Today Singhu Border: सरदारों के बीच क्यों ‘बेअसरदार’ हो रहे हैं टिकैत बंधु

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Today Singhu Border: सरदारों के बीच क्यों ‘बेअसरदार’ हो रहे हैं टिकैत बंधु
Today Singhu Border: सरदारों के बीच क्यों ‘बेअसरदार’ हो रहे हैं टिकैत बंधु
  • संवाददाता, गाजियाबाद

Today Singhu Border: कृषि कानून को लेकर सिंघु बार्डर पर बैठे किसानों के मन में अब उदासीनता छाती जा रही है। मामला है सरकार की उपेक्षा और एक लंबे समय से धरने पर बैठने के बाद भी कोई नतीजा न निकलना। पंजाब, हरियाणा और यूपी समेत कई राज्यों के किसान 28 नवंबर 2020 से दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न बॉर्डर पर बैठे हैं। किसानों का दावा है कि वो सरकार से बिल को वापस कराकर ही दम लेंगे।

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के चलते लॉकडाउन और धारा-144 लगाने के बावजूद किसान प्रदर्शनकारी अपना धरना खत्म करने या फिर स्थगित करने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन एक और बड़ी बाधा किसानों के बीच आ खड़ी हुई है। किसानों का आलू सड़ने लगा है और अन्य खाद्यान्नों की भी स्थिति अब खराब होने लगी है।

Today Singhu Border: अब आंदोलन पर क्या असर पड़ रहा है

सालों की तैयारी करने के बाद धरने पर बैठे किसानों को ने जिद ठान ली है कि कृषि कानून से राज्यों के किसानों की हालात खराब होने लगी है और इस कानून को वापस करना ही होगा उसके बाद ही वो यहां से हटेंगे।

कोरोना संक्रमण के चलते अब यहां धरने पर आने वाले किसानों की संख्या घटने लगी है और नए लोगों के आने की परंपरा भी टूटने लगी है। एक वक्त वह भी आया था कि राशन जितना आ रहा था वह कई भंड़ारों में दो से तीन दिन भी नहीं चल पाता था। धीरे-धीरे अब अब इस आंदोलन में लोगों का इंटरेस्ट कम होने लगा है। अब हालात ऐसी है कि मंच के सामने और धरने पर शारीरिक दूरी का पालन कर बैठाने के बावजूद यह भर नहीं पा रहा है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में यूपी गेट पर चल रहा धरना प्रदर्शन बेहद फीका हो गया है। 

रोजाना की डिंमांड भी नहीं हो रही पूरी

Today Singhu Border: एक ओर आंदोलन में जरूरी चीजों की आपूर्ति घट गई है तो वहीं गर्मी के साथ ही कई चीजों की किल्लत हो रही है। रोजाना की आपूर्ति जैसे दूध, सब्जी और अन्य चीजों की आपूर्ति अब बेहद कम है। गांवों से मदद पहुंचाने के लिए जो ट्रैक्टर-ट्राली लेकर लोग पहुंचते थे, वे अब खेतों के कार्य में जुटे हैं। कई अन्य संगठन जो लंगर चला रहे थे, वहां भी अब चूल्हे ठंडे हैं।

राकेश टिकैत की अपील भी बेअसर

आंदोलन का रंग फीका पड़ता देख राकेश टिकैत ने लोगों को अपील कर एकत्र रहने को कहा लेकिन उनकी बातों का असर भी पहले जैसा नहीं रहा। किसानों को खेत में काम करने के लिए चले जाने के कारण अब आने वालरों कह तादात में भारी कमी आ खड़ी हुई है।

फीका पड़ा बड़े टिकैत का भी जादू

टिकैत बंधुओं के कारण आंदोलन एक बार पुन: जीवित हो उठा था लेकिन ऐसा लग रहा है कि अब सरदारों के बीच टिकैत बंधु बेअसर होते जा रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन की मासिक पंचायत में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने अपील की इसके बावजूद लोगों की संख्या कम ही दिखाई पड़ रहीी है। 

न तो जांच और नहीं वैक्सीन लगवा रहे किसान

पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों के प्रदर्शनकारी किसानों के यहां जमा रहने के कारण संक्रमण में तेजी आ सकती है। लोगों की आवाजाही के कारण किसान कोरोना संक्रमित हो सकते हैं और फिर यह स्थिति भयानक हो सकती है। 

दूसरी ओर किसान कोरोना संक्रमण की जांच कराने को तैयार नहीं हैं। किसानों ने वैक्सीन लगवाने से भी इंकार कर दिया। स्थानीय पुलिस-प्रशासन की अपील के बावजूद किसान इसके लिए तैयार नहीं हैं। कुछ किसान कह रहे हैं कि वे अपने राज्यों में कोरोना का पहली टीका लगवाकर आएं हैं तो कुछ किसानों ने सीधे तौर पर मना कर दिया कि वे वैक्सीन नहीं लगाएंगे।