एक अधुरी उड़ान
नन्ही-सी जान दुनिया में आती है, गिर-गिर कर नन्हे कदमों से चलना सीख जाती है। पा-पा से ‘पापा’, मा-मा से ‘मम्मा’ कहना सीख रही होती है, मासूमियत अभी उसकी आँखों में बसती है। पर दुनिया में कदम रखते ही हवाओं…
के, मैं जिंदा हूँ अभी
के, मैं जिंदा हूँ अभीशहीद दिवस पर शहीदों को प्रणाम शहीद के परिवार कोकुछ मुआवज़ा,और शहीद कोदो मिनट का मौन।बस, ड्यूटी खत्म।फिर इसके बादकैसा शहीद?शहीद कौन? किसी मृतात्मा कीशांति के लिएजब रखा गया“दो मिनट का मौन”तो सभी जीवात्माएँयही सोच रही…
माँ और शिशु एक अटूट बंधन…!
स्तनपान सप्ताह पर विशेष (1 से 7 अगस्त) माँ और शिशु के बीच हैं एक अटूट बंधन,स्वास्थ्य आधार व भावनात्मक गठबंधन।विश्व स्तनपान सप्ताह इसका खूब महत्व,जुड़ाव का अभिन्न प्राकृतिक स्रोत घनत्व।वैश्विक स्तर पर स्तनपान के बहुतेरे लाभ,समाज के हर वर्ग…
प्रकृति की नाराज़गी हैं भयंकर…!
नाराज़ प्रकृति की नाराज़गी हैं भयंकर,स्वार्थवश संसाधनों का ‘दोहन’ निरंतर।प्रकृति-मानव का संबंध सदियों पुराना,ऊपर उठाया लाभ चुरा लिया खजाना।पिघल रहे ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन,असमय बाढ़, सूखा, तूफान, भूस्खलन।प्राकृतिक विपदाओं से जूझ रहा मानव,मानवीय हस्तक्षेप की भूमिका में दानव।अचानक बाढ़ गांवों का…
अनिवार्य और अतिरिक्त
ये कुछअतिरिक्त से लोग हीसही से समझ पाते हैंकविता की अनिवार्यता को ,अन्यथा कविताएं सिर्फपाठ्यक्रमों का ही हिस्सा बनी रहतीं , ठीक उसी तरह जैसेहमारा खालीपन हीधीरे-धीरे भरता चला जाता हैउदासियो से उपजीवीरान जगहों को ,क्योंकि कभी-कभीस्वयं के लिएयूं ही…
सबको मिले हैं दुख यहां…
बहुत बेचैनियों भरी हैं ये सुकून की राहें ,रास्तों में ही उलझ रहा हूं धागों की तरह !! समझो जरा मेरी भी इन लाचारियों को ,भीग रहा हूं बरसात में कागज की तरह !! अभी कितने और बाकी हैं ये…
समय-शायरी: अन्याय के खिलाफ़ हैं तो बोलिए ज़रूर
समय-शायरी में आज पढ़िये सुल्तानपुर जनपद के वरिष्ठ गजलकार डॉ. डीएम मिश्र की बेहतरीन गजल इतनी-सी इल्तिजा है चुप न बैठिए हुज़ूरअन्याय के खिलाफ़ हैं तो बोलिए ज़रूरमुश्किल नहीं है दोस्तो बस ठान लीजिएगर सामने पहाड़ है तो तोड़िए ग़ुरूरदेखा…
समय-शायरी: रक्तदान
घायल फौजियों को रक्त की जरूरत है ,घायल फौजियों को रक्त की जरूरत है ,यह वाक्य जब बूढ़े के कानों में पड़ा,बूढ़े बाबा को भी देशभक्ति का नशा चढ़ा,बोला -मैं भी रक्तदान शिविर में चलूंगा,मेरे देश को खून की जरूरत…
पहलगाम हमले पर कविता
कायर बुझदिल पाकिस्तानी,हरकत करते हो बचकानी। मासूमों का रक्त बहाकर,पियोगे सिन्धू का पानी। मारा सबको धर्म पूछकर,कर डाली तूने मनमानी। आंखे भारत की रक्त तत्प् हैँ,जीले थोड़ा सा ही वक्त है। जब कहर हिन्द का बरसेगा,तब पाक जान को तरसेगा।…
Dr DM Mishra Sultanpur की नई क़िताब- सच कहना यूँ अंगारों पर चलना होता है
जैसे बीज अंकुरित हो धरती फोड़कर बाहर आता है ,आकार ग्रहण करता है , पौधे के रूप में , लता के रूप में और विकसित होकर पूर्ण यौवन प्राप्त करता है वैसे ही प्रसिद्ध ग़ज़लकार Dr DM Mishra Sultanpur की…











