
नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में पार्टी के नवनियुक्त राज्य प्रभारियों और सह-प्रभारियों की बैठक शुरू हुई है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में करीब 65 प्रभारी और सह-प्रभारी हिस्सा ले रहे हैं। बैठक का प्रमुख फोकस संगठन को राज्यों में अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने के साथ आगामी राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा करना बताया जा रहा है।
बैठक में राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश के प्रभारी विनोद तावड़े, सुनील बंसल, स्मृति ईरानी, बिप्लब देब, हरीश द्विवेदी, संजय भाटिया, सतीश पूनिया और गजेंद्र पटेल समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी इसे संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है।
सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश और पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की तैयारियां बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकती हैं। दोनों राज्यों में संगठन की स्थिति, चुनावी कार्यक्रमों और जमीनी स्तर पर गतिविधियों की समीक्षा के साथ आगे की रणनीतिक तैयारियों पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि बैठक में तय होने वाले अंतिम निर्णयों की आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ की गतिविधियों की समीक्षा भी संभावित एजेंडे में है। पार्टी संगठन के स्तर पर इस अभियान को आगे बढ़ाने और आगामी कार्यक्रमों को लेकर दिशा तय कर सकती है।
यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब भाजपा ने 23 सितंबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए थे। इन नियुक्तियों के बाद पहली बड़ी संगठनात्मक बैठक के रूप में इसे राज्यों में पार्टी के कामकाज की समीक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
नियुक्तियों में स्मृति ईरानी को हरियाणा और छत्तीसगढ़ का प्रभार, राम माधव को तमिलनाडु की जिम्मेदारी और विनय सहस्रबुद्धे को दिल्ली का प्रभारी बनाया गया है। दिल्ली के लिए जामयांग त्सेरिंग नामग्याल और दर्शना जरदोश को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। पार्टी के संचार ढांचे में भी बदलाव किए गए हैं।
राज्य प्रभारियों से उनके-अपने राज्यों में संगठन की मौजूदा स्थिति और जमीनी नेटवर्क की जानकारी लिए जाने की उम्मीद है। ऐसे में बैठक केवल आगामी चुनावों की तैयारियों तक सीमित न रहकर संगठन के विस्तार, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी की गतिविधियों के समन्वय के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

