
- खंडपीठ स्थापना की मांग पर अधिवक्ताओं का बड़ा ऐलान
- 23 अक्टूबर के एमएलसी चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज
मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने आंदोलन तेज करने का संकेत दिया है। केंद्रीय संघर्ष समिति पश्चिमी उत्तर प्रदेश ने घोषणा की है कि यदि खंडपीठ स्थापना की शीघ्र घोषणा नहीं की गई, तो आगामी विधान परिषद चुनाव में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों का विरोध किया जाएगा। समिति ने 23 अक्टूबर 2026 को होने वाले मेरठ-सहारनपुर खंड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव को लेकर यह चेतावनी दी है।
केंद्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन एवं मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज कुमार शर्मा तथा संयोजक परवेज आलम ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ की मांग करीब 50 वर्षों से चली आ रही है। इसके बावजूद इस दिशा में ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि क्षेत्र की बड़ी आबादी को न्यायिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों खर्च होते हैं।
समिति की ओर से जारी सूचना के अनुसार, मेरठ-सहारनपुर खंड के 22 जनपदों और तहसील बार एसोसिएशनों के अधिवक्ताओं ने सत्ताधारी पार्टी के प्रत्याशियों का पूर्ण रूप से बहिष्कार करने का प्रस्ताव पारित किया है। समिति ने स्पष्ट किया कि खंडपीठ स्थापना की घोषणा नहीं होने पर यह विरोध आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों तक भी जारी रखा जा सकता है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि खंडपीठ की स्थापना केवल वकीलों का मुद्दा नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आम लोगों को सुलभ और किफायती न्याय दिलाने से जुड़ा विषय है। समिति ने सरकार से मांग की है कि क्षेत्र की लंबे समय से लंबित मांग पर जल्द निर्णय लिया जाए।
खंडपीठ आंदोलन को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी
केंद्रीय संघर्ष समिति ने संकेत दिया है कि हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापना को लेकर आंदोलन को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा। एमएलसी चुनाव में बहिष्कार की चेतावनी के जरिए समिति सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है। अब देखना होगा कि इस घोषणा का चुनावी माहौल पर क्या असर पड़ता है और खंडपीठ स्थापना की मांग पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है।

