थे। बीते दो वर्षों में कोरोना काल के दौरान वे थोड़े शिथिल हो गए थे तथा अस्वस्थ होने के कारण उन्होंने समाजसेवा भी बंद कर दी थी। अस्वस्थ होने के कारण वे अपने गांव स्थित निवास पर ही रह रहे थे। वे अपने पीछे दो पुत्र दीप त्रिवेदी तथा प्रवीण त्रिवेदी उर्फ पिरमू, एक पूत्री श्रीमती पूनम वाजपेयी तथा कई नाती पोतों से भरा पुरा परिवार छोड़ गए हैं।

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