चीन की विस्तारवादी नीति के खिलाफ कान्हा की नगरी से फूंका बिगुल

-वृंदावन में जारी है मानसरोवर, तिब्बत की मुक्ति पर राष्ट्रीय चिंतन
-शनिवार को भारत तिब्बत समन्वय संघ की दो दिवसीय बैठक का हुआ शुभारंभ
– चाइना की साम्राज्यवादी और विस्तारवादी नीति के खिलाफ आंदोलन खड़ा करेंगेः  नीरज सिं


मथुरा। वृंदावन के बुर्जा मार्ग स्थित केशव धाम में भारत तिब्बत समन्वय संघ के दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर में देशभर से विचारक, चिंतक, राजनेता और आरएसएस के लोग जुटे हैं। 28 प्रांतों के 200 से अधिक चिंतक शिविर में चिंतन कर रहे हैं। इसी के साथ मानसरोवर और तिब्बत को मुक्त कराने की मुहिम का शंखनाद भी हुआ है। शिविर में जम्मू कश्मीर, बिहार, असम, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड सहित विभिन्न प्रांतों से विचाकर चिंतन में जुटे है।

शनिवार को प्रथम सत्र का शुभारंभ हुआ, जिसमें सर्वप्रथम हरियाणा व त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी व युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज सिंह ने भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन किया। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा विभाग नीरज सिंह ने कहा कि भारतीय तिब्बत समन्वय संघ द्वारा आज चाइना की साम्राज्यवादी और विस्तारवादी नीति के खिलाफ तिब्बत और कैलाश मानसरोवर की आजादी के संदर्भ में प्रस्ताव परित किया गया है।

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सभी प्रस्ताव पूर्व में भी हम राष्ट्रपति के समक्ष रख चुके हैं। इसे आंदोलन का रूप देना है, एक प्रस्ताव यह भी चिंतन शिविर में पारित किया गया है। भारत चीन युद्ध के दौरान चीन ने जिस भारतीय भू भाग पर कब्जा कर लिया था उसे वापस लिए जाने का प्रस्ताव संसद में उस समय पारित हुआ था, हम वही बात कह रहे हैं कि यह भू भाग वापस लिया जाए। सीमा पर जो सेना खड़ी रहती है उनके हथियार जो वापस ले लिए गए हैं, गलवान को जो एक घटना हुई थी उसके बाद हम मांग करते हैं कि सेना को उनके हथियार वापस दिए जाएं और भी कई प्रस्ताव यहां पारित किए गए हैं। हमें अपनी संप्रभुता, एकता, अखंडता को बनाए रखना है।

वहीं भारत तिब्बत समन्वय संघ की राष्ट्रीय महामंत्री राजू मालवीय ने बताया कि संघ के द्वारा चीन से तिब्बत और कैलाश मानसरोवर की आजादी के लिए इस बैठक का आयोजन किया गया है। इस बैठक में देश के कौने कौने से करीब दो सौ कार्यकर्ता पधारे हैं। सभी कार्यकर्ताओं के द्वारा चीन से तिब्बत और कैलाश मानसरोवर को आजाद कराने के संबंध में अपने अपने विचार रखे जाएगे। यह बैठक लगातार दो दिनों तक चलेगी।

उन्होंने बताया कि भारत तिब्बत समन्वय संघ अपना करीब डेढ़ वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुका है। इसका गठन कोरोना काल के दौरान 14 जनवरी को किया गया था। वहीं उन्होंने बताया कि इस बैठक में तिब्बत की महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर भी विचार किया जाएगा। वहीं उन्होंने बताया कि तिब्बत महिला वेलफेयर सोसाइटी की सदस्य भी इस बैठक में सम्मिलित हुई है। राष्ट्रीय संयोजक हेमेन्द्र तोमर, राष्ट्रीय महामंत्री विजय मान, दिल्ली प्रांत महिला विभाग अध्यक्ष संध्या सिंह, अतुल मंगला, जिलाध्यक्ष राजकुमार खण्डेलवाल, मीडिया संयोजक शिव प्रकाश शर्मा आदि मौजूद रहे।

28 प्रांतों से 200 से अधिक चिंतक शिविर में कर रहे हैं चिंतन
चिंतन शिविर में लघु भारत का आभास हो रहा है। 28 प्रांतों से 200 से अधिक चिंतक शिविर में जुटे हैं। शिविर में वैज्ञानिक, शिक्षक, चिकित्सक, राजनेता जुटे हैं। शिविर के महत्व को इस बात से भी समझा जा सकता है कि अलग अलग क्षेत्रों के विशेष शिविर के दौरान अपने विचार साझा कर रहे हैं, जिससे इस मुद्दे पर राष्ट्रीय सोच और समझ बनाने में मदद मिलेगी।