15 03 2021 bjp jpg webp

Lok Sabha Election में भाजपा का मिशन फतह

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कहते हैं कि दिल्ली की सत्ता कार रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जा़ता है। कहने का तात्पर्य यह है कि देश का सबसे बड़ा राज्य होने के कारण यहां 80 लोकसभा सीटें हैं। इसलिए यहां पर जीती गई सीटें केंद्र की सत्ता पाने में अहम भूमिका का निर्वाह करती हैं। सन् 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा की अगुवाई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानि एनडीए ने 73 लोकसभा सीटों पर जीत का परचम लहराया था। तदुपरांत सन् 2019 में हुए आम चुनाव में एनडीए ने 66 सीटों पर जीत हासिल की थी।

यहां पर यह बता देना उपयुक्त होगा कि सन् 2014 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। इसके बावजूद उस वक्त समाजवादी पार्टी में अंतर्कलह और पीएम मोदी की लहर का फायदा भाजपा और एनडीए को मिला तथा एनडीए 73 सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब रहा। सन् 2019 में यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में एनडीए की सरकार थी। उस वक्त भाजपा व उसकी सहयोगी अपना दल ने 64 सीटें जीतीं।

तदुपरांत तीन सीटों पर उपचुनाव हुए, जिनमें भाजपा ने दो सीटों पर जीत हासिल की। इस बार 2024 मे यूपी में सत्तारूढ़ योगी आदित्यनाथ की सरकार में शामिल भाजपा नेताओं का मानना है कि इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सूबे की पूरी 80 लोकसभा सीटों पर जीत का परचम लहरायेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा भाजपा नेताओं के इस विश्वास के पीछे निहितार्थ हैं।

दरअसल इस वक्त यूपी में बदलाव की बयार चल रही है। सूबे में यह बदलाव योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद आया है। देश विदेश के बड़े उद्यमी यूपी में निवेश कर उद्योग धंधे और कल कारखाने लगाने के लिए उत्सुक हैं। कभी जंगलराज, भाई भतीजावाद, भ्रष्टाचार से जूझने वाला यूपी अब भारी-भरकम मोटा निवेश भी खींच रहा है। बीते सात वर्षों में यूपी में निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की दिशा में कई प्रयास किये गए हैं।

जिस यूपी से कुछ साल पहले तक कोई सुकून भरी खबर आती ही नहीं थी, वहां से सकारात्मक खबरों का आना सुखद है। यूपी से अब दंगा-फसाद या गैंगवार की खबरें नहीं आती। अब यहां पर फिरौती वसूलने के लिए कारोबारियों का अपहरण नहीं होता। अब यहां के सरकारी दफ्तरों में काहिल बाबुओं के लिए कोई जगह नहीं बची है। अगर यूपी बदल रहा है तो साफ है कि वहां की जनता के चेहरे पर खुशी को पढ़ा जा सकता है।

कुछ वर्ष पूर्व तक किसने सोचा था कि यूपी खेलों के क्षेत्र में भी अपनी सशक्त पहचान बनाने लगेगा। बीते वर्ष चीन के हांगझोऊ शहर में हुए एशियाई खेलों में भारत के पदकों का शतक पूरा कराने में उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों का अहम योगदान रहा है। एशियाई खेलों के महाकुंभ में पहली बार यूपी से कुल 36 एथलीटों ने देश के साथ साथ यूपी का भी नाम रोशन किया। इन खिलाड़ियों ने सात स्वर्ण, आठ रजत और आठ कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। यूपी के खिलाड़ियों ने पहली बार इतने सारे पदक जीते थे। इससे पहले सन् 2018 के जकार्ता और 2014 के इंचियॉन (दक्षिण कोरिया) में उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों ने 11-11 पदक ही जीते थे। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के खिलाड़ियों ने सबसे चौंकाने वाला प्रदर्शन किया था ।

एशियाई खेलों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 13 एथलीटों ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। इनमें से छह मेरठ जिले से हैं और चार ने दो स्वर्ण सहित पांच पदक जीते हैं।

निसंदेह, जिस सूबे में खेलों का स्तर सुधर रहा है, समझ लें कि उस सूबे का विकास हो रहा है। इस परिवर्तन के पीछे योगी आदित्यनाथ का कुशल नेतृत्व है। लोकसभा चुनाव में भाजपा और एनडीए द्वारा सभी सीटों पर जीत का परचम लहराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा नेताओं के भरोसे की मुख्य वजह यही है। उन्हें विश्वास है कि लोकसभा चुनाव के समय बदलते और आगे बढ़ते यूपी की अवाम अपना फैसला उनके हक में जरूर सुनायेगा।

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News Desk

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