ईद का त्योहार देता है मोहब्बत‍ और इंसानियत का पैगाम

ईद मुसलमानों का सबसे बड़ा पर्व है। ईद को ईद- उल- फित्र के नाम से भी जाना जाता है। रमजान के पाक महीने में 29 या 30 रोजे रखने के बाद ईद का त्योहार मनाया जाता है। मुस्लिम समुदाय के लोग इस पर्व को बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है।

ईद के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग नए वस्त्र पहनते हैं और अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं। ईद के नमाज के साथ इस त्योहार की शुरुआत होती है। नमाज के बाद सब लोग एक दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हैं। इस बार कोरोना वायरस की वजह से ईद का त्योहार भी घर में रहकर ही मनाया जाएगा।

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ईद-उल-फितर क्या है?

भूख-प्यास सहन करके एक महीने तक सिर्फ खुदा को याद करने वाले रोजेदारों को अल्लाह का इनाम है। सेवइयां में लिपटी मोहब्बत की मिठास इस त्योहार की खूबी है। मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार कहा जाने वाला यह पर्व न सिर्फ हमारे समाज को जोड़ने का मजबूत सूत्र है, बल्कि यह इस्लाम के प्रेम और सौहार्दभरे संदेश को भी पुरअसर ढंग से फैलाता है।

ईद के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग अपनी क्षमता के अनुसार दान भी करते हैं। रमजान के पाक महीने में दान का बहुत अधिक महत्व होता है। दान दो रूपों में किया जाता है, फितरा और जकात। ईद से पहले फितरा और जकात हर मुसलमान का फर्ज होता है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, ईद का त्योहार गरीब और अमीर सबके लिए होता है। गरीब लोग भी ईद का त्योहार धूम- धाम से मना सके इसलिए ईद से पहले जकात और फितरा देना फर्ज होता है। हर मुसलमान अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों को दान देता है।

ईद क्यों मनाई जाती है?

ऐसा माना जाता है कि पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बद्र की लड़ाई में जीत हासिल की थी। इस जीत की खुशी में सभी का मुंह मीठा करवाया गया था, इसी दिन को मीठी ईद या ईद-उल-फितर के रुप में मनाया जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार हिजरी संवत 2 यानी 624 ईस्वी में पहली बार ईद-उल-फितर मनाया गया था। वहीं, ईद क्यों मनाते हैं इसके पीछे का एक कारण और भी है। पवित्र कुरान के मुताबिक, रजमान के पाक महीने में रोजे रखने के बाद अल्लाह एक दिन अपने बंदों को इनाम देता है, जो दिन ईद का होता है। वहीं अल्लाह के बंदे उनका शुक्रिया अदा करते हैं।

ईद का महत्व-

ईद का पर्व खुशियों का त्योहार है, वैसे तो यह मुख्य रूप से इस्लाम धर्म का त्योहार है परंतु आज इस त्योहार को लगभग सभी धर्मों के लोग मिल जुल कर मनाते हैं। दरअसल इस पर्व से पहले शुरू होने वाले रमजान के पाक महीने में इस्लाम मजहब को मानने वाले लोग पूरे एक माह रोजा (व्रत) रखते हैं। रमजान महीने में मुसलमानों को रोजा रखना अनिवार्य है, क्योंकि उनका ऐसा मानना है कि इससे अल्लाह प्रसन्न होते है।

यह पर्व त्याग और अपने मजहब के प्रति समर्पण को दर्शाता है। यह बताता है कि एक इंसान को अपनी इंसानियत के लिए इच्छाओं का त्याग करना चाहिए, जिससे कि एक बेहतर समाज का निर्माण हो सके।

ईद उल फितर का निर्धारण एक दिन पहले चाँद देखकर होता है। चाँद दिखने के बाद उससे अगले दिन ईद मनाई जाती है। सऊदी अरब में चाँद एक दिन पहले और भारत मे चाँद एक दिन बाद दिखने के कारण दो दिनों तक ईद का पर्व मनाया जाता है। ईद एक महत्वपूर्ण त्यौहार है इसलिए इस दिन छुट्टी होती है। ईद के दिन सुबह से ही इसकी तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लोग इस दिन तरह तरह के व्यंजन, पकवान बनाते है तथा नए नए वस्त्र पहनते हैं।

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