
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज की गूंज अब मेरठ तक पहुंच गई है। इस घटना को लेकर वकीलों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला है। ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन, मेरठ ने सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराया और केंद्र सरकार से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। आखिर इस विरोध की वजह क्या है और ज्ञापन में क्या मांगें उठाई गई हैं? आइए बताते हैं पूरी खबर।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में मेरठ में ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन के पदाधिकारी और अधिवक्ता एकजुट होकर सामने आए। संगठन ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई।
विरोध प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने कहा कि देश का संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार देता है। यदि छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे तो उनके साथ संवाद स्थापित किया जाना चाहिए था, न कि बल प्रयोग किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा
कि छात्रों के साथ हुई इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग उठाई गई।
इसके बाद ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन डीएम के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई।
विरोध प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुना जाना चाहिए। उनका कहना था कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार का कठोर व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
फिलहाल इस विरोध के बाद मेरठ में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि राष्ट्रपति कार्यालय और संबंधित मंत्रालय इस ज्ञापन पर क्या कदम उठाते हैं और क्या छात्रों के मामले में किसी प्रकार की नई कार्रवाई देखने को मिलेगी।
फिलहाल, जंतर-मंतर की घटना ने दिल्ली से लेकर मेरठ तक बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गर्माने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।






