• कविता व गीत
  • सबको मिले हैं दुख यहां…

    Namit Gupta Mansi

    बहुत बेचैनियों भरी हैं ये सुकून की राहें ,
    रास्तों में ही उलझ रहा हूं‌ धागों की तरह !!

    समझो जरा मेरी भी इन लाचारियों को ,
    भीग रहा हूं बरसात में कागज की तरह !!

    अभी कितने और बाकी हैं ये तेरे इम्तिहान ,
    जीतके भी रोया हूं खाली खंडहर की तरह !!

    न रोको मुझे आज कहने दो हाल-ए-दिल ,
    गया तो न लौटूंगा बीते बचपन की तरह !!

    सुनो तमाशा न बनाना मेरी मज़बूरियों का तुम ,
    सबको मिले हैं दुख जरूरी सवालों की तरह !!

    जैसे उमस भरी धूप को है बारिशों का इंतज़ार,
    बरसना है तुमको भी किसी बादल की तरह !!

    यूं तो मेरी अभी उम्मीद बहुत बाकी हैं “उससे”,
    पर अच्छा लगता है सावन, “सावन” की तरह !!

    नमिता गुप्ता “मनसी”

    मेरठ, उत्तर प्रदेश

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    editor

    पत्रकारिता में बेदाग 11 वर्षों का सफर करने वाले युवा पत्रकार त्रिनाथ मिश्र ई-रेडियो इंडिया के एडिटर हैं। उन्होंने समाज व शासन-प्रशासन के बीच मधुर संबंध स्थापित करने व मजबूती के साथ आवाज बुलंद करने के लिये ई-रेडियो इंडिया का गठन किया है।
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